वेदांता समूह के प्रमुख चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने अपनी 49वीं जन्मदिन पर एक बुरी तरह से फंसने वाली तारीख को कभी नहीं भूल सकेंगे। यह तारीख, 3 जून 1976, उनके पिता की मृत्यु होने का दिन था। उस दिन, जब अनिल अग्रवाल के पिता ने इस संसार से अलविदा कहा, जब वे 49 वर्ष के नहीं थे, बल्कि उनके इकलौते बेटे की 3 जून को जन्म हुई थी।
अब, यह तारीख अनिल अग्रवाल के लिए एक दर्दनाक याद है। जब अनिल अग्रवाल ने अपने पिता को खोने की खबर मिली, तो उनके मन में एक गहरी दुख व्याप्त हुआ। उन्होंने हमेशा कहा था, वह अपने बेटे की तरह ही जीना चाहते थे, लेकिन आज, जब उनका इकलौता बेटा इस संसार से चला गया, तो अनिल अग्रवाल ने ऐसा नहीं कहा।
उन्होंने हमेशा अपने परिवार को सबसे पहले बताया था और अपने पिता की मृत्यु की खबर देते ही, उनके बेटे की मृत्यु की खबर सुनाने के लिए उसे खुद को मजबूर करना पड़ा। अनिल अग्रवाल ने हमेशा कहा, वह अपने पिता की तरह ही जीना चाहते थे, लेकिन आज, जब उनका इकलौता बेटा इस संसार से चला गया, तो अनिल अग्रवाल ने ऐसा नहीं कहा।
अनिल अग्रवाल ने वेदांता समूह की स्थापना की और इसका सफलता में योगदान कर चुके हैं। उन्होंने कई कंपनियों की मालिक बने हैं और उनके पास बहुत सारी सफलताओं का खजाना है। लेकिन आज, जब अनिल अग्रवाल को अपने इकलौते बेटे की मृत्यु की खबर मिलती है, तो वह अपने परिवार के बारे में सोचते हैं और दुख व्याप्त होता है।
अब, यह तारीख अनिल अग्रवाल के लिए एक दर्दनाक याद है। जब अनिल अग्रवाल ने अपने पिता को खोने की खबर मिली, तो उनके मन में एक गहरी दुख व्याप्त हुआ। उन्होंने हमेशा कहा था, वह अपने बेटे की तरह ही जीना चाहते थे, लेकिन आज, जब उनका इकलौता बेटा इस संसार से चला गया, तो अनिल अग्रवाल ने ऐसा नहीं कहा।
उन्होंने हमेशा अपने परिवार को सबसे पहले बताया था और अपने पिता की मृत्यु की खबर देते ही, उनके बेटे की मृत्यु की खबर सुनाने के लिए उसे खुद को मजबूर करना पड़ा। अनिल अग्रवाल ने हमेशा कहा, वह अपने पिता की तरह ही जीना चाहते थे, लेकिन आज, जब उनका इकलौता बेटा इस संसार से चला गया, तो अनिल अग्रवाल ने ऐसा नहीं कहा।
अनिल अग्रवाल ने वेदांता समूह की स्थापना की और इसका सफलता में योगदान कर चुके हैं। उन्होंने कई कंपनियों की मालिक बने हैं और उनके पास बहुत सारी सफलताओं का खजाना है। लेकिन आज, जब अनिल अग्रवाल को अपने इकलौते बेटे की मृत्यु की खबर मिलती है, तो वह अपने परिवार के बारे में सोचते हैं और दुख व्याप्त होता है।