उत्तराखंड के जौनसार-बाबर क्षेत्र में चालदा महासू महाराज की विदाई के वक्त रोते दिखाई दे रहे लोग। इन्होंने सोमवार को दसऊ मंदिर से हिमाचल के सिरमौर जिला के पश्मी क्षेत्र की यात्रा पर निकल पड़े।
दसऊ मंदिर से पहले पांच वर्षों तक विराजमान चालदा महासू महाराज, अब अगले पांच वर्षों तक हिमाचल के सिरमौर जिला के पश्मी क्षेत्र के दसऊ मंदिर में रुकेंगे।
उत्तराखंड के जौनसार-बाबर और हिमाचल के शिमला-सिरमौर के शिलाई क्षेत्र में न्याय के देवता चालदा महासू महाराज को हजारों लोग पूजाते हैं। उनके चार रूप माने जाते हैं - बासिक, पाबसीक, बोल्डा और चालदा।
चालदा महाराज को देवभूमि का यात्रा करने वाला स्वरूप माना जाता है, जो वर्षों के अंतराल पर अपने भक्तों के बीच प्रवास करते हैं। माना जाता है कि जहां-जहां उनके कदम पड़ते हैं, वहां से संकट दूर होता है और न्याय मिलता है।
सोमवार को दसऊ मंदिर से हिमाचल के सिरमौर जिला के पश्मी क्षेत्र की यात्रा पर चालदा महासू महाराज निकल पड़े। इसके बाद, जौनसार-बाबर और शिलाई क्षेत्र में कल तक प्रवास करेंगे।
माना जा रहा है कि चार दिनों में से 60 हजार से अधिक लोग दर्शन कर चुके हैं। उत्तराखंड के दसऊ, दसक, समाल्टा, कोटी-कनासर, अणु, बांगसाल, आंछर, बड़वाड़ी और झोटा क्षेत्र के गांव में कल तक प्रवास करेंगे।
देवता महाराज की यात्रा का पहला पड़ाव द्राबिल में होगा। 14 दिसंबर को मंत्रोच्चारण के साथ पश्मी मंदिर में विराजमान होंगे।
चालदा महासू महाराज के दर्शन को उमड़ी भीड़ से भरा जौनसार-बाबर और शिलाई क्षेत्र में दर्शाया गया।
दसऊ मंदिर से पहले पांच वर्षों तक विराजमान चालदा महासू महाराज, अब अगले पांच वर्षों तक हिमाचल के सिरमौर जिला के पश्मी क्षेत्र के दसऊ मंदिर में रुकेंगे।
उत्तराखंड के जौनसार-बाबर और हिमाचल के शिमला-सिरमौर के शिलाई क्षेत्र में न्याय के देवता चालदा महासू महाराज को हजारों लोग पूजाते हैं। उनके चार रूप माने जाते हैं - बासिक, पाबसीक, बोल्डा और चालदा।
चालदा महाराज को देवभूमि का यात्रा करने वाला स्वरूप माना जाता है, जो वर्षों के अंतराल पर अपने भक्तों के बीच प्रवास करते हैं। माना जाता है कि जहां-जहां उनके कदम पड़ते हैं, वहां से संकट दूर होता है और न्याय मिलता है।
सोमवार को दसऊ मंदिर से हिमाचल के सिरमौर जिला के पश्मी क्षेत्र की यात्रा पर चालदा महासू महाराज निकल पड़े। इसके बाद, जौनसार-बाबर और शिलाई क्षेत्र में कल तक प्रवास करेंगे।
माना जा रहा है कि चार दिनों में से 60 हजार से अधिक लोग दर्शन कर चुके हैं। उत्तराखंड के दसऊ, दसक, समाल्टा, कोटी-कनासर, अणु, बांगसाल, आंछर, बड़वाड़ी और झोटा क्षेत्र के गांव में कल तक प्रवास करेंगे।
देवता महाराज की यात्रा का पहला पड़ाव द्राबिल में होगा। 14 दिसंबर को मंत्रोच्चारण के साथ पश्मी मंदिर में विराजमान होंगे।
चालदा महासू महाराज के दर्शन को उमड़ी भीड़ से भरा जौनसार-बाबर और शिलाई क्षेत्र में दर्शाया गया।