उत्तराखंड में 14 जनवरी से होगा अर्धकुंभ: 4 शाही स्नान सहित 10 मुख्य स्नान की तिथियां तय; CM और 13 अखाड़ों की बैठक में फैसला - Haridwar News

उत्तराखंड में अर्धकुंभ की तिथियां तय हो गईं, जिसमें 10 प्रमुख स्नान और 4 शाही अमृत स्नान शामिल हैं। कुल 97 दिनों तक चलने वाला इस आयोजन 14 जनवरी से शुरू होगा और 20 अप्रैल को खत्म होगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार डाम कोठी में अखाड़ा प्रतिनिधियों के साथ बैठक की, जिसमें मेला प्रशासन की ओर से 13 अखाड़ों के दो-दो सचिव या नामित प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

अर्धकुंभ की गरिमा बनाए रखने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदम सही दिशा में हैं, कहा गया। सभी अखाड़ों ने एकमत होकर व्यवस्था, स्नान तिथियों और आयोजन स्वरूप पर सहमति जताई। शाही अमृत स्नान वह विशेष स्नान है जो अर्धकुंभ या कुंभ में साधु-संतों को सम्मान देने के लिए आयोजित किया जाता है। इसकी परंपरा 14वीं से 16वीं सदी के बीच शुरू हुई, जब साधु-महंत मंदिरों और मठों की रक्षा के लिए अखाड़ों में एकजुट होकर मुगलों के शासन के दौरान धर्म की रक्षा करते थे।
 
अर्धकुंभ की तैयारियां अच्छी तरह से चल रही हैं 🌟। लेकिन उम्मीदें बहुत भी ऊंची हो गए हैं, फिर मेले के दौरान भी ऐसा ही न होना चाहिए। प्रमुख स्नानों को सुरक्षित रखने और शाही अमृत स्नान की व्यवस्था अच्छी तरह से करनी होगी। और कुछ साल पहले की तरह मेले में भीड़बाजी न होने देनी चाहिए।
 
अर्धकुंभ की तैयारियां बहुत उत्साहित करने वाली बातें हैं 🤩। लेकिन हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि हर साल ये आयोजन कितना सफल रहा है, इसकी जांच करनी चाहिए। मुझे लगता है कि सरकार ने अच्छे कदम उठाए हैं, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इन तैयारियों से अर्धकुंभ की गरिमा और परंपराओं को ध्यान में रखा जा रहा है।

मुझे लगता है कि शाही अमृत स्नान की व्यवस्था अच्छी तरह से की जाएगी, लेकिन हमें यह देखना चाहिए कि इसके पीछे क्यों कदम उठाए गए हैं और इसमें हमारी सरकार की योजना कितनी अच्छी है। तैयारियां अच्छी तरह से हैं, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इनमें से कुछ बातें वास्तव में अर्धकुंभ को बढ़ावा देने के लिए हैं या नहीं।
 
अर्धकुंभ की आयोजन की तैयारी में सरकार ने अच्छे कदम उठाए हैं 🙏। 97 दिनों तक चलने वाला यह आयोजन लोगों को बहुत प्रकार के स्नान और अनुभव प्रदान करेगा। शाही अमृत स्नान में भी सम्मानित साधु-संतों को सम्मान देने की परंपरा है, जिसे हमें बनाए रखना चाहिए। अखाड़ों ने एकमत होकर व्यवस्था और आयोजन स्वरूप पर सहमति जताई, जिसकी वजह से अर्धकुंभ की गरिमा बनी रहेगी।
 
अर्धकुंभ में कौन जा रहा है? मैंने देखा है कि बहुत से लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ जा रहे हैं। मुझे लगता है कि यह आयोजन बहुत ही रोमांचक होगा। मेरे चाचाजी ने मुझे बताया है कि उन्हें पहले कभी अर्धकुंभ नहीं देखा था, लेकिन वे इस बार जाने की कोशिश कर रहे हैं। मैं उनके साथ फोटो खिंचवाऊँगा।
 
अर्धकुंभ की तैयारी में सरकार को बहुत अच्छी बातें करनी पड़ रही हैं 🤩। लोगों को यह अच्छी तरह से पता नहीं है कि शाही अमृत स्नान क्या है। यह सिर्फ उन्हीं साधु-संतों के लिए आयोजित किया जाता है जो हरिद्वार डाम आते हैं। मुझे लगता है कि हमें अपने धर्म और परंपराओं को समझने की जरूरत है, नहीं तो हम फुसफुसाहट में पड़ जाएंगे।
 
अर्धकुंभ की तैयारी अच्छी है 🎉, मुझे लगता है कि यह आयोजन बहुत ही रोचक होगा। शाही अमृत स्नान वास्तव में एक अद्वितीय अनुभव हो सकता है। अखाड़ों ने सहमति जताई है, इससे मेले की गरिमा बनाए रखने की कोशिश करने में सरकार सहयोग कर रही है।
 
अर्धकुंभ को तैयार करने वाली योजना बहुत अच्छी है, लेकिन मुझे लगता है कि इसके लिए पर्याप्त सार्थकता नहीं दिख रही है। जैसे कि शाही अमृत स्नान जैसी विशेषताएं तो बहुत अच्छी हैं, लेकिन इसके लिए बहुत पैसा खर्च करने की जरूरत है और इससे भीड़भाड़ बढ़ सकती है। मुझे लगता है कि इसके लिए अधिक व्यवस्थित और स्थायी समाधान की जरूरत है।
 
ਬਹੁਤ ਰोचਕੇਲਾ ਅਰਧਕੰਬ! ਮੈਨੂੰ ਲੱਗਦਾ ਹੈ ਕਿ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਡੀ ਬਣੇ, 97 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਮੈਲਾ ਉਜੱਜਰਥੀ ਹੋਵੇਗਾ। ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਕੁਝ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਦੇ ਜਵਾਬ ਵਿੱਚ, ਅਖਾੜੇ ਨੇ ਸਰਕਾਰ ਤੋਂ ਵੀ ਮੁਲਾਂਕਣ ਹੁੰਦਾ ਹੈ।
 
अर्धकुंभ का आयोजन आ रहा है तो मुझे तो बहुत खुशी हुई! 😆 मुख्यमंत्री जी ने अखाड़ा प्रतिनिधियों के साथ बैठक की और सभी एकमत हुए, इससे मेरी उम्मीदें बढ़ गईं। शाही अमृत स्नान वह तो बहुत खास है! मैं वहाँ जरूर जाऊँगा और अपने परिवार के साथ अर्धकुंभ का आनंद लूँगा। 🙏🏼 मेला प्रशासन ने उठाए गए कदम सही दिशा में हैं, उम्मीद है कि अर्धकुंभ की गरिमा बनाए रखी जाएगी। मैं तो 14 जनवरी से 20 अप्रैल तक अपने घर पर बैठकर भी अनंद लूँगा और पूरी दुनिया को अर्धकुंभ की खूबसूरती का अनुभव करूँगा। 📺
 
अर्धकुंभ की तैयारियां पूरी तरह से सुसज्जित हुए, लेकिन मुझे लगता है कि यह मेला वास्तव में स्नानों और स्नान तिथियों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। 97 दिनों तक चलने वाला इस आयोजन को सही ढंग से प्रबंधित करने के लिए हमें सुनिश्चित करना होगा कि सभी स्नान तिथियां साफ-सुथरी और स्वच्छ रहें।🙏
 
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