50 सीट में से 42 मुस्लिमों को मिलने के बाद इस कॉलेज की मान्यता हुई रद्द, हिंदू संगठनों ने किया था विरोध प्रदर्शन

हाल ही में भारत के एक प्रमुख कॉलेज में हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया था, जिसमें उन्होंने इस कॉलेज को मान्यता देने के फैसले पर सवाल उठाए थे।

कॉलेज में सीटों के वितरण पर राष्ट्रवादी बजरंग दल ने सवाल उठाया है और उन्होंने हिंदू छात्रों के लिए आरक्षण की भी मांग की है। इसके अलावा, उन्होंने इस कॉलेज में हिंदू छात्रों को प्रमोट करने की मांग की थी।

लेकिन, यह बात स्वीकार करना होगी कि कॉलेज प्रशासन और सीएम उमर अब्दुल्ला ने इस फैसले पर कहा था कि यह नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के आधार पर की गई भर्ती प्रक्रिया है। लेकिन, 85% सीटें मुस्लिम बहुल यूनियन टेरिटरी के लिए आरक्षित थीं, जिससे मुस्लिम छात्रों की संख्या ज्यादा थी।

इन तीनों संगठनों ने अपनी पूरी एकजुटता दिखाई और इस कॉलेज को मान्यता देने के फैसले पर सवाल उठाए।
 
कॉलेज में आरक्षण की बात करने की जरूरत नहीं है, सीटों के वितरण पर ध्यान देना चाहिए 🤔
 
अरे, ये कॉलेज में हिंदू संगठनों की बहुत ज्यादा एकाग्रता है। वे तो बस अपने छात्रों के हित में हैं लेकिन फिर भी उनके तरीके थोड़े असहज लग रहे हैं। 85% सीटें आरक्षित करना और सिर्फ हिंदू छात्रों को प्रमोट करना... तो क्या यही हमारा भविष्य है? 🤔

मुझे लगता है कि कॉलेज में सीटों के वितरण पर राष्ट्रवादी बजरंग दल ने सही सवाल उठाए हैं। लेकिन, एकदलीतता से इस जोठे हाथे की दूरी करने की जरूरत है। हमें अपने छात्रों को प्रमोट करने के लिए सिर्फ एक ही तरीके से नहीं देखना चाहिए। 📚

कॉलेज प्रशासन और सीएम उमर अब्दुल्ला ने नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के आधार पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की, तो यह सही है। लेकिन, हमें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि हर छात्र को समान अवसर मिले। 🤝
 
"नेताओं के हाथ में थोड़ी चाबी होती है, लेकिन उनके पास अपनी स्वयं की राजनीति होनी चाहिए।"
 
मुझे लगता है कि यह सब बातें थोड़ी जटिल हैं... 🤔 यार, मैंने भी अपने प्यारे बेटे के स्कूल में हुए एक्सप्रेस ट्रैक्ट पर सवाल उठाए थे। तो हमारा स्कूल प्रमोटिव टू पोस्टग्रेजी में अच्छा नहीं था। लेकिन फिर भी, वहां पर देश के सबसे अच्छे इंजीनियर्स और डॉक्टर्स पढ़ रहे थे।

मुझे लगता है कि ये संगठनों ने सही सवाल उठाए हैं, लेकिन उनके तरीके से नहीं... 🙅‍♂️ हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर व्यक्ति, न केवल हिंदू, मुस्लिम या किसी भी अन्य धर्म का, उसी पृष्ठभूमि से जाने वाले व्यक्तियों को समान अवसर देने की जरूरत है।

अब यह सवाल है कि कॉलेज प्रशासन और सरकार ने सही मायने में क्या कहा था या नहीं। मुझे लगता है कि हमें अपनी बातचीत सुधारनी चाहिए, ताकि लोग समझ सकें कि हम सब एक देश में रहते हैं और हर किसी को समान अवसर देने की जरूरत है।
 
मुझे लगता है कि यह सब बहुत ज्यादा बिगड़ गया है, तो? यार, मैंने सुना है कि कॉलेज में सीटों का वितरण कैसे होता है, लेकिन मुझे नहीं पता कि यहाँ 85% सीटें मुस्लिम बहुल यूनियन टेरिटरी के लिए आरक्षित हैं? ऐसे में तो क्या छात्रों का चयन नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) पर आधारित नहीं होता? और यार, मुझे लगता है कि यहाँ कॉलेज प्रशासन द्वारा लिए गए फैसले से पहले क्या चर्चा हुई थी?

और, तो यार, मैंने सुना है कि राष्ट्रवादी बजरंग दल ने आरक्षण की मांग की है, लेकिन मुझे लगता है कि यहाँ छात्रों की संख्या और प्रदर्शन कैसे होता है? तो यार, कॉलेज में जाने के लिए क्या सभी छात्रों को NEET पर आधारित चयन के रूप में तय करना पड़ता?

