‘वंदे मातरम्‘ लिखने वाले बंकिमचंद्र को क्यों भूली ममता सरकार: वंशज बोले- जिस घर को धरोहर बनाया वो जर्जर, हमें कोई पूछने वाला नहीं

बंकिम चंद्र चटोपाध्याय, जिनके नाम पर बंगाल का एक सुंदर लाइब्रेरी बना दिया गया था, उसके घर की ग्रिल पर पड़ोसियों के कपड़े फूल रहे हैं।

वंदे मातरम् को 150 साल पूरे होने पर बंगाल में कई जगहों पर प्रोग्राम आयोजित किए गए। इसी दौरान कलकत्ता में बंकिम चंद्र के लाइब्रेरी बने घर की स्थिति को देखा।

इसलिए, अगर हालात ऐसे हैं तो राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
 
अरे, यह तो बिल्कुल भी सही नहीं है! हम सबने कलकत्ता में बंकिम चंद्र की लाइब्रेरी को इतना सुंदर बनाया था, अब वहां कैसे ऐसा हाल देखा। यह तो राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वे उस जगह की स्थिति अच्छी रखें।

मुझे लगता है, हमें उस जगह पर जाना चाहिए और उसकी स्थिति को देखना चाहिए। शायद हम उस जगह को फिर से बना सकते हैं ताकि वह वहां आ जाए जैसा था।

कुछ लोग कहेंगे, 'यह तो ऐतिहासिक स्थल है, हमें उसकी सुरक्षा और रखरखाव पर ध्यान देना चाहिए।' मुझे लगता है कि यह भी सही है। हमें उस जगह को फिर से बनाने के लिए एक योजना तैयार करनी चाहिए।
 
अरे, ये तो बिल्कुल सही नहीं है, क्या? बंकिम चंद्र के घर में ग्रिल पर कपड़े फूलने से राज्य सरकार की जिम्मेदारी कैसे जुड़ी है? हमें पहले सिर्फ साफ-सफाई करानी चाहिए, तो क्यों राज्य सरकार का नाम लेना पड़ रहा है।
 
बंकिम चंद्र के लाइब्रेरी घर पर पड़ोसियों के कपड़े फूलने की स्थिति को देखकर मुझे खेद हुई। लगता है कि उसके परिवार के सदस्यों को जरूरत है, फिर भी इतनी खराब स्थिति में रहने का क्या कारण है? और सरकार ने इस बात पर कोई ध्यान नहीं दिया। अगर ऐसा है तो यह राज्य सरकार के लिए एक बड़ी समस्या है।
 
😱 बंकिम चंद्र चटोपाध्याय के घर में इतनी खराब स्थिति कैसे आ गई ? उनके लाइब्रेरी बने घर को देखकर मन में सवाल उठते हैं कि क्या इस तरह की सुविधाएं सार्वजनिक भवनों में निर्माण करने से पहले उसकी जांच नहीं हुई थी ?
 
अरे, यह तो बहुत अजीब है... बंकिम चंद्र के घर पर कपड़े फूल रहे हैं और वहां स्थिति इतनी खराब हुई कि लाइब्रेरी बनाने वाला जगह खो गया है। 150 साल पहले वंदे मातरम् के जन्मदिन पर कलकत्ता में इतनी भीड़ हुई थी, लेकिन अब तो यह पता चलता है कि हमारी सरकार की हर गतिविधि पर ध्यान देने की जरूरत नहीं? क्या राज्य सरकार ने इस जगह की सुरक्षा के लिए कुछ नहीं किया? तो अगर ऐसा है, तो मुझे लगता है कि उन्हें अपनी गलतियों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए... 🤔
 
अरे, यह तो बहुत बुरा दिख रहा है… बंकिम चंद्र के घर की स्थिति में इतनी खराबी कैसे हुई? वह अपने लाइब्रेरी बने घर को कितना सुंदर बनाने के लिए किया था, अब यह पड़ोसियों के कपड़े फूलने की जगह है। ऐसी स्थिति में तो राज्य सरकार को तुरंत ध्यान देना चाहिए और मदद करनी चाहिए। हमें उम्मीद है कि जल्द ही घर की स्थिति बेहतर होगी।
 
क्या बिल्कुल! 150 साल पूरे होने पर वंदे मातरम् की याद में ऐसे हालात देखने को मिलते हैं तो बहुत दुखद है 🤕। बंकिम चंद्र की घर की स्थिति देखकर लगता है कि अगर राज्य सरकार ने इतनी महत्वपूर्ण स्थापना बनाने वाले लोग के परिवेश में जरूरतमंदों को मदद करने का प्रयास नहीं किया तो फिर यह साबित होता है कि हमारे नेताओं और सरकार की दृष्टि इतनी बाहर क्यों? 🤔
 
