10 मिनट में डिलीवरी का प्रेशर, कमाई सिर्फ 700 रुपए: रोज 15-16 घंटे काम, स्विगी-जोमैटो-ब्लिंकिट के डिलीवरी पार्टनर हड़ताल पर

दिल्ली में डिलीवरी पार्टनर्स हड़ताल पर, ब्लिंकिट से 15 रुपये का ऑर्डर मिलने पर भी हाथ उठाना पड़ा। वीडियो देखकर सांसदों ने इसकी जानकारी ली।
 
वाह बात तो भी बहुत बड़ी! ये तो सरकार को हाल ही में कर दी गई नई शुल्क नीति पर गहरा प्रभाव डालने वाली बात है। 15 रुपये का ऑर्डर दिल्ली से भेजने पर भी ब्लिंकिट पर डिलीवरी पार्टनर्स अपनी हाथ उठाने पड़ते, तो यह तो किसी की समझ से भी नहीं चलेगी। क्या सरकार देख रही है? ये शुल्क नीति केवल पैसों की बात नहीं, लोगों की जरूरतों और आर्थिक स्थिति पर भी असर डाल रही है।
 
ये तो सरकार के लिए एक बड़ी समस्या है! दिल्ली में डिलीवरी पार्टनर्स ऐसी जुगतलियाँ कर रहे हैं कि ब्लिंकिट से ऑर्डर मिलने पर भी वे खुश नहीं हो सकते। यह तो लोगों की उम्मीदें कुचलने का एक तरीका है। क्या सरकार ने कभी सोचा है कि इतनी जटिलताएँ नीचे उतारने में मदद करेगी?
 
बड़ा बड़ा सवाल है यह, कि क्या सरकार दिल्ली में डिलीवरी पार्टनर्स की जिंदगी को समझती है? वे निजी सेक्टर के लोगों को तो सब ठीक है, लेकिन आम आदमी को तो इतना भी मुश्किल हो सकती है...

मुझे लगता है कि यह पार्टनर्स के बीच एक बड़ा मुद्दा है। उनकी जिंदगी को समझने के लिए सरकार को तैयार होना जरूरी है, फिर भी सरकार कुछ नहीं कर रही...

क्या यह सुनिश्चित करना है कि डिलीवरी पार्टनर्स को अच्छा वेतन मिले, ताकि वे अपन परिवार को अच्छी जिंदगी दे सकें? ...यह जरूरी है। अगर नहीं तो सरकार को जवाबदेह होना चाहिए। 😒
 
यह तो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि दिल्ली में डिलीवरी पार्टनर्स पर इतनी ज्यादा दबाव आ रहा है। 15 रुपये का ऑर्डर मिलने पर भी वे हाथ उठाने पड़ते हैं ? यह तो सामान्य लोगों की आर्थिक स्थिति को दर्शाता है कि हमारे देश में अभी भी बहुत ज्यादा गरीबी और असमानता है।

मुझे लगता है कि सरकार को इस मुद्दे पर ध्यान देने की जरूरत है। डिलीवरी पार्टनर्स को उनके काम के लिए उचित मुआवजा देने की जरूरत है। हमें अपने देश में आर्थिक सामानता और गरीबी मुक्ति के लिए लड़ने की जरूरत है
 
ये तो दिल्ली में डिलीवरी पार्टनर्स की बात है, हमेशा उनकी समस्याएं सुनाई देती हैं... 😐 लेकिन फिर भी, मुझे लगता है कि ये एक अच्छी चीज़ हो सकती है। अगर वे ऐसा हड़ताल कर रहे हैं तो इसका मतलब यह है कि वे अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं और उनके मुद्दे समझे जा रहे हैं।

मुझे लगता है कि हमें उनकी बात सुननी चाहिए और उनके साथ मिलकर समाधान निकालने की कोशिश करनी चाहिए। क्योंकि अगर हम एक दूसरे को समझते हैं और मिलकर काम करते हैं तो हमारी देश की स्थिति को भी बेहतर बना सकते हैं।

बस यही बात ध्यान में रखकर आइए... 🤝
 
अरे, ये तो बहुत गंभीर बात है डिलीवरी पार्टनर्स की, क्या वो अच्छा मुनाफा कम कर रहे थे? 15 रुपये सिर्फ एक छोटी चीज़ है, पर दिल्ली में इतने बड़े शहर में ऑर्डर करने में भी और लागत जुड़नी होगी। उनको लगता है कि वे अपने मुनाफे को बढ़ाने के लिए क्या कर सकते थे। किसानों और आम आदमियों पर पड़ता है यह बोझ, उनकी परेशानी बढ़ जाती है। 🤦‍♂️💸
 
