'ये काबुल का मैसेज, इसका जवाब देना...', इस्लामाबाद धमाके में 12 की मौत के बाद तालिबान पर भड़के

बोलते बोलते मैंने सोचा, यह आत्मघाती हमला पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ को फिर से अपने देश में फंसा दिया है 🤦‍♂️

मुझे लगता है कि इस्लामाबाद में हुए आत्मघाती हमले का उद्देश्य वास्तव में यह नहीं था कि काबुल को एक संदेश देना, बल्कि पाकिस्तान की सरकार को अपने खिलाफ आतंकवादी हमलों के लिए दोषी ठहराने का मौका मिलना चाहता था 🤔

पाकिस्तान की सरकार को अपनी सुरक्षा एजेंसियों को इस्लामाबाद में हुए धमके की जांच करनी चाहिए, लेकिन उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि आतंकवाद का जवाब देना आसान नहीं है 🚫

मुझे लगता है कि पाकिस्तान को अपने खिलाफ आतंकवादी हमलों के लिए जिम्मेदार ठहराए जाने से पहले, उन्हें अपनी सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की दिशा में बदलाव करना होगा 🔄

आज की घटना ने फिर से पाकिस्तान को एक वेक अप कॉल करार दिया है, लेकिन मुझे लगता है कि यह देश अपने खिलाफ आतंकवादी हमलों के लिए जिम्मेदार ठहराए जाने से पहले, अपने खिलाफ बदलाव करने की जरूरत महसूस कर रहा है 🤝
 
भारत में युद्ध की स्थिति नहीं है, लेकिन फिर भी हम दोस्तों और परिवार को सुरक्षित रखने के लिए तैयार रहना चाहिए। यह धमकी वास्तव में खतरनाक हो सकती है, लेकिन हमें अफगानिस्तान की सरकार से भी बात करने के लिए तैयार रहना चाहिए। शांति और संवाद हमेशा सबसे अच्छा समाधान होता है।
 
बड़े भाई, ये तो बहुत बड़ा खतरा है, लेकिन हमें थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए। यह तो ख्वाजा आसिफ जी की बात है, जो पाकिस्तान के रक्षा मंत्री हैं। उन्होंने कहा है कि इस्लामाबाद में हुए आत्मघाती हमले का उद्देश्य काबुल की सरकार को एक चेतावनी देना है, लेकिन हमें नहीं समझना चाहिए कि यह तो कौन सी चेतावनी है और इसका जवाब कैसे दिया जाए।

हमें बस यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों की सुरक्षा से समझौता न हो, लेकिन हमें ख्वाजा आसिफ जी की बात पर भरोसा नहीं करना चाहिए। यह तो बहुत बड़ा खतरा है, लेकिन हमें इस पर चर्चा करने के लिए तैयार रहना चाहिए और सुरक्षा के मुद्दे पर एक साथ आमने-सामने बैठकर निर्णय लेना चाहिए। 🤝
 
मुझे इस घटना से बिल्कुल भी पसंद नहीं है, यार! यह तो बहुत ही गंभीर मुद्दा है और हमें इसके पीछे के मकसद को समझने की जरूरत है। क्या यह हमला वास्तव में तालिबान द्वारा किया गया है? और इसके पीछे क्या संदेश है? हमें यह जानने की जरूरत है कि यह हमला किसी भी तरह से अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की सुरक्षा पर प्रभाव डाल रहा है? और पाकिस्तान सरकार ने इस घटना को कैसे संभालने की योजना बनाई है?
 
क्या ईश्वर तो ऐसा नहीं कर रहा है? पाकिस्तान में इतना खुनी भड़काव, फिर भी लोग कहाँ जा रहे हैं? ये क्या एकता और शांति की बात है? पाकिस्तान की सरकार तो हमेशा कह देती है कि सब कुछ ठीक है, लेकिन जब सीमित मामलों में ऐसा होता है तो चिंता हो जाती है।
 
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