'अगर भारत ने चिनाब-झेलम पर कोई काम शुरू किया तो...', सिंधु समझौता रद्द होने के बाद बौखलाया PAK

भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि पर घेराव फिराने की बात मुझे थोड़ी अजीब लगी, समझ नहीं आ रही की दोनों देश एक-दूसरे को क्या बता रहे हैं। पाकिस्तान ने कहा है कि यह सिंधु जल संधि एक बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता बना हुआ है, लेकिन मुझे लगता है कि इसका अर्थ यह नहीं हो सकता है कि अगर हम चिनाब-झेलम पर कोई विकास कार्य शुरू करें तो उसके बाद सिंधु जल संधि समाप्त हो जाएगी।

मुझे लगता है कि पाकिस्तान की यह बात एक राजनीतिक खिलवाड़ है, वह भारत को धमकाने की कोशिश कर रहा है। अगर हम चिनाब-झेलम पर कोई विकास कार्य शुरू करें तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि हम सिंधु जल संधि का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि हम अपने देश की जरूरतों को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।

मुझे लगता है कि भारत और पाकिस्तान दोनों ही सिंधु जल संधि को समझने में असफल हैं, और इसका परिणाम हमारे देश के लिए हानिकारक हो सकता है।
 
बात करते हैं तो पाकिस्तान को यह क्या काम करना है...? पहले उन्हें अपने घर में साफ-सफाई नहीं कर पाया और अब विकास परियोजनाओं को भी रोकने की कोशिश कर रहे हैं 🤦‍♂️। चिनाब-झेलम पर कोई काम शुरू करने से पहले उन्हें यह तय करना चाहिए कि वे अपने देश में सबसे ज्यादा जरूरत भरने वाली परियोजनाओं पर ध्यान दें। इसके अलावा, अगर पाकिस्तान को लगता है कि भारत की कोई विकास गतिविधि उसके साथ राजनीतिक और राजनयिक स्तर पर उठेगी, तो उन्हें अपने सरकार में ऐसे लोगों को तैयार करना चाहिए जो इस तरह के मुद्दों पर समझदारी दिखाएं। 🤝
 
अगर चिनाब-झेलम पर कुछ विकास कार्य शुरू हो जाते तो... लोगों को पता चल जाएगा कि पाकिस्तान सच में कितना दृढ़ है अपनी राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए। तो फिर भारत ने सोचा था कि वह इस बात पर ध्यान खींचेगा? विकास कार्यों में पाकिस्तान इतना रुचि रखती है या नहीं? 🤔

तो अब चिनाब-झेलम पर कोई भी काम शुरू होता तो लोग सोच सकते हैं कि यह एक खिलौना दिखने वाला खेल है। पाकिस्तान इतना बड़ा है और उसकी बातें इतनी गंभीर हैं कि हमें उनकी परवाह करनी चाहिए। लेकिन अगर भारत ने पहले से ही अपना मामला तैयार कर लिया होता, तो इसका मतलब यह नहीं है कि पाकिस्तान पर दबाव डालकर हमें विकास कार्य शुरू करने की अनुमति दिलाई जाए। 📈

कोई भी ऐसा निर्णय सोच सकता है कि अगर हमें अपने मामले तैयार कर लेना है, तो फिर चिंता नहीं होनी चाहिए। पाकिस्तान की राजनीतिक गतिविधियों पर हमें ध्यान देना चाहिए, लेकिन इसके लिए हमें अपने मामले सुनिश्चित करने की जरूरत नहीं है। 📊
 
नदियों को समझने की जरूरत नहीं है तो लोग इंसाफ निकलेंगे। कभी-कभार ये नदियाँ बहुत दूर-दूर तक चलती हैं और पाकिस्तान में भी बहुत सा पानी लगता है, लेकिन फिर भी वहां बहुत गरीबी का दर्जा है। तो बिल्कुल हां, अगर भारत ने चिनाब-झेलम पर कोई काम शुरू किया, तो पाकिस्तान में नौकरी और रोजगार के लिए लोगों की दिलचस्पी बढ़ जाएगी।
 
अरे, यह तो बहुत ही खतरनाक बात है पाकिस्तान का। वह हमारी चिनाब-झेलम पर विकास कार्यों को रोकने की कोशिश कर रहा है। लेकिन मुझे लगता है कि हमें अपनी नदियों पर कब्जा बनाए रखने के लिए साहस और जोरदार तरीके से लड़ने की जरूरत है। अगर पाकिस्तान इस तरह की बातें करता रहेगा तो हमें उसके खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत है 🚨
 
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