यदि बंकिम चंद्र के घर में पड़ोसियों के कपड़े गिरते हैं, तो यह सिर्फ एक छोटी सी समस्या लगती है, लेकिन जब हम इसका विस्तार करते हैं तो यह देखकर हैरान हो जाते हैं कि इतना खराब हालात कैसे बन सका। यह कहीं भी साफ नहीं होता, यह क्यों? और राज्य सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए, नहीं, तो यह एक बड़ा संदेश देता है कि हमारी सरकार में कुछ जरूरी नहीं है।

क्या हमारी सरकार केवल ऐसे लोगों की मदद करती है जिन्हें विशेष रूप से मदद की ज़रूरत है, या फिर हमारी सरकार देश भर में सबको समान अवसर प्रदान करने की कोशिश करती है? और यह भी एक सवाल है कि अगर पड़ोसियों को अपने कपड़े इकट्ठा करने में मदद नहीं की जाती, तो उन्हें कैसे सीखना चाहिए?
 
अरे, यह तो बहुत ही चिंताजनक स्थिति है! बंकिम चंद्र के घर में पड़ोसियों के कपड़े फूल रहे हैं और वहां लाइब्रेरी बनाने का काम नहीं हो पा रहा है। यह तो सरकार की जिम्मेदारी है, हमें उम्मीद करनी चाहिए कि वे ऐसे मुश्किल समय में मदद करेंगे।
 
मुझे लगता है कि यह समस्या बिल्कुल भी मेरी नहीं है, और फिर भी, यह समस्या मेरे लिए बहुत परेशान करने वाली हो रही है! 🤔 मैंने तो सोचा था कि ऐसा न होगा, लेकिन जब मैंने देखा तो मुझे लगा कि यह सच ही है। अगर जिम्मेदारी राज्य सरकार की है तो फिर इसके बारे में कुछ नहीं कह सकता। 🙅‍♂️ पर, घर की सफाई और स्वास्थ्य है तो पूरा देश जिम्मेदार है, नहीं? 😏
 
यार, ये तो बहुत बड़ा मुद्दा है! बंकिम चंद्र की घर पर कपड़े फूलना और लाइब्रेरी बनाने वाले घर की स्थिति खराब होना... यह तो राज्य सरकार की जिम्मेदारी ही होगी। क्या ये पता है कि बंकिम चंद्र एक महान कवि थे और उनकी मृत्यु हो गई है। उनकी याद में ऐसी स्थिति तैयार करना सरकार का काम नहीं है, न ही लोगों का। कुछ लोग शायद घर को ठीक कर दें, फिर बिल्कुल भी तैयार नहीं होते।

मैंने कलकत्ता में जाकर देखा, वहां कितनी सुंदर लाइब्रेरी बनाई गई थी। अब ये तो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार को तुरंत काम करना चाहिए।
 
क्या बिल्कुल भाई, यह तो एक बड़ा मुद्दा है 🤯। अगर घर की ग्रिल पर पड़ोसियों के कपड़े फूल गए हैं तो यह न केवल पड़ोसियों की शरारत है, बल्कि यह घर के खालीपन की भी बात कह रहा है। सरकार से मुझे उम्मीद है कि वे इस मामले में कोई काम करेंगी।
 
राज्य सरकार को फालतू में रिश्वत लेने की बात नहीं करनी चाहिए, लेकिन अगर सड़कों की मरम्मत और पड़ोसियों के कपड़ों को फूलने देने की जिम्मेदारी सरकार की है, तो फिर भी यह अच्छा नहीं है 🙄

कलकत्ता में बंकिम चंद्र के लाइब्रेरी बने घर की स्थिति को देखकर लगता है कि सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी कमजोर है। अगर ऐसा हुआ तो पड़ोसियों ने भी अपनी जिम्मेदारी नहीं ली, लेकिन फिर भी सरकार को यह ठीक करना चाहिए 🤔
 
मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ा मुद्दा है, लेकिन कुछ सोचें कि घर की ग्रिल पर कपड़े फूलने से क्या मतलब है? शायद पूरे घर को धोने की जरूरत नहीं होगी, शायद किसी ने बस गलत समय में खिड़की खोल दी हो। हमें अपने समाज में बहुत सारी समस्याओं को देखना चाहिए, लेकिन एक-एक करके हल करना भी जरूरी है।
 
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