पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) जारी है। इस प्रक्रिया में नागरिकों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है ताकि सूची में किसी भी तरह की त्रुटि या विसंगति को दूर किया जा सके। इसी बीच पूर्व भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान और तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी को एसआईआर प्रक्रिया के तहत सुनवाई के लिए तलब किया गया है।
झूलन गोस्वामी के दो भाई-बहनों को भी बुलाया गया, क्योंकि उनके पिता के नाम में दस्तावेजों में अंतर पाया गया है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ दस्तावेजों में उनके पिता का नाम निशिथ रंजन गोस्वामी और कुछ में निशिथ गोस्वामी लिखा है। जांच अधिकारी ने बताया कि सुनवाई 27 जनवरी को तय की गई थी। झूलन गोस्वामी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं थी और उन्होंने यह मामला अपने घर से ही निपटा लिया। जबकि उनके दोनों भाई-बहन हियरिंग में स्थानीय स्कूल में शामिल हुए।
इस मामले पर कई राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। टीएमसी ने इसे राष्ट्रीय खिलाड़ी के खिलाफ लक्ष्यभेदी कार्रवाई बताते हुए भाजपा पर निशाना साधा। पार्टी ने कहा कि हमारे नायकों का सिर्फ फोटो-ऑप के लिए इस्तेमाल किया जाता है, फिर उन्हें शक और अपमान का सामना करना पड़ता है। झूलन गोस्वामी की नागरिकता पर सवाल उठाने वाली पार्टी ने सारी नैतिक जवाबदेही खो दी है।
यह एक बड़ा मुद्दा है और यह दिखाता है कि राजनीतिक दलों कैसे खिलाड़ियों के खिलाफ इस्तेमाल कर सकते हैं। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि खिलाड़ी अपने पिता के नाम में दस्तावेजों में अंतर को दूर करने के लिए तलब किया जाता है, न कि उनकी नागरिकता पर सवाल उठाने के लिए।
झूलन गोस्वामी के दो भाई-बहनों को भी बुलाया गया, क्योंकि उनके पिता के नाम में दस्तावेजों में अंतर पाया गया है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ दस्तावेजों में उनके पिता का नाम निशिथ रंजन गोस्वामी और कुछ में निशिथ गोस्वामी लिखा है। जांच अधिकारी ने बताया कि सुनवाई 27 जनवरी को तय की गई थी। झूलन गोस्वामी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं थी और उन्होंने यह मामला अपने घर से ही निपटा लिया। जबकि उनके दोनों भाई-बहन हियरिंग में स्थानीय स्कूल में शामिल हुए।
इस मामले पर कई राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। टीएमसी ने इसे राष्ट्रीय खिलाड़ी के खिलाफ लक्ष्यभेदी कार्रवाई बताते हुए भाजपा पर निशाना साधा। पार्टी ने कहा कि हमारे नायकों का सिर्फ फोटो-ऑप के लिए इस्तेमाल किया जाता है, फिर उन्हें शक और अपमान का सामना करना पड़ता है। झूलन गोस्वामी की नागरिकता पर सवाल उठाने वाली पार्टी ने सारी नैतिक जवाबदेही खो दी है।
यह एक बड़ा मुद्दा है और यह दिखाता है कि राजनीतिक दलों कैसे खिलाड़ियों के खिलाफ इस्तेमाल कर सकते हैं। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि खिलाड़ी अपने पिता के नाम में दस्तावेजों में अंतर को दूर करने के लिए तलब किया जाता है, न कि उनकी नागरिकता पर सवाल उठाने के लिए।