6 महीने बाद भी पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ ‘बेघर’: अफसर बोले- बंगला रेनोवेट करा रहे, मंत्री ने कहा- अभी बंगला अलॉट नहीं, वे पसंद तो करें

अंतिम उपराष्ट्रपति पद छोड़कर दिल्ली में निजी फार्म हाउस में शिफ्ट होने पर सवाल उठता रहा, क्योंकि उनके लिए सरकारी बंगला मिलने में देर हो रही थी। 21 जुलाई 2025 को उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने वाले जगदीप धनखड़ ने अपना सरकारी घर छोड़ने के बाद हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री में एप्लिकेशन भेजी थी, लेकिन अब तक उसे कोई जवाब नहीं मिला है।
 
🤔 एक आदमी को दूसरे आदमी से प्यार करना पड़ता है क्योंकि यह सिर्फ दोस्ती नहीं होती है, लेकिन अगर वह दोस्ती होती तो हमें एक-दूसरे को पसंद करना पड़ता है।
 
क्या ऐसा लगता है कि सरकारी बंगलों में रहने वाले लोग अपनी जिंदगी को फेरने में कितना सहज हैं? जगदीप धनखड़ को भी ऐसा ही लगा था क्या! उनके लिए सरकारी बंगला नहीं मिल रहा तो उन्होंने निजी फार्म हाउस में रहने का फैसला किया, और अभी तक उन्हें अपनी आवाज़ सुनाने का मौका नहीं मिल पाया है... यह देखकर शर्मिंदगी होती है!
 
अरे, यह तो मालिश करने वालों से नहीं दूर है! जब तक सरकारी बंगला मिलने में मुश्किल नहीं होती, तब तक राजनेता अपना घर छोड़कर निजी फार्म में शिफ्ट हो जाते हैं। यह तो क्या खेल है? उनकी मर्ज़ी से बिगड़ाने वाले तो हैं या सरकार के लिए खिलाड़ी? 😏

और इतना भी कहना चाहता हूँ, कि जब तक निजी सector में पैसे कमाने के तरीके नहीं होते, तब तक राजनेता अपना घर छोड़कर किसी फार्म में रहने का मजाक कर रहे हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि जिंदगी में हर चीज़ का एक नाम होता है, और इस मामले में निजी फार्म का नाम ही सबसे अच्छा हो सकता है! 😄
 
ज़रूर, देखिए मैंने अपने बड़े भाई को दिल्ली की मॉल में फंसाया था, जब वह अपनी बीमार पत्नी को अस्पताल लेने जा रहे थे। उस समय उनके पास एक फोन नहीं था। तभी मेरी बहन ने गाड़ी चलाकर उन्हें अस्पताल पहुंचाया। उसकी देखभाल में पड़ गए हम, तब से मुझे समझ आया कि सरकारी बंगलों में से निकास होने पर भी पूरे जीवन में मुश्किलें आ सकती हैं।
 
जागरूकता बढ़ाने से हमारे देश के भविष्य को सुधारने में मदद मिलती है... लेकिन यह तो सरकार द्वारा निवास स्थान देने में इतनी देर लगती है! जगदीप धनखड़ के लिए यह एक बड़ा सवाल है, वे भी जानते होंगे कि समय बहुत महत्वपूर्ण है।
 
भाई, यह तो बहुत अजीब है कि सरकारी बंगले में रहने वाले किसी नेता को अपना घर छोड़ने पर इतनी देर लगती है, और फिर भी कोई जवाब नहीं मिलता! 😕 शायद हम सबने अपने अधिकारों की बात भूल गई हैं। यह तो सामाजिक न्याय और समानता का एक बड़ा उदाहरण है! 🙌 हमें जरूर इस मुद्दे पर जागरूकता बढ़ानी चाहिए, ताकि सरकार भी ऐसे मामलों में तेजी ला सके।
 
बिल्कुल सही है कि जगदीप धनखड़ जी को अपने सरकारी घर से निकलने के बाद उन्होंने एप्लिकेशन भरा था, लेकिन अभी तक सरकार को जवाब देने में कहीं भी वंचित नहीं हुआ। यह बहुत अच्छा निर्णय है कि वे अपनी सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए निजी फार्म हाउस में शिफ्ट हो गए थे, लेकिन जब तक सरकार उन्हें जवाब नहीं देती, तब तक उनकी भविष्यवाणियों पर विश्वास करना चुनौतीपूर्ण रहेगा।
 
🤔 यह तो बहुत अजीब है... उपराष्ट्रपति पद छोड़ने वाले जगदीप धनखड़ ने सरकारी घर से जितनी देर पहले अपने निजी फार्म में स्थानांतरण का अनुरोध किया था, आज तक जब्त नहीं हुआ। तो क्या यह दृश्य मंत्रालय की लापरवाही या बस एक चाल है? 🤷‍♂️ किसी भी तरह से सरकारी घर छोड़ने के बाद इतनी जल्दी निजी जगह शिफ्ट करना आम तौर पर नहीं होता, लेकिन यहां यह दृश्य बहुत ही अजीब है।
 
ये तो सरकारी सीट खाली करने के बाद भी देर से जवाब देती है 🤔। क्यों निजी फार्म हाउस में छिपने का जरिया? 🏠
 
क्या सचमुच सरकार को ऐसे मायने नहीं देती? जगदीप धनखड़ जी ने तो अपना घर छोड़ने के बाद हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री में एप्लिकेशन भेजी थी, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया। यह क्यों? क्या वे उनकी आवश्यकताओं पर ध्यान देने को तैयार नहीं हैं?
 
