हिजाब पहनकर बेटी बनेगी देश की PM! ओवैसी के इस बयान ने मचाया बवाल, BJP का पलटवार- पहले अपनी कुर्सी खाली करो

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बयान दिया, 'संविधान किसी को भी प्रधानमंत्री बनने से नहीं रोकता, लेकिन एक हिंदू हमेशा प्रधानमंत्री बनेगा। यह कहना सही नहीं है कि हर महिला हिंदू होगी।

शिवसेना प्रवक्ता शायना एनसी ने कहा, 'नेतृत्व करने का तरीका जनता के जनादेश पर आधारित होना चाहिए, नहीं तो जाति, धर्म या समुदाय पर। भविष्य में महिला प्रधानमंत्री के लिए किसी भी समर्थन की आवश्यकता नहीं है। योग्यता पर आधारित होना चाहिए, न कि महिलाओं या पुरुषों के।

ओवैसी साहब ने कहा, 'हिजाब पहनकर बेटी बनेगी देश की प्रधानमंत्री, यह बयान करना सही नहीं है। पहले अपनी कुर्सी खाली करो।'

राजनेताओं ने यह बयान सुनकर हैरानियां हुईं और अपनी राय व्यक्त करते हुए देश में एक महिला प्रधानमंत्री बनने की संभावना पर सवाल उठाए।
 
तो यह तो बहुत ही अच्छा आंदोलन चल रहा है... लेकिन शायद ये सब बातें सिर्फ तेल लेने वालों की बातें हैं जो देश में बसने की इच्छा नहीं करते। और ओवैसी साहब भी तो थोड़ा चंचल है... क्या वास्तव में हमारे देश को ऐसा महिला प्रधानमंत्री चाहते हैं जो हिजाब पहनकर? या फिर शायद यह तो बहुत ही अच्छा मौका है कि हमें अपनी राय व्यक्त करने का मौका मिले। लेकिन शायना एनसी ने बोलते हुए बहुत ही सुंदर बात कही... जाति, धर्म या समुदाय पर आधारित होने की बात तो असंभव है।
 
मुझे तो लगता है कि लोगों ने यह बयान सुनकर कहीं गलत फिरिया हुआ. पहले ही हमारे देश में महिलाओं को राजनीति में आगे बढ़ाने की बातें होती रहती हैं तो अब एक महिला प्रधानमंत्री बनने की बात कर रहे लोग तो क्या चिंतित हुए? 🤔

ओवैसी साहब का बयान जरूरी है, लेकिन यह कहीं भी गलत नहीं समझना चाहिए. पहले अपनी पार्टी की जीत खोने के बाद अपनी कुर्सी खाली करनी चाहिए, फिर दूसरों से सबक सीखने की जरूरत है। 👊
 
मुझे लगता है कि राजनेताओं के बयान से लगता है कि वो महिला प्रधानमंत्री बनने की बात करते समय, उनके दिमाग में भी एक हिंदू प्रधानमंत्री बनने का कल्पना नहीं होती?

क्या हमें लगता है कि महिला प्रधानमंत्री बनने के लिए एक हिस्सा यह होगा कि वह पहले अपने जाति/धार्मिक पहचान से दूर हो जाए?

और ओवैसी साहब का बयान तो बिल्कुल सही है! सबसे पहले मुझे अपनी कुर्सी खाली करनी चाहिए, और फिर मैं अपने देश के लिए कुछ अच्छा कर सकता हूँ।

क्या हमें लगता है कि राजनेताओं को अपने बयानों से पहले थोड़ा सोच-विचार करना चाहिए?
 
बोलते समय भी जिम्मेदारी बरतनी चाहिए, यह बहुत जरूरी है 🤔. असम के मुख्यमंत्री की बात सुनकर मुझे लगता है कि हमें एक दूसरे के सम्मान को भूल जाना नहीं चाहिए। शिवसेना प्रवक्ता की बात समझने योग्य है, नेतृत्व करने का तरीका जनता के जनादेश पर आधारित होना चाहिए, न कि जाति, धर्म या समुदाय पर। ओवैसी साहब की बात सुनकर मुझे लगता है कि हमें अपने शब्दों को सोच-समझकर रखना चाहिए और दूसरों की राय का सम्मान करना चाहिए 🙏. यह बयान सुनने पर राजनेताओं ने सवाल उठाए हैं, लेकिन मुझे लगता है कि हमें अपनी विचारधारा को तैयार रखना चाहिए और दूसरों की बातों को समझने की कोशिश करनी चाहिए 🤓.
 
