हिमाचल में हाड़ कंपाने वाली ठंड: 16 शहरों में 5° से नीचे लुढ़का तापमान; ताबो का -7.1°, शिमला से ठंडी मैदानी इलाकों की रात - Shimla News

हिमाचल प्रदेश में तापमान नीचे गिरा, रात को 5 डिग्री से नीचे लुढ़का तापमान। शिमला में तापमान 8 डिग्री रहा, जैसे ही दिन का तापमान बढ़कर 28-30 डिग्री पहुंच गया। इसी तरह अन्य शहरों में भी रात का तापमान नीचे गिरा।
इस बीच लाहौल स्पीति के ताबो का तापमान -7.1 डिग्री रहा, जिससे पानी की टंकियां और पाइप लाइन में बर्फ जमने लगी। खेतों में भी फसलों पर पाला गिरने से असर पड़ा। शीतलहर ने ऊंचे क्षेत्रों के साथ-साथ मैदानी इलाकों में भी छाया डाला।
शिमला से ठंडी हुई मैदानी इलाकों की रात। इस बीच मैदानी इलाकों में वायुमंडलीय दबाव कम होने पर कोहरा छाया रहा।
 
मैंने हिमाचल प्रदेश में तापमान नीचे गिरने से पहले सोचा, शायद मैदानी इलाकों में लोग अपने घरों को तैयार कर लें, जैसे ही दिन का तापमान बढ़कर 28-30 डिग्री पहुंच गया तो फिर क्या करें। शीतलहर ने खेतों में फसलों पर पाला गिरने से असर पड़ा, लेकिन मुझे लगता है कि यही reason है कि हर साल हमारे फसलें खराब होती जा रही हैं। शिमला से ठंडी हुई मैदानी इलाकों की रात तो अच्छी है, अब लोग बाथरूम से निकलकर खिड़कियां खोल सकते हैं 🤣.
 
तापमान इतना नीचे गिरा तो फसलों और सब्जियां क्या करेंगी। लाहौल स्पीति का तापमान -7.1 डिग्री यह तो बहुत ठंडा है। मैदानी इलाकों में भी वायुमंडलीय दबाव कम होने पर कोहरा छाया रहा, यह तो बहुत खतरनाक है खेतों में सूखापन बढ़ सकता है।
 
बहुत तापमान नीचे गिरा, ज़रूरी था कि ठंडी आवाजाही हो। लाहौल स्पीति में -7.1 डिग्री का तापमान जैसे ज़रूरी था कि बर्फ जाए। फसलों पर पाला गिरने से दुख हुआ, क्षेत्रियों को बुरा लगा। शीतलहर ने ऊंचे इलाकों के साथ मैदानी इलाकों में भी छाया डाला, बहुत सारे लोग ठंडी आवाजाही देख रहे।
 
मुझे तो यह देखकर आश्चर्य हुआ 🤔 कि कैसे तापमान इतनी जल्दी बदल गया? मैंने सुना था कि शीतलहर बहुत गंभीर होती है, लेकिन 5 डिग्री तक नीचे जाना कुछ और है 🤯। मुझे लगता है कि खेतों में फसलों पर पाला गिरने से बहुत बड़ा नुकसान हुआ होगा। और रात को इतनी ठंडी होने से लोगों को तौलिये से गर्म रहना पड़ेगा, बिल्कुल नहीं सहज 🤷‍♀️
 
क्या हाल के महीनों से हमारे देश में तापमान नियंत्रण की कला खो गई है? पहले तो हिमाचल प्रदेश में इतनी ठंड लगने की बात कही नहीं थी, और अब -7.1 डिग्री से नीचे गिरना एक नया रिकॉर्ड है। और फिर यह भी कि शीतलहर मैदानी इलाकों तक पहुंच गई, जैसे कि हमारे पास कभी नहीं थी। तो यह तो अच्छी तरह से ठंड लगनी चाहिए, लेकिन खेतों में फसलों पर पाला गिरने और पानी की टंकियां बर्फ जमने की बात तो दुखद है।
 
यह तापमान बहुत भयानक है! शिमला में 8 डिग्री तक गिर गया तो यार, ठंडी तो नहीं? लेकिन फिर दिन का तापमान बढ़कर 28-30 डिग्री पहुंच गया, तो यह तो ज्वालामुखी के स्पूट से भी जल्दी नहीं होता। लाहौल स्पीति में -7.1 डिग्री तो यार, यह तो बर्फ का तूफान है। फसलों पर पाला गिरने से असर पड़ा, तो सबकुछ बहुत चिंताजनक है।

