उद्धव बोले- बीजेपी वोट चुराने के बाद उम्मीदवार चुरा रही: लोकतंत्र पर अब भीड़तंत्र का कब्जा; 20 साल बाद शिवसेना भवन पहुंचे राज ठाकरे

शिवसेना UBT प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि महायुति पहले वोट चुराती थी, अब उम्मीदवार चुरा रही है। देश में ऐसा माहौल हो गया है जैसे लोकतंत्र पर भीड़तंत्र का कब्जा हो।

इस बीच, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे 20 साल बाद शिवसेना भवन पहुंचे जहां दोनों नेताओं ने पार्टी मेनिफेस्टो भी रिलीज किया।

महाराष्ट्र सीएम देवेंद्र फडणवीस ने वर्ली में एक रैली में कहा कि हम बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान करके उन्हें देश से बाहर निकालेंगे। यह सुनिश्चित करेंगे कि देश की मुंबई को एक ऐसा मेयर मिले जो मराठी और हिंदू हो।

उद्धव ठाकरे ने कहा, जहां उम्मीदवार निर्विरोध जीते वहां दोबारा चुनाव हो।
 
अरे वाह, यह तो महायुति की बड़ी खेलनुमाई है 🤣! पहले वोट चुराते थे, अब उम्मीदवार चुरा रही है, यह तो जैसे दिल्ली में राजकीय मोहल्ला में भाई-बहनों की लड़ाई चल रही है 🤪! और फडणवीस जी ने बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान करके उन्हें देश से बाहर निकालने का वादा किया, लेकिन मुझे लगता है कि उनका वास्तविक लक्ष्य मराठी और हिंदू मेयर चुनना है, जैसे कि मुंबई का नाम बदलकर मराठी-हिंदु-मोहल्ला बदल दिया जाए 🤣!
 
🤔 "राजनीति में सबसे बड़ा जादूी वही है जो अपने विरोधियों की गलतियों को अपनी बात मान लेता है।" 💬
 
भ्रष्टाचार कितना फैला हुआ है! 🤦‍♂️ इन दिनों पॉलिटिक्स में तो सिर्फ मालिश और भाईचारे ही जुड़ते हैं न? शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के बीच यह लड़ाई क्या है? दोनों ही पार्टियाँ अपने उम्मीदवारों को चुनने में इतनी भारी हुई हैं कि अब वोटों की कहानी बदल गई है! 🤝

लेकिन याद रखें, लोकतंत्र में हमेशा एक स्टेडियम होता है, जहां हर कोई अपने द्वारा चुनने की आजादी रखता है। यह लड़ाई निकाल-फhod, फोड़-सेक की तरह चल रही है तो वोटों की बातचीत पर ध्यान देना जरूरी है। और सबसे ज्यादा, मेरा संदेश ये है: सबके लिए अच्छा भविष्य, हर किसी के हित में! 🌈💖 #जयशिवसेना #महाराष्ट्रनवनिर्माणसेना #भारतकाल्चर
 
भाई, यह तो दिखने लगता है कि महाराष्ट्र में खेल खत्म होने वाला है 😐। शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की पार्टियों के बीच का फैसला देखकर एक अलग सोच का एहसास होता है। उम्मीदवार चुराने का आरोप, माहौल बदल गया है... यह तो लोकतंत्र पर भीड़तंत्र की बात कह रहा है 🤯। और फडणवीस साब की बातें सुनकर लगता है कि वे देश के भविष्य को देखने में सक्षम हैं... लेकिन यह सवाल उठता है कि कैसे एक मेयर मराठी और हिंदू हो सकता है? 🤔
 
