मुझे लगता है कि इमरान मसूद ने सीधे जवाब देने की जरूरत नहीं थी. शशि थरूर का स्वागत और उसकी बातों को सुनने की जरूरत थी, फिर तो उनकी राय को स्वीकार करने की जरूरत थी. लेकिन जैसे ही उन्होंने अपनी राय व्यक्त की, तो सब कुछ बदल गया. अब लगता है कि शशि थरूर के पास और भी कई दोस्त हैं जो उनकी बात में हैं. 