उद्धव बोले- बीजेपी वोट चुराने के बाद उम्मीदवार चुरा रही: लोकतंत्र पर अब भीड़तंत्र का कब्जा; 20 साल बाद शिवसेना भवन पहुंचे राज ठाकरे

मुंबई में शिवसेना (UBT) और MNS ने आरोप लगाया है कि महायुति उम्मीदवारों को निर्विरोध चुनाव जीतने की स्थिति में, जहां पार्टी के उम्मीदवार निर्विरोध जीते हैं वहां दोबारा चुनाव होना चाहिए। इस खिलाफ महायुति ने आरोप लगाया है कि सत्ताधारी गठबंधन ने उम्मीदवारों को चुनाव से हटने के लिए मजबूर करने के लिए धमकियों और पैसे का इस्तेमाल किया।
 
शिवसेना और एमएनएस की बात है तो वाह, ये दोनों ही मुंबई में बहुत बड़े नाम हैं 🤔। जो बोल रहे हैं वह बिल्कुल सही हैं, उम्मीदवार चुनाव से हटना नहीं चाहिए जब वे निर्विरोध जीत गए हों। इससे क्या फर्क पड़ता कि उनकी पार्टी ने कितनी धमकियां दी और कितना पैसा खर्च किया। चुनाव से पहले उम्मीदवारों को यह नहीं पता होना चाहिए कि वे जीतें या खुद को फेंक दें। लेकिन फिर भी एक बात तो जरूर है – हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि चुनाव में निष्पक्षता और ईमानदारी का रास्ता ढूंढ़ सके।
 
मुंबई में ऐसा बहुत ही दिलचस्प मामला आया है, जहां शिवसेना और MNS ने आरोप लगाया है कि महायुति उम्मीदवारों को निर्विरोध चुनाव जीतने की स्थिति में दोबारा चुनाव होना चाहिए। मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा है, जहां सत्ताधारी गठबंधन ने उम्मीदवारों को चुनाव से हटने के लिए मजबूर करने के लिए धमकियों और पैसे का इस्तेमाल किया। 🤔

मुझे लगता है कि दिल्ली में महायुति उम्मीदवारों को निर्विरोध चुनाव जीतने की स्थिति में दोबारा चुनाव होना एक अच्छा निर्णय होगा, ताकि जनता अपने अधिकार को मजबूत बना सके। और सत्ताधारी गठबंधन को अपने आरोपों पर जवाब देना चाहिए, ताकि यह साफ हो जाए कि वे न्यायपूर्ण तरीके से चुनाव चलाने की कोशिश कर रहे हैं या नहीं। 💡
 
शिवसेना और मानसिंह सख्खे की बातें समझ में आती हैं पर ये दोनों खिलाफतें क्यों लगा रहे हैं? महायुति उम्मीदवारों को निर्विरोध जीतने की स्थिति में दोबारा चुनाव होने की बात कहकर उन्हें पता चल रहा है कि उनकी जीत अभी भी एक दुष्चक्र है।
 
मुझे लगता है कि मुंबई में ऐसी गड़बड़ी क्यों हो रही है? शिवसेना और MNS ने ये दोनों आरोप लगाए हैं कि महायुति उम्मीदवारों को चुनाव जीतने में मदद कर रही है। लेकिन मुझे लगता है कि यह भ्रष्टाचार की बात हो रही है। चुनाव से पहले भी ऐसी कई बातें होती हैं जो हमें आश्चर्यचकित करती हैं।

मेरी राय में उम्मीदवारों को जीतने के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज यह है कि वे अपना काम अच्छी तरह से करें। और अगर उन्होंने अच्छा काम किया है, तो उन्हें फिर से चुनाव में जीतने का मौका मिलना चाहिए। लेकिन आरोप लगाने से कुछ भी नहीं बदला। मुझे लगता है कि हमें चुनाव प्रणाली में सुधार करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हर उम्मीदवार अपने आप में मजबूत हो।

मुझे उम्मीद है कि वास्तविकता उजागर होने पर लोगों ने ध्यान देने की जरूरत है।
 
जीरो वोट देना चाहिए तो फिर दोबारा चुनाव होना जरूरी है , मुझे लगता है कि ये दोस्तों ने बहुत सख्ती से बोला होगा, लेकिन मैंने एक महायुति उम्मीदवार से मिले थे और वो बोल रहे थे कि हमें चुनाव जीतने के लिए 5 साल तक दौड़ना पड़ता है और कभी निर्विरोध नहीं जीत पाते , शायद उन्होंने मुंबई में एक बार चुनाव हुआ तो फिर वाकई सख्ती से बोला होगा।
 