जगदीप धनखड़ जी को उनकी योजना बनाने के लिए बहुत समय लग रहा है तो फिर क्यों खुश नहीं हो सकते? सरकारी बंगला मिलने में देर होने से नाराजगी होना ठीक है, लेकिन उनकी परिस्थितियों को समझना भी जरूरी है। दिल्ली में फार्म हाउस रहना अच्छा विकल्प हो सकता है, लेकिन सरकारी बंगले में रहने से उन्हें बहुत आराम मिलता होगा। शायद उनकी योजनाओं को समझने पर हम दूसरों को भी सही सलाह दे सकते हैं 🤗
 
अरे, यह तो बहुत अजीब लग रहा है... जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद भी सरकारी घर से शिफ्ट होने के लिए एप्लिकेशन देने में इतनी देर क्यों ले रहे हैं? यह तो एक बड़ा सवाल है... क्या उन्हें लगता है कि उनकी आवाज़ सुनने वाले यहां तक नहीं हैं?
 
क्या हुआ देश को यह देखने को मिला कि हमारे पास उपराष्ट्रपति पद छोड़कर भी सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाने का मौका नहीं मिलता 🤔। जगदीप धनखड़ जी ने एक्सीडेंटली सरकारी बंगला छोड़ने के बाद हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री में एप्लिकेशन भेजी, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। यह सोचता हूँ कि शायद उनको पता भी नहीं चल पाया होगा कि हमारे पास एक नियम है जिसमें सरकारी सुविधाएं तुरंत उपलब्ध होनी चाहिए, लेकिन लगता है कि इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। मुझे लगता है कि अगर हमारे नेताओं को सामान्य आदमी की जरूरतें समझनी चाहिए थी, तो शायद यह मामला टाला जाता।
 
मैंने सोचा कि अगर जगदीप धनखड़ जी निजी फार्म हाउस में रहना चाहते हैं तो वे सरकारी बंगला छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं, लेकिन फिर मुझे लगा कि फार्म हाउस में रहने से उनकी सुरक्षा और आराम बढ़ सकता है। और फिर मैंने सोचा अगर सरकारी बंगला मिलने में देर हो रही थी, तो शायद जगदीप जी को अपना निवास स्थान बदलने की जरूरत नहीं है, लेकिन फिर मुझे लगा कि भारत में राजनेताओं को अपने घरों की सुविधा के बारे में पूरी तरह से सोचना चाहिए। 🤔
 
अरे, ये तो बहुत अजीब बात है! जगरदीप धनखड़ जी निजी फार्म हाउस में स्थानांतरित होने पर देर से एप्लिकेशन भेजना क्यों नहीं? सरकारी घर छोड़ने के बाद तो एकदम बदलाव करना चाहिए, लेकिन अब तक मिली जवाब कोई नहीं। यह कैसे लगता है कि विदेशी दौलत में फंस जाएंगे!
 
जो लोग दिल्ली के निजी घरों में स्थानांतरित होने पर सवाल उठाते हैं उन्हें पता नहीं है कि सरकारी जिंदगी कितनी भ्रमर की तरह होती है। 🐜🏠

जगदीप धनखड़ के लिए यह एक बड़ी समस्या है, लेकिन मुझे लगता है कि उनके पास अपने फैसले से पहले सोचकर कुछ नहीं छोड़ा गया। जो लोग सरकारी बंगले में रहते हैं उन्हें यही सवाल देखना पड़ता है, अगर वे घर छोड़ देते हैं तो उनकी जगह कौन लेगा? 🤔🏙️

मुझे लगता है कि सरकारी जिंदगी में सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि लोग अपने घरों से दूर रहते हैं और अपने घरों को छोड़कर अपने खिलाफ सवाल उठाते हैं।
 
मुझे लगता है कि जगदीप धनखड़ जी को ऐसी स्थिति में रखना जरूरी नहीं होता। उनके लिए सरकारी बंगला मिलने में इतनी देर लेना दर्दनाक हो रहा है। मुझे लगता है कि उनकी पार्टी भी उन्हें इस स्थिति में रखने वाली नीतियों पर सवाल उठाना चाहिए।
 
ओह दुखदी, जागदीप धनखड़ वाले पूरे बूढ़ापा हो गए। ऐसे में हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री से कोई जवाब नहीं मिलना बिल्कुल सही नहीं है 🤔। उन्होंने बहुत बड़ी सेवाएं दी हैं और अब उनको यह सहारा चाहिए।
 
अरे, यह तो बहुत अजीब है... जागदीप धनखड़ जी ने उपराष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद भी अपना सरकारी घर छोड़ने से पहले हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री में एप्लिकेशन जमा नहीं कर पाये? यह तो उनके लिए बहुत परेशानी लग रही होगी, क्योंकि उनके लिए सरकारी बंगला देने में अभी भी देर होने वाली है। मुझे लगता है कि उनको अपने नए निवास स्थान की जानकारी जल्दी मिल जाएगी, और वह अपने घर छोड़ने के बाद शांतिपूर्ण तरीके से बस्तियों में रहने लग जाएंगे।
 
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