चंबा में आधी रात का भूकंप: तीव्रता 3.6, लोग घरों से बाहर निकल आए
हिमाचल प्रदेश के चंबा में शुक्रवार रात आधी रात के समय भूकंप के झटके महसूस हुए। इसकी तीव्रता 3.6 मापी गई, जो कि मामूली नहीं है। इस भूकंप ने जमीन के भीतर 10 किलोमीटर गहराई पर आया, जिससे इन्हें तीन से चार बार महसूस किया गया।
भूकंप रात 11 बजकर 36 मिनट पर आया, लेकिन इससे किसी भी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं है। यहां तक कि जिन लोगों ने झटके महसूस किए, वह भी घरों से बाहर निकल आए।
चंबा जिला भूकंप की दृष्टि से अति संवेदनशील यानी जोन 6 में है। इसलिए यहां पर रात 12 बजे के बाद भूकंप लगना आम बात है। इससे पहले भी, 14 दिन पहले ही इसी जिले में भूकंप आया था।
भूकंप और टेक्टोनिक प्लेट्स
धरती की सतह मुख्य तौर पर 7 बड़ी और कई छोटी-छोटी टेक्टोनिक प्लेट्स से बनी है। ये प्लेट्स लगातार तैरती रहती हैं और कई बार आपस में टकरा जाती हैं। टकराने से कई बार प्लेट्स के कोने मुड़ जाते हैं और ज्यादा दबाव पड़ने पर ये प्लेट्स टूटने लगती हैं।
ऐसे में नीचे से निकली ऊर्जा बाहर की ओर निकलने का रास्ता खोजती है और इस डिस्टरबेंस के बाद भूकंप आता है। यह तीव्र earthquakes में एक महत्वपूर्ण कारक है, जो कि हमारी पृथ्वी की गतिविधियों से निकलने वाली ऊर्जा को दर्शाता है।
इसलिए, जब भी टेक्टोनिक प्लेट्स तैरती हैं और आपस में टकराती हैं, तो भूकंप के झटके महसूस होते हैं। ये झटके निरंतर आते रहते हैं और हमें उन्हें पहचानना होता है।
हिमाचल प्रदेश के चंबा में शुक्रवार रात आधी रात के समय भूकंप के झटके महसूस हुए। इसकी तीव्रता 3.6 मापी गई, जो कि मामूली नहीं है। इस भूकंप ने जमीन के भीतर 10 किलोमीटर गहराई पर आया, जिससे इन्हें तीन से चार बार महसूस किया गया।
भूकंप रात 11 बजकर 36 मिनट पर आया, लेकिन इससे किसी भी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं है। यहां तक कि जिन लोगों ने झटके महसूस किए, वह भी घरों से बाहर निकल आए।
चंबा जिला भूकंप की दृष्टि से अति संवेदनशील यानी जोन 6 में है। इसलिए यहां पर रात 12 बजे के बाद भूकंप लगना आम बात है। इससे पहले भी, 14 दिन पहले ही इसी जिले में भूकंप आया था।
भूकंप और टेक्टोनिक प्लेट्स
धरती की सतह मुख्य तौर पर 7 बड़ी और कई छोटी-छोटी टेक्टोनिक प्लेट्स से बनी है। ये प्लेट्स लगातार तैरती रहती हैं और कई बार आपस में टकरा जाती हैं। टकराने से कई बार प्लेट्स के कोने मुड़ जाते हैं और ज्यादा दबाव पड़ने पर ये प्लेट्स टूटने लगती हैं।
ऐसे में नीचे से निकली ऊर्जा बाहर की ओर निकलने का रास्ता खोजती है और इस डिस्टरबेंस के बाद भूकंप आता है। यह तीव्र earthquakes में एक महत्वपूर्ण कारक है, जो कि हमारी पृथ्वी की गतिविधियों से निकलने वाली ऊर्जा को दर्शाता है।
इसलिए, जब भी टेक्टोनिक प्लेट्स तैरती हैं और आपस में टकराती हैं, तो भूकंप के झटके महसूस होते हैं। ये झटके निरंतर आते रहते हैं और हमें उन्हें पहचानना होता है।