वंदे मातरम पर संसद में 10 घंटे बहस... अटैक मोड में होंगे PM मोदी, कांग्रेस करेगी डिफेंड!

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर लोकसभा में चर्चा शुरू करने के लिए सोमवार को तैयार हैं। इस चर्चा में, प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि उन्होंने 1937 में गीत के प्रमुख छंदों को हटाने और विभाजन के बीज बोने का आरोप लगाया था। इसके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस चर्चा में दूसरे वक्ता होंगे।

इस चर्चा में लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई और प्रियंका गांधी वाद्रा सहित अन्य सदस्य भी शामिल होंगे। संसद में यह चर्चा, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित और जदुनाथ भट्टाचार्य द्वारा संगीतबद्ध वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर वर्ष भर आयोजित होने वाले समारोह का हिस्सा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने पलटवार करते हुए, कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि उन्होंने 1937 की कांग्रेस वर्किंग कमेटी और रविंद्रनाथ टैगोर का अपमान करने का आरोप लगाया है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पलटवार करते हुए, प्रधानमंत्री का CWC और टैगोर का अपमान करने का आरोप लगाया था। उन्होंने लिखा था कि प्रधानमंत्री का CWC और टैगोर का अपमान करना चौंकाने वाला है, लेकिन आश्चर्यजनक नहीं। ऐसा इसलिए है क्योंकि आरएसएस ने महात्मा गांधी के नेतृत्व वाले स्वतंत्रता संग्राम में कोई भूमिका नहीं निभाई थी।

गृह मंत्री अमित शाह मंगलवार को राज्यसभा में चर्चा की शुरुआत करेंगे और स्वास्थ्य मंत्री एवं राज्यसभा के नेता जे. पी. नड्डा दूसरे वक्ता होंगे।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पलटवार करते हुए, प्रधानमंत्री पर आरोप लगाया था कि उन्होंने 1937 की कांग्रेस वर्किंग कमेटी और रविंद्रनाथ टैगोर का अपमान करने का आरोप लगाया है।

बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि इस दौरान कुछ ऐतिहासिक तथ्यों को न भूला जाए। जवाहरलाल नेहरू ने वोट बैंक की राजनीति के लिए पूरे वंदे मातरम को छोटा कर दिया है। सुभाष चंद्र बोस जैसे दूसरे कांग्रेसियों के विरोध के बावजूद।

वंदे मातरम गीत की रचना बंग्ला भाषा के साहित्यकार बंकिम चंद्र चटर्जी ने की थी। उन्होंने इसे 7 नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में प्रकाशित करवाया था।

इस गीत के आधार पर उन्होंने अपनी अमर रचना आनंदमठ उपन्यास लिखा था।
 
क्या 150 साल पहले वंदे मातरम हुआ था, या फिर हम बस 1937 से याद कर रहे हैं? यह सवाल बोलना बहुत जरूरी है। क्या हमने अपने देश और समाज को समझ लिया है?
 
मुझे लगता है कि यह चर्चा वाकई एक दिलचस्प मुद्दा हो सकती है, लेकिन हमें सुनिश्चित करना चाहिए कि हम इतिहास और गीत के प्रति सम्मान के साथ बात करें। मैंने पढ़ा है कि रविंद्रनाथ टैगोर ने वंदे मातरम को लिखने में बहुत समय और संघर्ष किया था, और यह एक महान रचना है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि गीत की रचना बंग्ला भाषा के साहित्यकार बंकिम चंद्र चटर्जी ने की, जो एक अमर कवि थे।
 
मुझे लगता है कि वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा बहुत दिलचस्प हो सकती है। लेकिन, अगर हम इसे सही तरीके से आयोजित करें तो यह बहुत सुंदर दिखेगा। 📈

जैसे कि वंदे मातरम् गीत की रचना 7 नवंबर 1875 को बंगाल में हुई थी, तो हम इसे एक विशेष दिन के रूप में मनाना चाहिए। इसके लिए हमें एक सुंदर और स्यवस्थित आयोजन करना चाहिए, जिसमें हम वंदे मातरम् गीत की पूरी कहानी बताएं।

इसके अलावा, अगर हम इस चर्चा में भारतीय संस्कृति और इतिहास को शामिल करें तो यह बहुत अनोखा होगा। 🎨

लेकिन, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम सभी व्यक्तियों के लिए एक समावेशी और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाएं। 🤝
 
मुझे तो लगता है कि भाई, ये वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर बहुत सारी बातें बोली जाएंगी। लेकिन पलटवार करने वाले कितने हैं? 😂 पहले तो मोदी ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस ने 1937 में गीत के प्रमुख छंदों को हटाने का, फिर रमेश ने मोदी पर आरोप लगाया था। अब गृह मंत्री अमित शाह और स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा होंगे दूसरे वक्ता। यह सब कितना भ्रम फैलाने का काम है? 🤔

मुझे याद है जब मैंने पहले वंदे मातरम् को सुना था, तो मुझे लगा था कि यह एक बहुत ही सुंदर गीत है। लेकिन अब मैंने पढ़ा है कि इसकी रचना बंकिम चंद्र चटर्जी ने की, जो एक बंगाली साहित्यकार थे। और यह गीत 1875 में प्रकाशित हुआ था। 📚