मुझे लगता है कि यह सब बहुत ज्यादा जटिल है, और मैं समझ नहीं पाया कि यहाँ कौन सी बातें मानी जा रही हैं और कौन सी नहीं। तो यार, अगर आपके पास अधिक जानकारी है, तो मुझे बताएं!
 
मुझे लगता है कि यह विरोध प्रदर्शन थोड़ा ज्यादा बढ़ गया है। क्या हमें ऐसी स्थिति बनाकर रखनी चाहिए जब छात्रों को अपने भविष्य के बारे में सोचते समय कई बार बाधा उत्पन्न कर देनी पड़ती है? 🤔

लेकिन, मैं यह कह सकता हूं कि राष्ट्रवादी बजरंग दल ने अपने प्रयासों से हमें सोचने पर मजबूर किया है। अगर हमारे देश में आर्थिक असमानता कम करना चाहते हैं तो हमें ऐसी पहलें लेनी पड़ सकती हैं। और शायद, शायद हमें हिंदू छात्रों के साथ उनके अधिकारों के बारे में बातचीत करनी चाहिए। 🤝

मुझे लगता है कि हमें इस पर और चर्चा करनी चाहिए, यह फैसला वाकई एक जटिल मुद्दा है।
 
मुझे लगता है कि यह सब बहुत अजीब है 🤔। पहले, तो हमारे पास हिंदू छात्रों की आरक्षण की बात कर रहे हैं, फिर मुस्लिम छात्रों की संख्या ज्यादा होने की बात कर रहे हैं। यह सब तो बहुत ही अजीब है। और अब, विरोध प्रदर्शन कर रहे हिंदू संगठनों ने कहा है कि हमारे पास यह देश हिंदू है, फिर भी मुस्लिम छात्रों की ज्यादा संख्या है। 🤷‍♂️ लेकिन, मुझे लगता है कि यह सब तो एक बहुत बड़ा विवाद बन सकता है।
 
अरे, यह सुनकर बहुत अजीब लग रहा है कि राष्ट्रवादी बजरंग दल ने सीटों के वितरण और आरक्षण मांग की। लेकिन, क्या हमने नहीं सोचा था कि ये सामाजिक मुद्दे तो बहुत जटिल हैं? 85% सीटें मुस्लिम बहुल यूनियन टेरिटरी के लिए आरक्षित होने से न केवल उन्हीं छात्रों को फायदा होगा, बल्कि यह हमारे देश की बहुसांस्कृतिक विविधता को भी बढ़ावा देगा। 🤔

और, यह बात समझ में नहीं आई कि उन्होंने कॉलेज प्रशासन और सीएम उमर अब्दुल्ला से क्या कहा था। क्या वे सचमुच नहीं जानते कि नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) पर आधारित भर्ती प्रक्रिया कैसे होती है? 🤷‍♂️
 
कॉलेज के निर्णय पर विरोध हो रहा है... लेकिन सोचो तो यहां 85% सीटें आरक्षित हैं... तो हमारे पास बाकी सीटों में से कौन कह सकता है?

बजरंग दल ने सवाल उठाए, लेकिन हमें अपने खुद के दरवाजे खोलने की जरूरत है। अगर हमारे देश में यहां तक कि एक छोटे से कॉलेज में भी आरक्षण और विशेष दर्जा क्यों नहीं?

हमें अपने बच्चों को अच्छा भविष्य देने की जरूरत है। लेकिन, हमें यह भी समझने की जरूरत है कि जो फैसले लिए गए हैं वे हमारे समाज के लिए सही हैं।
 
मुझे लगता है कि यह सब बड़ा गडबड़ हुआ 😕। पहले तो क्या समस्या थी कि सीटें वितरित नहीं हुईं? और फिर इन संगठनों ने जोर दालकर कहा कि हमारे लिए आरक्षण की जानी चाहिए। लेकिन, यह तो कॉलेज प्रशासन की बात है, जिसने नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के आधार पर भर्ती प्रक्रिया की थी। और फिर भी, 85% सीटें मुस्लिम बहुल यूनियन टेरिटरी के लिए आरक्षित हुईं। यह तो समझने की जरूरत है कि हर समुदाय को समान अवसर मिलना चाहिए।
 
बिल्कुल, यह बात सच है कि हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया था, लेकिन 85% सीटें मुस्लिम बहुल यूनियन टेरिटरी के लिए आरक्षित थीं, जिससे इस फैसले से मुस्लिम छात्रों को अधिक लाभ हुआ।
 
नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के आधार पर भर्ती प्रक्रिया होना अच्छा है तो ये 85% सीटें मुस्लिम बहुल यूनियन टेरिटरी के लिए आरक्षित करना ठीक नहीं है। यहाँ कॉलेज में मुस्लिम छात्रों की संख्या ज्यादी हो गई तो फिर भी उन्हें फायदा नहीं दिया गया। इससे कुछ लोगों ने हिंदू छात्रों को प्रमोट करने की मांग की है और 85% सीटें हिंदू छात्रों के लिए आरक्षित कराने का फैसला किया है।

