Weather: उत्तर भारत में घने कोहरे से परिवहन सेवाएं प्रभावित, कई राज्यों में शीतलहर; 50 से अधिक ट्रेनें लेट

उत्तर भारत में कड़ाके की सर्दी और भीषण शीतलहर के बीच कोहरा का कहर जारी है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के कई स्थानों पर शनिवार सुबह अत्यंत घना कोहरा छाया रहा और कुछ जगहों पर दृश्यता शून्य रह गई। इसका असर सड़क, रेल और हवाई यातायात पर पड़ा। दिल्ली से आने-जाने वाली 50 से अधिक ट्रेनें प्रभावित हुईं, जिनमें राजधानी और शताब्दी भी शामिल हैं। कई उड़ानों में भी देरी हुई। सड़क पर वाहन रेंगते रहे, जबकि उत्तर प्रदेश और पंजाब में अलग-अलग स्थानों पर वाहनों की टक्कर हो गई, जिसमें 17 लोगों की जान चली गई।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देर रात और सुबह के समय पंजाब के अधिकांश स्थानों पर, हरियाणा और चंडीगढ़ के अधिकांश स्थानों पर, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई स्थानों पर तथा जम्मू और कश्मीर तथा उत्तराखंड के छिटपुट स्थानों पर घना से अत्यंत घना कोहरा छाया रहा।
 
कोहरे में फंस जाते हैं तो क्या करें, ना ही सारी जगहों पर बिजली चलती, ना ही सारी जगहों पर पानी चलने वाले नहरे। यह तो खुद दिल्ली के लोगों की बात है, जो हर साल यमुना में घूमने जाते रहते हैं और फिर कहते हैं कि यमुना प्रदूषित है 🌫️। लेकिन कोहरे में तो सबसे बड़ा खतरा यही है कि किसी भी वाहन से उतरने पर तेज हवाएं आ जाती हैं और अगर आप बिल्कुल भी तैयार नहीं होते हैं, तो फिर आपकी मौका खत्म हो जाती है ।
 
मुझे ये बात बहुत भयानक लगी है कि उत्तर भारत में ऐसी सड़क परिस्थितियां विकसित हुईं जिसमें लोग अपनी जान खो देने का खतरा है। क्या हमारे पास कोई जिम्मेदार तंत्र नहीं है जिससे इससे बचने का मौका मिले? मुझे लगता है कि हमें अपनी सड़कों और हवाई यातायात की सुरक्षा के बारे में जागरूक रहना चाहिए। अगर सरकार को भी ऐसी स्थितियों से बचने के लिए कोई नीति बनानी चाहिए तो इससे सभी की मदद मिल सकती है।

मैं यही महसूस करता हूँ कि हमें अपनी जिंदगी को सबसे पहले समझना चाहिए, फिर दूसरों की भलाई की बात करें। लेकिन इस तरह की स्थितियों में, मुझे लगता है कि सभी की मदद करनी जरूरी है।
 
कहीं तो यही मौसम हमारे लिए बना हुआ न होगा? पूरे उत्तर भारत में इतनी कड़वी सर्दी और शीतलहर, तो फिर क्यों इतनी गंभीरता से कोहरा आ गया। पूरी दुनिया जैसे ही ठंड पैदा कर रही है, हमारे लिए तो बस मौसम की समस्या बन जाती है। लोग कहीं घूमने निकलते हैं तो सड़कें बर्फ से ढक गई, किसी भी दिशा से देखना मुश्किल है, और फिर पैदल या बाइक पर चलना एक बड़ा खतरा है। यह हमारे लिए एक बड़ी समस्या है और इसका समाधान तुरंत होना चाहिए।
 
अगर ऐसी दिन होते हैं तो सिर्फ किसी भी तरह की गतिविधि करना मुश्किल है, लेकिन हमारे देश की जिंदगी में बस इतना है कि हमें एक-एक करके इस जंगल को पार करना है। आज से यह फिर से बदल रहा है - जैसे कि हर दिन, हर शाम नई उम्र के साथ लेकर आती है। ठंड थी, बारिश हुई, और अब कोहरा आ गया। लेकिन तुम्हारी दिलचस्पता में छिपी एक अच्छी खबर - बाहर निकलने पर सूरज आ गया। तो तुम बस उसके साथ बाहर निकलो।
 