मुंबई में ऐसा मामला तो पहले ही देखा गया था, जहां उम्मीदवार चुनाव जीतने के बाद भी फिर से चलने वाले चुनाव में प्रदर्शन नहीं कर पाते। यह एक बड़ा मुद्दा है जिस पर ध्यान देने की जरूरत है। शिवसेना और MNS की इस आलोचना पर महायुति की बात समझ में आती है, लेकिन ऐसे मामलों में चुनाव आयोग को तेजी से कार्रवाई करनी चाहिए।

मुझे लगता है कि अगर दोबारा चुनाव होना है तो उसकी तैयारी पहले से अच्छी तरह से होनी चाहिए, न कि पार्टियों पर राजनीतिक दबाव के।
 
यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है 🤔. अगर चुनाव जीतने की स्थिति में दोबारा चुनाव होना ही सही है, तो फिर भी क्या दो बार जीतने वालों को सुरक्षा की छाया में रहने की आजादी मिलेगी? 🤷‍♂️

मुझे लगता है कि चुनाव आयोग और कानून की दुनिया में कुछ नियम बनाए जाने चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हर उम्मीदवार को समान अवसर मिले। और अगर कोई उम्मीदवार अपने प्रतिद्वंद्वी को मारने की कोशिश करता है, तो उसे सजा मिलनी चाहिए। 🚫

और यह भी एक बात है... क्या हमारे देश में चुनाव में पैसे और धमकियों से लड़ने वाले उम्मीदवारों को वोट मिल सकते हैं? 🤑 यह तो किसी की भी जिम्मेदारी नहीं है, यह हमारी देश की समस्या है।
 
મुंબઈ તો એવું નથી કે જ્યાં રાજકારણ નહિ પણ ઉદ્યોગસાહસિકો માટે એવું થઈ શકે. આ અને બીજું પડકાર થયાનો સમાવેશ એક ગ્રુપ નહિ કરીને, દેશ માટે બોલતા જ હોવું ચાહીએ.
 
मुझे लगता है कि ये बहुत बड़ा मुद्दा है। मुंबई में शिवसेना और MNS ने बिल्कुल सही कहा है, अगर कोई उम्मीदवार निर्विरोध जीत गया तो दोबारा चुनाव होना चाहिए। इससे लोकतंत्र की गंभीरता साफ होती है। और महायुति ने भी सही कहा है कि सत्ताधारी गठबंधन ने धमकियों और पैसे का इस्तेमाल किया। इससे चुनाव की अखंडता पर सवाल उठता है।

मुझे लगता है कि यह मामला बहुत ज्यादा गहरा है। अगर हमारे देश की लोकतंत्र को चलाने वाले नेता चुनाव की नियमों का उल्लंघन नहीं कर सकते, तो कैसे हमें उम्मीदवारों की बेअखली होने का सामना करना पड़ेगा।
 
अरे, मुंबई में शिवसेना और MNS ने महायुति पर बहुत बुरी तरह से आरोप लगाए हैं 🤔। वहीं, मुझे लगता है कि भारी मतदान वाली जगहों पर दोबारा चुनाव होना एक अच्छा विचार हो सकता है। इससे राजनीतिजगत में ईमानदारी और निष्पक्षता बनाए रखने में मदद मिलेगी 💡। लेकिन, महायुति के आरोपों पर ध्यान देना जरूरी है, जैसे कि उम्मीदवारों को चुनाव से हटने के लिए मजबूर करने की मांग 🚫। तो क्या सच्चाई क्या है? इस बात पर वास्तविक सबूत देखने की जरूरत है 👀
 
मुझे लगता है कि यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है 🤔। अगर एक पार्टी के उम्मीदवार निर्विरोध जीत गए तो दोबारा चुनाव होना चाहिए, नहीं तो यह तो लोकतंत्र की जड़ों को दर्पण बन जाएगा। और महायुति के आरोपों की बात करें तो ये सत्ताधारी गठबंधन को धमकाने का एक तरीका हो सकता है, लेकिन इससे चुनावी प्रक्रिया का खलल नहीं पड़ता। मैं सोचता हूं कि दोबारा चुनाव होना न केवल एक विकल्प है बल्कि यही सही और न्यायपूर्ण तरीका है। 🤷‍♂️
 
अरे, ये तो मुंबई में खेल देख रहे हैं 🏟️! शिवसेना और MNS ने आरोप लगाया है कि महायुति उम्मीदवारों को चुनाव जीतने की स्थिति में दोबारा चुनाव होना चाहिए। तो कहो कि क्या लोग अपनी जिंदगी को समझ नहीं पाते? चाहे उम्मीदवार निर्विरोध जीते, फिर भी दोबारा चुनाव होना चाहिए ताकि कोई भी गलती नहीं हो। और महायुति ने कहा है कि सत्ताधारी गठबंधन ने उम्मीदवारों को धमकियों और पैसे का इस्तेमाल करने का मौका दिया। तो यह तो साफ है कि चुनाव में ब्रिज़िंग की कोशिश की जा रही है।
 
