अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच के लिए बनाई गई एसआईटी ने वीपीआई का नाम धर्मेंद्र उर्फ प्रधान बताया। लेकिन अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी ने कहा है कि जांच के दौरान एसआईटी ने कभी उनका नाम नहीं बताया।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस सरासर झूठ बोल रही है। उन्होंने SIT के उस दावे को भी झूठा बताया जिसमें बताया गया कि रिसॉर्ट से सारे सबूत जुटा लिए गए थे।
अंकिता के पिता कहते हैं-
वो झूठ बोल रहे हैं, पुलिस ने रिसॉर्ट से कोई सबूत नहीं जुटाए। सबूत जुटाने से पहले रिसॉर्ट को गिरा दिया गया था।
एसपी शेखर सुयाल ने कहा है-
ऐसा नहीं हो सकता, सारी चीजें अंकिता के पिता के संज्ञान में थीं और हम उन्हीं के लिए तो लड़ाई लड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वीपीआई शब्द चैट से सामने आया, उसी आधार पर जांच आगे बढ़ी। उन्होंने बताया कि विवेचना के दौरान कई नाम सामने आए थे। इसी क्रम में दो दोस्तों के बीच हुई एक चैटिंग में ‘वीपीआई’ शब्द का जिक्र मिला।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस सरासर झूठ बोल रही है। उन्होंने SIT के उस दावे को भी झूठा बताया जिसमें बताया गया कि रिसॉर्ट से सारे सबूत जुटा लिए गए थे।
अंकिता के पिता कहते हैं-
वो झूठ बोल रहे हैं, पुलिस ने रिसॉर्ट से कोई सबूत नहीं जुटाए। सबूत जुटाने से पहले रिसॉर्ट को गिरा दिया गया था।
एसपी शेखर सुयाल ने कहा है-
ऐसा नहीं हो सकता, सारी चीजें अंकिता के पिता के संज्ञान में थीं और हम उन्हीं के लिए तो लड़ाई लड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वीपीआई शब्द चैट से सामने आया, उसी आधार पर जांच आगे बढ़ी। उन्होंने बताया कि विवेचना के दौरान कई नाम सामने आए थे। इसी क्रम में दो दोस्तों के बीच हुई एक चैटिंग में ‘वीपीआई’ शब्द का जिक्र मिला।