कॉलेज प्रशासन को यह सोचना चाहिए कि यह तो एक निर्णय क्यों लिया गया जिससे कोई भी समूह परेशान नहीं हो।
 
मुझे लगता है कि यह सब कुछ बहुत ही जटिल है 🤔 और इसके पीछे कुछ बड़ा गड़बड़ हो सकता है। मैंने सुना है कि इस कॉलेज में कुछ छात्रों ने अपने परिवारों के बाहर भी हिंदू राष्ट्रवादी आंदोलनों में शामिल होने के लिए तैयार हो गए थे। यह तो बहुत ही चिंताजनक है। क्या यह सचमुच एक छात्र संगठन की समस्या नहीं है, बल्कि कुछ बड़े पैमाने पर हिंदू राष्ट्रवाद के खिलाफ लड़ाई है?
 
मेरा विचार है कि यह सब बहुत अजीब है 🤔, तीनों संगठन एक साथ आ गए और ऐसा माहौल बनाया, जैसे अगर सभी छात्र एक ही पंक्ति में खड़े हों। लेकिन मेरी समझ में वहां पर आरक्षण की बात नहीं करनी चाहिए थी, ज्यादा शिक्षा विकल्प हो तो हमेशा सबके लिए फायदेमंद होगा, न कि एक ही समुदाय के। और ऐसा ही देखने को मिल रहा है कि अब कॉलेज में सीटों का वितरण पर राजनीति शुरू हो गई है।
 
Wow 😮, यह बहुत ही रोचक बात है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रवादी बजरंग दल ने कहा था कि हमारी मांग हिंदू छात्रों को आरक्षण देने और उनकी संख्या बढ़ाने की है। लेकिन, यह सवाल उठता है कि क्या हमारे पास यह संसाधनें हैं कि हम इस तरह की मांग कर सकें। Interesting 🤔
 
भारत में हिंदू संगठनों का यह विरोध, तो तो समझने की कोशिश करूँगा, लेकिन लगता है कि ये सभी संगठन एक साथ आ गए हैं ताकि उन्हें अपनी बात रखने में कोई बाधा न हो।

कॉलेज में सीटों के वितरण पर सवाल उठाना तो ठीक है, लेकिन आरक्षण की मांग करना भी सही नहीं है। यहां छात्रों की योग्यता और प्रदर्शन पर ही ध्यान देना चाहिए, न कि उनके धर्म या जाति पर।
 
🤔 मुझे लगता है कि यह एक जटिल समस्या है। इन संगठनों ने अपनी चिंताओं को व्यक्त करने का बेहतर तरीका नहीं ढूंढ पाए। अगर उन्हें अपने दखल देने की जरूरत है, तो शायद वे इस तरह से समस्या का समाधान ढूंढना चाहिए।

कॉलेज प्रशासन और सीएम उमर अब्दुल्ला ने इस फैसले पर बहुत अच्छा तरीका सोचा। अगर 85% सीटें मुस्लिम बहुल यूनियन टेरिटरी के लिए आरक्षित थीं, तो यह एक अच्छा निर्णय हो सकता है।

लेकिन, मुझे लगता है कि इन संगठनों को अपनी चिंताओं को समझाने के लिए और भी बेहतर तरीका ढूंढना चाहिए। 🤝
 
यह तो बहुत ही अजीब बात है 🤔 यह विरोध प्रदर्शन सुनकर लगता है कि इन संगठनों को कॉलेज में आरक्षण और भेदभाव की बात पर गर्व हो रहा है। लेकिन, हमें याद रखना होगा कि कॉलेज में भर्ती प्रक्रिया नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के आधार पर होनी चाहिए, तो फिर यह सवाल उठाना क्यों? 🤷‍♂️

और, यह 85% सीटें मुस्लिम बहुल यूनियन टेरिट्री के लिए आरक्षित होना, तो इससे हमें यह पता चलता है कि कॉलेज में भी आर्थिक और सांस्कृतिक आधार पर छात्रों को प्राथमिकता देने की बात कही जा रही है। लेकिन, इसका अर्थ यह नहीं होना चाहिए कि अन्य समूहों को छोड़कर। 🤦‍♂️
 
यह बहुत ही गंभीर समस्या है 🤔। अगर हमारे देश में आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर समूहों को भी प्राथमिकता नहीं दी जाती, तो हमारी राजनीति और समाज कैसे चलेगा। यह बहुत ही चिंताजनक है कि कॉलेज में हिंदू छात्रों को आरक्षण देने की बात कही जा रही है। लेकिन, अगर हमारे देश में सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर समूहों को भी प्राथमिकता नहीं दी जाती, तो हमारी राजनीति और समाज कैसे चलेगा। 🤷‍♂️
 
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