मुझे लगता है कि बीती चुनाव में महायुति उम्मीदवार निर्विरोध जीत गए तो उनके लिए दोबारा चुनाव होना एक अच्छा संकेत है। यह मान लें कि उनके पास वोटों का सही मूल्यांकन करने और विरोधी पार्टियों से मतभेदों को समझने की ताकत है तो उन्हें निर्विरोध जीतने का रिस्ता होना चाहिए। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उम्मीदवारों को ब्रेक देना चाहिए, इसके बजाय उन्हें अपनी गलतियों से सीखने और मतदाताओं को फिर से विश्वास करने का मौका देना चाहिए
 
अरे, मुंबई में शिवसेना और MNS ने बहुत बड़ा आरोप लगाया है - महायुति उम्मीदवारों को चुनाव जीतने की स्थिति में, दोबारा चुनाव करना चाहिए! तो ऐसा तो फिर से सभी उम्मीदवार चुनाव से हटने पर मजबूर नहीं होते। मुझे लग रहा है कि सत्ताधारी गठबंधन ने बिल्कुल भ्रष्टाचार किया है।

अरे, लोगों को पता होना चाहिए कि चुनाव कानून तोड़ने में कौन सी पार्टी शामिल है! और फिर वे लोग चुनाव जीतने की बात करते हैं। तो हमें ऐसी बातों पर ध्यान देना चाहिए कि चुनाव निष्पक्ष रहे।

इस तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए हमें अपने वोटों का प्रयोग करना चाहिए।
 
मुझे लगता है कि ये सब बहुत बड़ा झूठ है, मैंने अपने दोस्त की पत्नी को भी जो महायुति उम्मीदवार है वाह, उनकी पोल को बिठाने के लिए उन्होंने बहुत कुछ खर्च करा होगा। 😒 मुझे लगता है कि यह सब सत्ताधारी गठबंधन का राजनीतिक खेल है, वे अपने उम्मीदवारों को जीतने के लिए सब कुछ करने को तैयार हैं। मैंने देखा है कि जब भी कोई चुनाव होता है तो उम्मीदवार हमेशा डराते रहते हैं और अपने विरोधियों पर सावधानी बरतते रहते हैं, यही सब राजनीतिक रंगबेरungi है। 🤑
 
मैंने पढ़ा है कि शिवसेना और MNS ने आरोप लगाया है कि महायुति उम्मीदवारों को चुनाव जीतने की स्थिति में दोबारा चुनाव होना चाहिए। तो मतलब है ये लोग अभी भी अपने गुस्से को निकालने की कोशिश कर रहे हैं। 🤦‍♂️ और वास्तव में, यह कहना ही तो आसान है कि अगर धमकियाँ और पैसे का इस्तेमाल किया गया है, तो यह बिल्कुल सही है। लेकिन मुझे लगता है कि ये आरोप लगाने से पहले दोनों पक्षों ने चुनाव के नियमों को समझने की जरूरत थी। 👎
 
मुझे ये बात सोचकर भी ज्यादा नहीं समझ में आती, कि सत्ताधारी गठबंधन ने उम्मीदवारों को चुनाव से हटने के लिए धमकियां और पैसे देने की इतनी बातचीत क्यों कर रहा है? 🤔

मुझे लगता है कि जो उम्मीदवार निर्विरोध जीत गए, उनके लिए तो ये चुनाव दोबारा होना चाहिए? 🤷‍♂️ तो फिर उम्मीदवारों की अपनी पसंद और जनता की पसंद से क्या परिणाम निकलेगा?

लेकिन, मुझे यकीन है कि यह महायुति की बात सच नहीं है, सत्ताधारी गठबंधन तो कुछ भी कर देने को तैयार है। 🤑
 
मुझे लगता है कि ये सब बहुत बड़ा झूठ है 🙄। शिवसेना और MNS को तो अपनी बात सुननी चाहिए, लेकिन दूसरी पार्टी के खिलाफ ऐसा आरोप लगाना निकम्मा है। मुझे लगता है कि चुनाव में जीतने वाला उम्मीदवार तो अपने समर्थकों का ध्यान रख लेता है, फिर यह देखने की जरूरत नहीं कि दूसरी पार्टी किस तरह बोल रही है। और इसके अलावा, चुनाव में जीतने वाला उम्मीदवार तो अपने सरकारी पद से निकाल लेता है, तो फिर यह दोबारा चुनाव होने की जरूरत नहीं? बस इतना कहूंगा कि सबकुछ खुलकर चलना चाहिए, और आरोप लगाने वाली पार्टी को अपनी बात साबित करनी चाहिए।
 
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