न तो ये और न ही तो ऐसी बड़ी चीजें! प्रधानमंत्री जी को भी पता होना चाहिए, कि दिल्ली में डिलीवरी पार्टनर्स कितने परेशान हैं। उनके हाथों से एक रुपया भी खर्च होता है, तो फिर 15 रुपये के ऑर्डर पर भी हाथ उठाना पड़ता है। यह तो समझौता नहीं है, न तो मानवाधिकार। लोगों के जीवन को सुधारने की बात कोई करता रहता है, लेकिन स्थिति ऐसी है कि डिलीवरी पार्टनर्स को भी अपना काम नहीं मिल रहा। हमें इस पर ध्यान देना चाहिए, तो फिर देश की गरीबों के लिए कुछ सुधार कर सकें।
 
ये तो दिल्ली की बात है! डिलीवरी पार्टनर्स की हड़ताल जैसे तो हमने पहले भी देखा है, लेकिन यही नहीं है, अब यही डिलीवरी पार्टनर्स ब्लिंकिट से 15 रुपये का ऑर्डर मिलने पर भी हाथ उठाना पड़ रहे हैं! ये तो सरकार की ओर से दिए गए नियमों का उल्लंघन है ना, खासकर जब बात 15 रुपये से कम की हो। लेकिन अगर वीडियो देखकर सांसदों ने इसकी जानकारी ली, तो यह अच्छा है, हमें उम्मीद है कि जल्द ही इस मामले पर कुछ कदम उठाए जाएंगे।
 
मेरी खास बात तो यह है कि डिलीवरी पार्टनर्स हड़ताल पर जाने की बात मुझे थोड़ी अजीब लगी, चाहे वह 15 रुपये का ऑर्डर भी हो। लेकिन फिर सोचकर तो यह सच है कि वे लोग ज्यादा कम नहीं कर रहे थे, बस उनका काम अच्छी तरह से किसानों को दिलाने में थोड़ा समय लग रहा था। मैं समझ गया हूँ कि एक तरफ खेती करने वाले लोगों की जरूरत और वहां तक पहुँच के बीच की समस्या तो बड़ी से बड़ी है।
 
यह तो बहुत ही उदासीनता दिखाई देती है कि डिलीवरी पार्टनर्स ऐसी परिस्थितियों में भी इतनी हिंदुता से संघर्ष कर रहे हैं। 15 रुपये का ऑर्डर तो बस एक छोटी सी मात्रा, लेकिन जब वे इसे पाने के लिए इतनी मेहनत करते हैं और फिर भी इसके लिए न्यूनतम मजदूरी नहीं मिलती, तो यह कैसे सहना जा सकता है? इसका मतलब यह नहीं है कि वे अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं, बल्कि उनके अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं।
 
बिल्कुल तो यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि डिलीवरी पार्टनर्स इतनी मुश्किल में पड़ गए हैं। 15 रुपया सिर्फ ऑर्डर चालाने का था और ब्लिंकिट से भी नहीं मिला। ऐसी स्थिति में सांसदों ने यह वीडियो देखकर जानकारी ली। तो हमें उम्मीद है कि जल्द ही सरकार इस मामले पर ध्यान देगी और डिलीवरी पार्टनर्स को सही स्थिति देगी।

मुझे लगता है कि जिन्होंने भूख हड़ताल कर रहे थे, वे भी अपने अधिकारों की लड़ाई में सफल हो गए। लेकिन यह सारी चीजें जल्द ही सुलझ जाएं।
 
मजाक है यह डिलीवरी पार्टनर्स का, 15 रुपये का ऑर्डर लेने पर भी वे इतने तेज़ चलते हैं? 🤯 पहले चीजों में धैर्य रखें, फिर होड़ में पड़ना चाहिए। शायद उनको समझने की जरूरत है कि डिलीवरी नौकरी करने वाले लोग भी हैं, और उन्हें भी अपना बाज़ार जानते हुए काम करना चाहिए।
 
अरे, दिल्ली में डिलीवरी पार्टनर्स की हड़ताल के बारे में सुनकर मुझे बहुत परेशानी हो रही है 🤕। जब तक ये निर्दिष्ट नहीं किए गए, तब तक लोगों का क्या करना? 15 रुपये का ऑर्डर मिलने पर भी वे हाथ उठा रहे हैं... यह तो सोचकर भी कैसे समझाएं। ये देश के निर्माण में इतने बड़े निवेश किया गया, लेकिन अंत में क्या आया? केवल बेरोजगारी और अनिश्चितता। हमारे चयनकर्ताओं को भी यह जानने में परेशान करना चाहिए कि ये डिलीवरी पार्टनर्स कैसे जुटाए गए।
 