अरे, भाई-बहन, यह बयान करने वाले लोगो की समझ तो अलग-अलग है... 🤔 ओवैसी साहब की बात करो, वह तो सही कह रहे हैं... कुर्सी खाली करना सबसे पहले चाहिए, फिर बयान देना। लेकिन शायना एनसी और हिमंता बिस्वा सरमा जी की बातें सुनकर लगता है कि उनको समझने की जरूरत नहीं... नेतृत्व करने का तरीका तो जनता के जनादेश पर आधारित होना चाहिए, लेकिन यह तो एक दम तय कर देना चाहिए। और महिलाओं के लिए भी तय कर देना चाहिए... 🙄
 
क्या सोचोगे 🤔, मुख्यमंत्री जी हमारे देश में हिंदू बनाने की बात कैसे कर सकते हैं? यह तो बहुत अजीब है... और ओवैसी साहब का बयान सुनकर मुझे थोड़ा खुश हुआ 😊, लेकिन समझने की जरूरत नहीं है। शायना एनसी की बात बिल्कुल सही है, नेतृत्व करने का तरीका जनता के जनादेश पर आधारित होना चाहिए। और ओवैसी साहब जी को अपनी कुर्सी खाली करनी चाहिए, तभी हमें उनकी बात समझने में सक्षम होंगे।

क्या तुम्हारे मन में भी यह सवाल उठते हैं कि कैसे एक महिला प्रधानमंत्री बनेगी? या तो इसके लिए हमें अपनी राजनीति को बदलना होगा, या फिर हमें अपने देश में बदलाव लाने के लिए काम करना होगा।

किसी भी तरह से यह बयान सुनकर मुझे एक सवाल है - क्या हमारा देश सही तरीके से तय कर सकता है कि कौन-sahi नेता बनने वाला है?
 
बोलते बोलते लगता है लोगो को यह समझने में परेशानी होती है कि भारत एक जातिवादी देश नहीं है! चाहे प्रधानमंत्री बनाएं चाहे ना बनाएं, महिलाओं को भी सम्मान मिलेगा। और ओवैसी साहब जी की बात सुनकर खुश हूं। अगर लोग अपनी कुर्सी खाली करेंगे तो शायद एक अच्छा देश बन पाएगा! 🙏💪
 
यार, यह बहुत ही दिलचस्प बात है 🤔। मैं समझता हूँ कि शिवसेना प्रवक्ता ने कहा है कि भविष्य में महिला प्रधानमंत्री बनने के लिए किसी भी समर्थन की आवश्यकता नहीं है, बल्कि योग्यता पर आधारित होना चाहिए। तो फिर क्यों हम इस बात पर इतनी चर्चा कर रहे हैं कि महिलाएं प्रधानमंत्री बन सकती हैं? यह एक सवाल है कि कैसे हम अपने देश को आगे बढ़ाने के लिए महिलाओं को मौका देने की संभावना पर विचार करेंगे।
 
अरे, ये बातें तो बहुत ही अजीब हैं 🤔। स्वामिनाथन जैसे लोगों ने भी हमेशा कहा था, लेकिन अब वे सभी यहीं पहुंच गए हैं। क्या लगता है कि एक महिला प्रधानमंत्री बनने के लिए आपको सिर्फ अपने स्वभाव और तरीके पर भरोसा करना पड़ेगा, नहीं तो आपको अपने जाति, धर्म या समुदाय को खत्म करना होगा। यह देश कितनी देर तक चल सकता है? 🙄
 
Wow 😮, यह बयान सुनने में तो थोड़ा अजीब लग रहा है! कोई भी नेता अपने बयानों से देश की राजनीति को कितना प्रभावित कर सकता है। लेकिन एक सवाल उठता है, क्या यह बयान सही तौर पर बनाए जा रहे हैं या फिर गलती में बोले गए हैं? 🤔
 
मुझे ये बयान सुनने पर थोड़ा आघात हुआ 🤕, जैसे की मैं अपने बचपन की दोस्त थी और आज वह प्रधानमंत्री बन गई होगी। यह बातें करना कोई मजाक नहीं है, लेकिन एक दिन हमारी सरकार में महिला प्रधानमंत्री बनने की संभावना कैसी है? 🤔

मुझे लगता है कि ये बयान करना सही नहीं है, हमें अपनी राजनीति में आगे बढ़ना चाहिए, न कि पीछे खड़े रहना। और अगर एक महिला प्रधानमंत्री बनना है तो वह वो होनी चाहिए जो योग्य हो, न कि किसी भी बात पर। 👥