बात बोलती है तो शिवसेना UBT की घोषणा से मुझे थोड़ा डर लग गया है। ऐसा लगता है कि पार्टियाँ अपनी-अपनी लोगों को पकड़ने के लिए कुछ कर रही हैं। यह देश में क्या चलने वाली है, नहीं पता। और फडणवीस जी की बात सुनकर मुझे थोड़ा अनिश्चित महसूस हुआ है। देश को एक ऐसा मेयर चाहिए जो मराठी और हिंदू हो, लेकिन यह भी सच नहीं है कि हमारे देश में एक ऐसा व्यक्ति तो मिल गया होगा।
 
नेताजी, शिवसेना के नाम से यह तो भ्रष्टाचार ही बढ़ रहा है। पहले वोट लूटते थे, अब उम्मीदवारों को लेकर चुपक से जीत मिलती है… औरन्तीम बात, देश में ऐसा माहौल हो गया है तो लगता है लोकतंत्र पर भीड़तंत्र का कब्जा पूरी तरह से बन गया है।
 
अरे भाई, यह तो बहुत ही रोचक स्थिति है 🤔। शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के बीच ऐसा झगड़ा तो पहले कभी नहीं देखा गया था। लेकिन मुझे लगता है कि यह तो एक अच्छी बात है, क्योंकि इससे राजनीतिक माहौल में बदलाव आ रहा है। और उम्मीदवार चुनने में इतनी भीड़ तो हैरानी की बात नहीं है 🤷‍♂️। मुझे लगता है कि इससे देश के नागरिकों को अपने मतदान अधिकार का ज्यादा महत्व देना चाहिए, ताकि वे सही उम्मीदवार चुन सकें।
 
🤔 बहुत सोचा गया कि क्या महायुति वास्तव में लोकतंत्र में बदल गई है? पहले यह चोरी करने वाला था, अब यह चोरी करने वाली उम्मीदवार बन गई। देश में ऐसा माहौल तय हो गया है जैसे कि भीड़ ने लोकतंत्र पर कब्जा कर लिया हो।

और फिर, राज ठाकरे ने 20 साल बाद शिवसेना भवन पहुंचा। दोनों नेताओं ने मिलकर पार्टी का मैनिफेस्टो जारी किया। यह एक अच्छा संकेत है कि दोनों पक्ष अपने विचारों पर मेल खाते हैं और एक-दूसरे के अनुयायियों के हित में काम करेंगे।

लेकिन, महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फडणवीस ने बांग्लादेशी घुसपैठियों को पहचानकर उन्हें देश से बाहर निकालने की बात कही। यह एक अच्छा विचार है, लेकिन हमें सुनिश्चित करना होगा कि इसे कैसे करेंगे।

और उद्धव ठाकरे ने कहा कि जहां उम्मीदवार निर्विरोध जीतते वहां दोबारा चुनाव होंगे। यह एक अच्छी बात है, लेकिन हमें सुनिश्चित करना होगा कि यह प्रक्रिया साफ-सुथरी और निष्पक्ष हो।
 
भाग्यuden 🤩 यह तो एक बार फिर से शिवसेना की बरकार हो रही है! पार्टी में छुट्टी लगाने वालों की संख्या ज्यादा हो गई है, और अब उम्मीदवार चुनाव चोरी करने लगे हैं 😂। देश में ऐसा माहौल बन गया है जैसे लोकतंत्र पर भीड़तंत्र का कब्जा हो।

राज ठाकरे पीछे तो कौन सा नाम है, देखकर हैरान हो गया 🤯। और फडणवीस जी भी बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान करने की बात कर रहे हैं? यह तो एक अजीब सा तरीका है 🤔। देश में मराठी और हिंदू मेयर के लिए चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की संख्या ज्यादा निकालनी चाहिए।

उद्धव ठाकरे की बात समझ नहीं आ रही है 🤷‍♂️। जहां उम्मीदवार निर्विरोध जीते वहां दोबारा चुनाव? यह तो एक अजीब सा विचार है।
 
