हाल ही में भारत के एक प्रमुख कॉलेज में हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया था, जिसमें उन्होंने इस कॉलेज को मान्यता देने के फैसले पर सवाल उठाए थे।
कॉलेज में सीटों के वितरण पर राष्ट्रवादी बजरंग दल ने सवाल उठाया है और उन्होंने हिंदू छात्रों के लिए आरक्षण की भी मांग की है। इसके अलावा, उन्होंने इस कॉलेज में हिंदू छात्रों को प्रमोट करने की मांग की थी।
लेकिन, यह बात स्वीकार करना होगी कि कॉलेज प्रशासन और सीएम उमर अब्दुल्ला ने इस फैसले पर कहा था कि यह नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के आधार पर की गई भर्ती प्रक्रिया है। लेकिन, 85% सीटें मुस्लिम बहुल यूनियन टेरिटरी के लिए आरक्षित थीं, जिससे मुस्लिम छात्रों की संख्या ज्यादा थी।
इन तीनों संगठनों ने अपनी पूरी एकजुटता दिखाई और इस कॉलेज को मान्यता देने के फैसले पर सवाल उठाए।
कॉलेज में सीटों के वितरण पर राष्ट्रवादी बजरंग दल ने सवाल उठाया है और उन्होंने हिंदू छात्रों के लिए आरक्षण की भी मांग की है। इसके अलावा, उन्होंने इस कॉलेज में हिंदू छात्रों को प्रमोट करने की मांग की थी।
लेकिन, यह बात स्वीकार करना होगी कि कॉलेज प्रशासन और सीएम उमर अब्दुल्ला ने इस फैसले पर कहा था कि यह नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के आधार पर की गई भर्ती प्रक्रिया है। लेकिन, 85% सीटें मुस्लिम बहुल यूनियन टेरिटरी के लिए आरक्षित थीं, जिससे मुस्लिम छात्रों की संख्या ज्यादा थी।
इन तीनों संगठनों ने अपनी पूरी एकजुटता दिखाई और इस कॉलेज को मान्यता देने के फैसले पर सवाल उठाए।