आज की राजनीति में बहुत सारे बदलाव आए हैं, और हमें अपने देश को आगे बढ़ाना चाहिए, न कि पीछे खड़े रहना। 🚀
 
भाई, यह बयान सुनने को बहुत ही अजीब लग रहा है 🤔। किसी भी किस्मत के रूप में महिला प्रधानमंत्री बने तो देश को फायदा होगा, बिल्कुल! 🌟

महिलाओं की स्थिति में सुधार करने के लिए हमें और भी बहादुरियों की जरूरत है 💪। शायना एनसी की बात समझ में आती है, नेतृत्व करने का तरीका जनता के जनादेश पर आधारित होना चाहिए, नहीं तो इससे देश में विभाजन की स्थिति उत्पन्न होगी 😬

ओवैसी साहब की बात भी सही है, पहले अपनी कुर्सी खाली करो, बोलते समय जिम्मेदारी लेते रहना चाहिए। 👊
 
क्या ये बात सच में होगी, कि हर महिला हिंदू होगी? मैं तो कहूंगा, नाहीं 🙅‍♂️, यह बहुत ही गैर सामंजस्यपूर्ण बात है। हमारे देश में इतनी विविधता है, कि एक ही शब्द या बयान सबके लिए सही नहीं हो सकता। लेकिन फिर भी, महिलाओं को राजनीति में आगे बढ़ने के लिए मेरी पूरी सराहना है। क्योंकि अगर हमारे देश में एक ही धर्म या जाति के लोग ही नेतृत्व कर सकते हैं, तो फिर भी बहुत सारी चीजें गड़बड़ हो जाएंगी। 🤔
 
यह बयान सुनकर बहुत बड़ा आश्चर्य हो गया है 🤯। शायद लोगों को यह पता नहीं है कि भारत में देश के प्रधानमंत्री किसी भी धर्म या समुदाय से चुने जाते हैं न कि किसी विशिष्ट धर्म या समुदाय के लोग ही प्रधानमंत्री बन सकते हैं। यह बयान करना एक बड़ा गलतफहमी है और इसे नहीं समझना चाहिए। देश में महिला प्रधानमंत्री बनने की संभावना जरूर है, लेकिन इसके लिए पहले तो नेतृत्व करने का तरीका जनता के जनादेश पर आधारित होना चाहिए और यह कि किसी विशिष्ट धर्म या समुदाय से नहीं।
 
अरे, ये सभी बयान करना थोड़ा अजीब लग रहा है। ओवैसी साहब का बयान तो बहुत ही सही लगता है, लेकिन शायद उन्होंने यह कहकर गलत महसूस कराया कि वह सरकार खाली कर देना चाहते हैं। शिवसेना की बात समझ में नहीं आई, जैसे नेतृत्व करने का तरीका जनता के जनादेश पर आधारित होना चाहिए तो फिर संसदीय चुनावों में भारी मतदान होता है ना? और हिमंता बिस्वा सरमा का बयान तो थोड़ा अजीब लगता है, एक हिंदू हमेशा प्रधानमंत्री बनेगा यह कहना सही नहीं है।
 
भले ही हमारे देश में अभी भी बहुत सी बातें हैं जो बदलने की जरूरत है, लेकिन मुझे लगता है कि इस मामले में शायद सब कुछ सही नहीं है। यह कहना कि एक हिंदू हमेशा प्रधानमंत्री बनेगा, तो थोड़ा बहुत ज्यादा है। और ओवैसी साहब ने बोला है कि अगर पहले अपनी कुर्सी खाली करो, फिर बात करो। लेकिन मुझे लगता है कि यह बातें देश को आगे बढ़ाने की बजाय हमें पीछे कर रही हैं।

और शायना एनसी ने कहा है कि महिलाओं या पुरुषों पर आधारित होना चाहिए, नहीं तो यह सिर्फ जाति, धर्म या समुदाय पर आधारित है। लेकिन मुझे लगता है कि यह भी थोड़ा बहुत सीमित दृष्टिकोण है। हमें और अधिक सोच-विचार करना चाहिए, ताकि हम देश को एक बेहतर तरीके से आगे बढ़ा सकें। 🤔
 
मैंने पढ़ा है कि असम के मुख्यमंत्री ने बयान दिया है कि हर महिला हमेशा प्रधानमंत्री बनेगी। लेकिन शायद यह तो सही नहीं है। हमें महिलाओं की योग्यता पर ध्यान देना चाहिए, न कि उनके जाति, धर्म या लिंग पर। और ओवैसी साहब का बयान भी ठीक है, पहले अपनी कुर्सी खाली करें और फिर बात करें।
 
Back
Top