😒 ये तो बहुत बड़ा मुद्दा है... डिलीवरी पार्टनर्स को इतनी कम ब्याज दर पर पैसे देने का मतलब है वे अपना पैसा कमा नहीं पा रहे हैं... यार, हमें उनकी बात समझनी चाहिए, वे लोग सिर्फ अपना जीवन से तो नहीं जीना चाहते हैं? 🤔 और यह भी सच है कि अगर हम डिलीवरी पार्टनर्स को अधिक आय का मौका देंगे तो वे लोग अच्छी तरह से अपना काम करेंगे... ज्यादातर बार वे हस्तक्षेप नहीं करते, बस पैसे चाहते हैं... 🤑
 
मुझे ये बात तो बहुत गुस्सा कर देती है... क्या नहीं था यह डिलीवरी पार्टनर्स का काम, जिसे हम सब भोगते रहते हैं... 15 रुपये में ऑर्डर आना, लेकिन वो भी ब्लिंकिट से... और वाह! सांसदों ने वीडियो देखकर इसकी जानकारी ली, यह तो बहुत अच्छा है... कुछ सोचे, ज्यादा नहीं सोचे, बस थोड़ा खुले हुए मुस्काने से भी।

तो मुझे लगता है कि ये डिलीवरी पार्टनर्स को और बेहतर करना चाहिए... कहीं किसी भी नौकरी में ज्यादातर खुशी नहीं होती, बस कुछ जरूरते होती हैं...

कुछ कंपनियों की तरफ से यह जिम्मेदारी है तो कोई ठीक है, लेकिन ये भी तो बेहतर समझ में न आना चाहिए।
 
मैंने कल रात अपने पति को 15 रुपये का ऑर्डर दिलाया था, वह तो मुझे बताया कि ब्लिंकिट से डिलीवरी होगी और 15 रुपये में यह एक अच्छा ऑफर है। लेकिन जब वीडियो देखकर सांसदों ने इसकी जानकारी ली, तो मुझे लगा कि वे अपने पति के ऑर्डर से पूरी तरह से अनजान थे। मैंने उन्हें बताया कि ब्लिंकिट पर डिलीवरी होने पर भी हाथ उठाना पड़ता है, तो वे क्या कर सकते थे? 🤷‍♀️

लेकिन फिर मुझे लगा कि यह एक अच्छा अवसर है कि हमें अपने रिटेलर्स को दिल्ली में डिलीवरी पार्टनर्स के रूप में सुधारने का मौका मिलना चाहिए। क्योंकि अगर वे अच्छा ऑपरेशन चलाएंगे, तो हमें न केवल भुगतान का होना पड़ेगा, बल्कि हमें अपने ऑर्डर की स्थिति की जानकारी भी मिलनी चाहिए। 📦

मैंने अपने पति से कहा कि अगर वह फिर से ब्लिंकिट पर ऑर्डर करते हैं, तो हमें उसकी स्थिति की जानकारी लेनी चाहिए। और अगर वीडियो देखकर सांसदों ने इसकी जानकारी ली, तो यह एक अच्छा अवसर है कि हमें अपने रिटेलर्स को सुधारने का मौका मिले।
 
मेरे दोस्त! तुमने सुना है कि दिल्ली में डिलीवरी पार्टनर्स हड़ताल पर हैं? 🤯 यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन सच्चाई यह है कि वे अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। मुझे लगता है कि हमें उनकी बात सुननी चाहिए और उनके साथ सहानुभूति रखनी चाहिए। मैंने कई बार ऑनलाइन ऑर्डर दिया होता था, लेकिन जब भी तो पैसे की समस्या हो जाती थी। तो मुझे समझ आ रहा है कि वे इतनी परेशानी से गुजरने को मजबूर हैं। 🤷‍♂️
मैंने देखा है कि ब्लिंकिट जैसी वेबसाइटें नियमित रूप से 15 रुपये से कम का ऑर्डर मिलता है, लेकिन वह भी कभी-कभार ही होता है। तो डिलीवरी पार्टनर्स को अपने अधिकारों के बारे में जागरूकता देने की जरूरत है और हम उनके साथ सहयोग करें। 🤝
 
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