मुझे लगता है कि हमें यह समझना चाहिए कि वंदे मातरम् कितना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी रचना और अर्थ को भी समझना होगा। नहीं तो हम अपने इतिहास को गलत तरीके से समझते रहेंगे। 🤓
 
मानो तुम पुराने दिनों की यादें महसूस कर रहे हो, जब वंदे मातरम हमेशा भारतीयों के दिल में एक स्थान रखती थी। आजकल इसकी 150वीं वर्षगांठ पर हमारे प्रधानमंत्री जी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि उन्होंने गीत के प्रमुख छंदों को हटाने और विभाजन के बीज बोने का आरोप लगाया है। लेकिन मुझे लगता है कि यह एक दूरदर्शी मुद्दा है, जिसमें हमारे इतिहास और संस्कृति को समझने की जरूरत है। 🤔

मैं भी उन ऐतिहासिक तथ्यों पर चर्चा करना चाहूंगा जिनकी बात प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया पर लिखी थी। वंदे मातरम गीत की रचना बंग्ला भाषा के साहित्यकार बंकिम चंद्र चटर्जी ने की थी, और यह हमें अपने समृद्ध इतिहास को समझने का मौका देता है। 🎶

इसलिए, मैं इस चर्चा में भाग लेने का आनंद लूंगा, जिसमें हमारे संसद सदस्य और प्रमुख नेताओं की उपस्थिति रहेगी। और मुझे उम्मीद है कि हम यहाँ एक ऐसा समारोह आयोजित करेंगे, जो हमारी सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा दे। 🎉
 
मुझे लगता है कि वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ एक बहुत ही पावन अवसर होना चाहिए। लेकिन अब तो यह चर्चा न केवल ऐतिहासिक तथ्यों की बात करती है, बल्कि राजनीतिक मुद्दों और आरोपों से भर गई है। मुझे लगता है कि हमें वंदे मातरम् को एक देशभक्ति गीत के रूप में याद करना चाहिए, जो हमें अपनी मातृभूमि और उसके लोगों के प्रति सम्मान और आभार महसूस कराता है।

हमें आरोप लगाने के बजाय, हम वंदे मातरम् के महत्व और इसके पीछे की संस्कृति को समझने की कोशिश करनी चाहिए। यह गीत हमारी देशभक्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हमें एक-दूसरे के प्रति सहयोग और मिलजुल कराने का संदेश देता है।

मुझे लगता है कि हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ एक शांतिपूर्ण और सहयोगपूर्ण अवसर हो, जो हमें अपने देश और उसके लोगों के प्रति सम्मान महसूस कराए। 🙏
 
कांग्रेस को इस विषय पर कोई सबक नहीं सीख पाता, बस ताली बजाते रहते हैं 🤦‍♂️। यह देखकर भी मन में खुशी होती है कि उन्होंने 1937 में गीत को छोटा कर दिया था। स्वाभाविक है, क्योंकि वे अपने गुरुओं और इतिहास का उल्लेख नहीं करते 🙄
 
यह तो दिलचस्प है कि वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा होगी। मैंने सोचा था कि यह गीत हमेशा एक सम्मानजनक और निष्पक्ष तरीके से देखा जाएगा, लेकिन लगता है कि यह चर्चा में कुछ अजीब भी हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेसने गीत के प्रमुख छंदों को हटाने और विभाजन के बीज बोने का आरोप लगाया था, लेकिन यह तो बहुत बड़ा दावा है।

मुझे लगता है कि यह चर्चा में कई ऐतिहासिक तथ्यों को भूलने से बचना चाहिए। जवाहरलाल नेहरू जी की वोट बैंक की राजनीति के लिए पूरे गीत को छोटा कर देने का यह तरीका बहुत ही विवादास्पद है। और यह भी कहने से बचना चाहिए कि सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं के विरोध के बावजूद।

वंदे मातरम् की रचना बंगाल के एक महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चटर्जी ने की थी, और यह गीत हमेशा भारतीयों को एकता और सम्मान की भावना से जोड़ा हुआ है। इसलिए, मुझे लगता है कि इस चर्चा में हमें वंदे मातरम् के पीछे के ऐतिहासिक तथ्यों और इसके महत्व को समझने की जरूरत है।
 
🤔 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा शुरू करने के लिए तैयार हैं, लेकिन यह सोचें कि कांग्रेस ने वंदे मातरम् को अपनी राजनीतिक उपज में बदलने की कोशिश कर रही है। 🤷‍♂️
 
कुछ लोग कहते हैं कि वंदे मातरम् एक महान देशभक्ति गीत है, लेकिन मुझे लगता है कि यह गीत हमारी स्वतंत्रता संग्राम की जड़ों को भूलने का प्रयास है। यह गीत बंगाल के एक व्यक्ति द्वारा बनाया गया था, लेकिन आज इसका उपयोग किसी भी राजनीतिक दल द्वारा भ्रष्टाचार और विभाजन को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है। मुझे लगता है कि हमें अपने ऐतिहासिक तथ्यों को याद करना चाहिए और यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारी स्वतंत्रता संग्राम के नेताओं ने विभिन्न रूपों में अपना समर्थन दिया।

😊
 
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