अरे, यह तो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बात है... कोहरे की वजह से इतने बड़े पैमाने पर जान जुटाई गई है। मुझे लगता है कि सरकार की पहलें और भी मजबूती से लेनी चाहिए ताकि ऐसी स्थितियों से बचना सकें। हमें सड़क सुरक्षा, वाहन यंत्रणा और प्रौद्योगिकी का उपयोग करना चाहिए जिससे इससे बचने में मदद मिले।
 
कोई भी अच्छी खबर नहीं है, यह तो पूरी तरह से खराब है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड का यह कोहरा निकलना तो अच्छा था नहीं... 🌫️

रेल और हवाई यातायात में इतनी गड़बड़ी हुई, लोगों के पास जान-मानने का सही तरीका नहीं रहा। सड़क पर भी वाहन रेंगते रहे, यह तो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। और फिर 17 लोगों की जान चली गई, यह तो बहुत बड़ा झटका है।

कोई बात नहीं, मौसम विज्ञान विभाग ने बताया है कि पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे कई स्थानों पर घना से अत्यंत घना कोहरा छाया रहा। यह तो बहुत बड़ा समस्या है।
 
बस देखो यह कैसे ठंड लग गई... कोहरे में रात की गहराई और भी बढ़ गई, लोग फंस गए या फिर सड़कों पर घूमने निकले, सब हाल-हिलao mein hain... जानबूझकर किसी काम नहीं है, बस तो मौसम कैसा हुआ... बस ध्यान रखना चाहिए, हर जगह कितनी सावधानी बरतनी Padaiyei...
 
क्या ये मौसम विज्ञान की ताकत नहीं है? कोहरा कितना जोर से आया है? पहले यहां 15-20 दिनों से ठंड बढ़ रही थी, अब पूरे उत्तर भारत में शीतलहर लग गई है। इसका असर सभी पर पड़ता है, लेकिन कुछ तो कहीं और ज्यादा दिखाई देते हैं ना। कैसे कोई चीजें साफ नहीं रही हैं? क्या हमारे पास मौसम विज्ञान के अच्छे प्रशिक्षित लोग नहीं हैं? तो क्यों ऐसा हुआ? 🌫️💨
 
🌨️कितना दुखद है! ये ठंड तो हमारी सर्दियों में भी ज़रूरी नहीं थी, लेकिन अब यह नामुमकín है कि हमारे रास्ते में बाधा उत्पन्न हो। 🚗सड़क पर वाहन रेंगते रहे, ये देखकर मुझे बहुत उदासी हुई। ⏰आवाज़ और फोन के बिना जीना भी एक नई चुनौती बन गया। यह ठंड तो हमारी सुरक्षा को भी खतरे में डाल रही है। 🚨नहीं तो हमें अपने परिवारों के लिए कुछ करेंगे, जैसे बच्चों को गर्म कपड़े पहनाएं और पिताजी के लिए चाय या कॉफ़ी बनाएं। यह ठंड तो निश्चय ही हमारे देश की खुशियों पर रोक लगा रही है। 😢 #कोहरामेराहित #ठंडकिसर्दी #सुरक्षाकहान #परिवारकीकरदाई
 
कहीं तो पूरे देश में इस तरह की बीमारियाँ नहीं आती, यह तो कभी नहीं होती। कोहरे का मतलब है तो हमारे यानों और वाहनों को भी घेर लेता है, ऐसे में सड़क यातायात से दूरन्धव। और फिर भी कुछ लोग सड़क पर चलते रहते हैं, यह तो बहुत खतरनाक है।
 
कोहरा जैसी बातें तो हर साल होती हैं लेकिन कभी नहीं थी इतनी गंभीर 😟। पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में लोग कितने बेचैन हो गए? कोई तैयारी नहीं की, कोई सावधानी नहीं... शनिवार की सुबह जैसे ही उठे तो कोहरा छाया रहा। लोग अपने घरों में बैठकर इंतजार कर रहे थे। इसका असर सड़क पर कितना गया? ट्रेनें डेढ़ घंटे तक रुक गईं, उड़ानें देरी हुईं... क्या लोग जानते थे यह होगा?

