उत्तराखंड में चीन सीमा से लगातार जुड़े टिम्मरसैंण महादेव मंदिर में प्राकृतिक रूप से बर्फ से बने शिवलिंग के रूप में महादेव विराजमान हैं। यहां पर्यटकों को अमरनाथ की गुफा में तैरते हुए बर्फीले बाबा दिखाई देते हैं, जो अपने सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।
दुर्गम क्षेत्र में स्थित इस गुफा में सेना और आईटीबीपी के जवानों के अलावा स्थानीय लोगों को भी सम्मान मिलता है, जो इस पवित्र स्थल के महत्व को समझते हैं।
प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक अनुभव के साथ-साथ यहां पर्यटकों को शीतकालीन पर्यटन का आदर्श स्थल भी मिलता है। नीती घाटी और टिम्मरसैंण महादेव गुफा क्रिसमस और नए साल के अवसर पर पर्यटकों के लिए एक आदर्श स्थल हैं।
बर्फबारी के बाद यहां 10 फीट ऊंचा शिवलिंग बन जाता है, जो बर्फ पिघलने पर अपने मूल आकार में आ जाता है। इस स्थल पर भारत-चीन सीमा के दोनों ओर से लोग आकर अपनी आस्था का व्यक्त करना चाहते हैं।
पर्यटन विभाग को इस स्थल में सौन्दर्यीकरण कराना चाहिए। जिला पर्यटन अधिकारी अरविंद गौड़ ने बताया कि 26.85 करोड़ की लागत से टिम्मरसैंण गुफा तक जाने के लिए डेढ़ किमी ट्रेक, टिन शेड और पार्किंग निर्माण का कार्य हो रहा है। इसके अलावा गुफा के आस-पास सौन्दर्यीकरण का कार्य भी हो रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।
दुर्गम क्षेत्र में स्थित इस गुफा में सेना और आईटीबीपी के जवानों के अलावा स्थानीय लोगों को भी सम्मान मिलता है, जो इस पवित्र स्थल के महत्व को समझते हैं।
प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक अनुभव के साथ-साथ यहां पर्यटकों को शीतकालीन पर्यटन का आदर्श स्थल भी मिलता है। नीती घाटी और टिम्मरसैंण महादेव गुफा क्रिसमस और नए साल के अवसर पर पर्यटकों के लिए एक आदर्श स्थल हैं।
बर्फबारी के बाद यहां 10 फीट ऊंचा शिवलिंग बन जाता है, जो बर्फ पिघलने पर अपने मूल आकार में आ जाता है। इस स्थल पर भारत-चीन सीमा के दोनों ओर से लोग आकर अपनी आस्था का व्यक्त करना चाहते हैं।
पर्यटन विभाग को इस स्थल में सौन्दर्यीकरण कराना चाहिए। जिला पर्यटन अधिकारी अरविंद गौड़ ने बताया कि 26.85 करोड़ की लागत से टिम्मरसैंण गुफा तक जाने के लिए डेढ़ किमी ट्रेक, टिन शेड और पार्किंग निर्माण का कार्य हो रहा है। इसके अलावा गुफा के आस-पास सौन्दर्यीकरण का कार्य भी हो रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।