मुझे तो लगता है कि क्योंकि मुंबई की राजनीति बहुत भीड़ भरी हुई है , तो शायद मेयर चुनने का तरीका भी थोड़ा बदलने की जरूरत है। फडणवीस जी का बोलते हुए देखा, उम्मीदवार निर्विरोध जीतने की बात तो बहुत अच्छी है, लेकिन शायद चुनाव के साथ-साथ चुनाव प्रचार का भी तरीका बदलने की जरूरत है। मुझे लगता है कि देश में कोई भी नेता अगर अपने उम्मीदवारों को दोबारा चुनाव लड़ने के लिए मजबूर कर सकता है, तो उसकी बात से मैं सहमत हूं।
 
मेरे दोस्तों को यह तो बहुत प्यासी सीट्स पर चलना पड़ रहा है... शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना में इतनी भारी लड़ाई हो गई है... लेकिन मुझे लगता है कि इसके पीछे कुछ गहराई है, जैसे कि देश के विभिन्न हिस्सों में आर्थिक और सामाजिक असमानता... हमें यह समझने की जरूरत है कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए हमें एक-दूसरे के साथ सहयोग करना चाहिए, न कि लड़ना।
 
नेताओं के सामने मुंबई की समस्या तो है लेकिन वे नहीं सोच रहे कि बाकी लोग कैसे संघर्ष कर रहे हैं। उनके दोनों ही नेता एक ही स्थान पर गए और रैलियां भी लगाईं, बस यही जानकारी है तो क्या वे मुंबई की समस्या का समाधान नहीं ढूंढ पाए? 🤔

महाराष्ट्र में चुनावों की वजह से बहुत थकावट आती है, हर बार नई पार्टियां बनती रहती हैं और नए नेता उतरते हैं। लेकिन शायद इस बार कुछ अलग हो सकता है, उम्मीदवार जितनी अच्छी प्रतिष्ठा रखते हैं वो दोबारा चुनाव में भी जीतते हैं, यह उनकी ताकत है 🙏

बड़े नेताओं को अपने साथ आने वाले लोगों की बात सुननी चाहिए, उनके दृष्टिकोण और समस्याओं को समझना जरूरी है। लेकिन इस समय कुछ ऐसा नहीं मिल रहा है, जिससे हमें उम्मीद मिल सके। 😐
 
अरे, यह तो कितना मजेदार है! शिवसेना और भी मुश्किलों में डूबी हुई है 😂। क्या उम्मीदवार चुराने से वोट चोरी करने का अंतर नहीं पता था? और फिर देवेंद्र जी ने कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को निकालने के लिए मराठी और हिंदू मेयर चाहिए, तो यह तो एक नई राजनीति है! 🤣

लेकिन सच में, यह देखकर अच्छा लग रहा है कि शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने फिर से पार्टी मेनिफेस्टो जारी किया है। शायद अब चुनावों में एक नई राजनीति शुरू होगी, लेकिन देखिए तो यह कैसे चलती है! 🤔
 
🤔 ये देश तो खलनायकों की सरकार बनाती है 🤷‍♂️। शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना मिलकर क्या हासिल करेंगे? 😒 उम्मीदवार चुराने का यह खेल तो बहुत ही सम्मानजनक नहीं है । लेकिन देखें तो देवेंद्र फडणवीस जी ने बांग्लादेशी घुसपैठियों को पहचानने और उन्हें देश से बाहर करने का फैसला किया है। 🙏 यह अच्छा विचार है लेकिन मुझे लगता है कि हमें अपने देश की समस्याओं का समाधान खुद ढूंढना चाहिए, न कि दूसरों को बाहर करना ही । 👥
 
ज़रूरी तो यह कि महायुति वास्तव में लोकतंत्र की स्थिति खराब कर रही है। वे उम्मीदवारों को चुनने में खेल बाज़ार चला रहे हैं और देखने को तैयार हैं कि जिसे वोट मिलता है वह दोबारा चुनाव नहीं लड़ता। इससे स्थिरता और निश्चितता की कमी हो गई है।
 
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