US New Tariff: किसानों की शिकायत पर भड़के ट्रंप, भारतीय चावल और कनाडाई खाद पर नए टैरिफ लगाने के संकेत

अरे, यह तो सच में दुखद है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय चावल और कनाडाई खाद पर नए टैरिफ लगाने का संकेत दिया है। मुझे लगता है कि यह हमारे देश के लिए बुरी बात होगी। हमारा चावल दुनिया भर में प्रसिद्ध है, और हमारी खाद भी बहुत अच्छी है। अगर वे नए टैरिफ लगाते हैं, तो इससे हमारे किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

मुझे लगता है कि अमेरिकी सरकार ने अपने किसानों की जरूरतों को समझना चाहिए और उनके लिए सही मूल्य देना चाहिए। हमें उन्हें अपने उत्पादों पर बेहतर मूल्य प्रदान करने के लिए काम करना चाहिए, न कि नए टैरिफ लगाने से।
 
यार मैं तुम्हें बताता हूँ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जो बात कही, वह थोड़ी ही देखभाल की बात नहीं है 🤔। क्या उन्हें पता है कि भारतीय चावल खाने में स्वाद और पौष्टिकता दोनों होती है? 😂

और कनाडाई खाद पर टैरिफ लगाने का मतलब है कि अमेरिकी किसानों को अपने उत्पादों की गुणवत्ता पर ध्यान देने की जरूरत है। लेकिन अगर वे अपने उत्पादों में सुधार नहीं करते, तो उन्हें चावल खाते हुए दर्द होगा 😊

ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी किसानों को उनके उत्पादों पर बेहतर मूल्य प्रदान करने के लिए अपने संबंधों को मजबूत करना चाहिए। लेकिन अगर वे यह नहीं करते, तो वे अपने खुद के उत्पादों की कमी महसूस करेंगे। यह है जीवन की सच्चाई, मित्र 🌟

मैं सिर्फ इतना कहूँगा, अमेरिकी-भारतीय संबंधों में थोड़ा समझदारी और सम्मान की जरूरत है। 😊
 
बस मेरी राय है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यह बयान सुनकर भारतीय चावल वाले देशों को नाराज़गी होगी। ये टैरिफ लगाना एक बड़ा झटका होगा। लेकिन अगर अमेरिकी किसानों को उनके उत्पादों पर बेहतर मूल्य प्रदान करने के लिए हमें अपने संबंधों को बेहतर बनाना चाहिए, तो यह अच्छा है। 🤔

मुझे लगता है कि भारत और कनाडा जैसे देशों ने टैरिफ लगाने की समस्या का मुकाबला करने के लिए अपने स्वयं के उत्पादों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। 🌾

और ये तो एक अच्छी बात है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी किसानों की शिकायतों को सुनने के लिए कहा। इससे हमें यह समझने में मदद मिलेगी कि क्या वास्तव में अमेरिकी किसानों को उनके उत्पादों पर बेहतर मूल्य प्रदान करने के लिए हमें अपने संबंधों को मजबूत करना चाहिए। 💬
 
ਸੋ, ਇਹ ਖ਼बरਾ ਸੁਣ ਕੇ ਮੈਨੂੰ ਲੱਗਦਾ ਹੈ ਕਿ ਅਮੇਰਕਾ ਵਿੱਚ ਆਮ ਤੌਰ 'ਤੇ ਸਥਾਨਕ ਖੇਤੀ ਪ੍ਰਬੰਧ ਦੁਰਬਲਾ ਹੈ, ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਮੈਂ ਆਮ ਤੌਰ 'ਤੇ ਇਸ ਦਾ ਕਹਿੰਦਾ ਹਾਂ।

ਅਮੇਰਕਨ ਕਿਸਾਨਾਂ ਦੀ ਵਿਦੇਸ਼ੀ ਖੇਤੀ ਦੇ ਭਾਰ 'ਤੇ ਜੋ ਹਮਲਾ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ, ਉਸ ਦਾ ਕਾਰਨ ਵਿਦੇਸ਼ੀ ਖੇਤੀ ਪ੍ਰਬੰਧ 'ਤੇ ਮੁਸ਼ਕਲਾਂ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਹੈ।

ਅਜਿਹੇ ਦੱਖਣੀ ਅਤੇ ਪੂਰਬੀ ਦੇਸ਼ਾਂ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਆਮ ਭਾਰਤੀ ਚਾਵਲ ਦੀ ਧਾਰ 'ਤੇ, ਉਹਨਾਂ ਅਜਿਹੇ ਖੇਤੀ ਪ੍ਰਬੰਧ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਵਿਚ ਸਥਾਈ ਵਿੱਤੀ ਫ਼ੈਸਲਿਆਂ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੋਵੇਗੀ।
 
राष्ट्रपति ट्रंप के बयान से लगता है कि अमेरिका के किसानों की जरूरतों को समझने में हम देश के राजनेताओं की कमजोरी निकल गई है। यह तो एक नए व्यापार समझौते का पहलू है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम अपने सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर ध्यान देने लगें। हमें यह सवाल पूछना चाहिए कि क्या इस व्यापार समझौते ने हमारी खाद या चावल जैसे बुनियादी सामाजिक संसाधनों को ध्यान में रखा।
 
Back
Top