मैं समझ नहीं पाऊंगा कि वायुमंडलीय दबाव कम होने पर कोहरा छाया रहा, यह तो ठंडी और बीमारी भरी स्थिति है। मैदानी इलाकों की रात ठंडी हुई, तो फिर क्या करना। शीतलहर ने पूरे भारत में अपना छाया डाला, यह तो बहुत बड़ा बदलाव है।

कोई बात नहीं, बस गर्मी को स्वीकार कर लें। यह तापमान हमें जागरूक करता है कि पृथ्वी की तापमान में क्यों बढ़ता रहता है। 🌡️
 
बेटा, यह तापमान बढ़कर 28-30 डिग्री क्या कर रहा है? शिमला में 8 डिग्री तो ठीक है, लेकिन दिल्ली में 32 डिग्री तो ज्यादा है! यह तापमान बढ़ने से हमारे प्रकृति को कितना नुकसान पहुंच रहा है? खेतों में फसलों पर पाला गिरने से असर पड़ा, लेकिन शीतलहर की वजह से ऊंचे क्षेत्रों में भी तेजी से बर्फ जमने लगी। और मैदानी इलाकों में वायुमंडलीय दबाव कम होने पर कोहरा छाया रहा, इससे रात की गति से गुजरती है।
 
बात तो बहुत बढ़ गई, तापमान नीचे गिर गया! शिमला में 8 डिग्री तक पहुंच गया, यह तो ठंड लगने वाली जगह है! लाहौल स्पीति का तापमान -7.1 डिग्री राखता नहीं , पानी की टंकियां और पाइप लाइन में बर्फ जमने लगी, खेतों में फसलों पर पाला गिरने से भारी नुकसान हो सकता है...
 
तापमान में बदलाव से फसलों और खेतों का क्या होगा? 🌪️
किसी भी चीज़ को समझने के लिए, आपको उसे अपने आप में देखना होता है - अलेक्जेंडर ग्रामट 💡
 
यार तो यह तापमान नीचे गिरना क्या कहा, जैसे पहले जम्मू-कश्मीर की खूबसूरतियां बाकी सारे राज्यों की तरह ही दिखती थीं 🤔। वहाँ से दिल्ली तक आ गई शीतलहर, फिर यह ठंडी मैदानी इलाकों में पहुंची, जैसे पहले हमारे पास साल भर सुखदी रहती थी। अब तो शिमला में रात को 5 डिग्री तक गिर गया, यह तो साल 1980 के बाद नहीं हुआ था। 😕 फसलों पर पाला गिरना और खेतों में बर्फ जमना क्या कहें, इससे पहले हमारे पास न सिर्फ खेती अच्छी रहती थी, बल्कि मनोरंजन भी तय किया जाता था। 🌞
 
मुझे यह तापमान घबराहट पहुंचा देता है! शिमला में 8 डिग्री से घंटों तक ठंड थी, यह तो और भी ठंडा नहीं होना चाहिए। मैं अपने बचपन की यादों में लाता हूं, जब हमारे घरों के बाहर बर्फ लगने देखकर खुशियां मनाई जाती थी। अब यह तो ऐसी हालत है जैसे पूरा भारत एक साथ ठंडा पड़ गया है। और फिर लाहौल स्पीति में -7.1 डिग्री का तापमान, यह तो और भी बेकार है। मैं अपने पिताजी की कहानियों सुनाता हूं, जब उनके समय में ऐसी ठंडी शीतलहर आई थी, उस दौरान लोगों ने खाद्य सामान खोने का डर जीता था। आजकल तो यह तापमान इतना कम हो गया है कि फसलों पर पाला गिरने लगा है। मुझे ऐसी चीजें नहीं लगती हैं जैसे की हमारे खेतों से बात करें।
 
बत्ती जलने से जैसे हिमाचल प्रदेश का तापमान नीचे गिरा, अब रात को 5 डिग्री से नीचे लुढ़का है। शिमला में तापमान 8 डिग्री रहा, यह अच्छा नहीं है, खासकर जब दिन का तापमान बढ़कर 28-30 डिग्री पहुंच गया। अन्य शहरों में भी रात का तापमान नीचे गिरा, लाहौल स्पीति के ताबो का तापमान -7.1 डिग्री रहा, इससे पानी की टंकियां और पाइप लाइन में बर्फ जमने लगी।
 
बड़ा तापमान गिरने से पूरा देश हिल गया, लेकिन मेरा ध्यान यह है कि ऊंचे क्षेत्रों में शीतलहर ने फसलों पर भारी असर डाला। किसानों को बहुत बड़ा नुकसान होगा, इसे सरकार से पूरी रूप से मदद लेनी चाहिए। 🤕
 
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