और फिर 17 लोगों की जान चली गई। यह तो बहुत ही दुखद बात है 🤕. मुझे लगता है कि हमें अपनी सड़क और हवाई यातायात पर अधिक ध्यान देना चाहिए। कैसे करेंगे? कोई तरीका नहीं जानता। लेकिन फिर भी, हमें अपनी सरकार से बोलकर समस्याओं को हल करने की कोशिश करनी चाहिए।
 
अरे वाह, यह तो बहुत ही गंभीर स्थिति है 🌨️। मैं कहूँगा, यह गर्मियाँ में न होना चाहिए, लेकिन फिर मैं अपने खाली दिमाग में कुछ और सोचता हूँ। अगर यह नहीं होती, तो शायद हमारे पास एक अच्छी बात थी - गर्मियाँ में न होना। लेकिन फिर, कोहरे से इतनी समस्या हो रही है, तो यह भी अच्छा है नहीं? 😕

मैं सोचता हूँ कि अगर हमारे पास एक अच्छा मौसम प्रबंधन व्यवस्था थी, तो शायद हमें इस तरह की समस्या न होती। लेकिन फिर, मैं अपने दिमाग में एक और बात सोचता हूँ - कि अगर हमारे पास इतनी अच्छी व्यवस्था थी, तो यह नहीं होता। जैसे ही हमारे पास एक अच्छा समाधान निकल आया, तो हमें फिर से समस्या मिल गई। 🤔

मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं इतना भ्रमित होता हूँ अपने आप से।
 
क्या बात है! यह तो बहुत बड़ा मेलबोलिडा स्टॉर्म है, जो हमारे देश को घेर रहा है। पंजाब और हरियाणा में तो इतना कोहरा ही था कि लोग बाहर निकलने से डरते थे। और उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में भी यही हाल था। लेकिन जैसे ही रात हुई, तो सूरज निकल गया और धूप आ गई। अब यह तो किसी चीज़ के बारे में नहीं है, बस एक बड़ा नाटक है।

तो मैं पूछना चाहता हूं कि क्या हमारे देश की सड़कें और हवाई यातायात की तैयारी इतनी अच्छी थी? क्या लोगों को यह बात पती थी कि एक बड़ा मेलबोलिडा स्टॉर्म आ सकता है? और सबसे ज्यादा सवाल यह है कि 17 लोगों की जान चल गई, तो इसका क्या इलाज?
 
कोहरे जैसी स्थिति में लोगों को एक गुरूत्वाक्षम विचार करना चाहिए कि हमारे आसपास का यह दुनिया बहुत बड़ी और जटिल है। कोहरा न होने पर भी हमारे दैनिक जीवन में कई संभावनाएं और चुनौतियां मौजूद रहती हैं। आज भी जब हम सड़कों पर चलते हैं तो वाहनों का रेंगना हमें सिखाता है कि सावधानी और धैर्य हमारी जीवन की खूबसूरतियों को समझाए।
 
काफी ही खराब मौसम की बात है, तो फिर यह देखकर मन में एक गहरा डर लग गया 🌑️। आज कोहरे से इतनी बड़ी समस्या आ गई कि सड़क पर वाहन चल रहे थे, लेकिन भी ये नहीं समझ पाए की कैसे चलते हैं। और 17 लोगों की जान जानबूझकर चली गई, यह तो बहुत बड़ी दुखदी है। और आज रेल और हवाई यातायात पर भी असर पड़ा, यह तो सिर्फ एक बड़ा वित्तीय नुकसान होगा। 🚨😔 कोहरा पूरे उत्तर भारत में घना है, यह तो बहुत बड़ी समस्या है।
 
यह तो बहुत बड़ा दंग रहा है 🌨️। मुझे लगता है कि कुछ लोग धैर्य रखने की जरूरत हैं। कोहरा किस चीज़ के बिना नहीं चलता? 🤔 सड़कें और हवाई यातायात पर देरी आने से कोई अच्छा नतीजा नहीं होता। लोगों की जान जोखिम में आ गई तो यह बहुत बड़ा दुःख है। 🙏
 
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