भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि पर घेराव फिराने की बात मुझे थोड़ी अजीब लगी, समझ नहीं आ रही की दोनों देश एक-दूसरे को क्या बता रहे हैं। पाकिस्तान ने कहा है कि यह सिंधु जल संधि एक बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता बना हुआ है, लेकिन मुझे लगता है कि इसका अर्थ यह नहीं हो सकता है कि अगर हम चिनाब-झेलम पर कोई विकास कार्य शुरू करें तो उसके बाद सिंधु जल संधि समाप्त हो जाएगी।
मुझे लगता है कि पाकिस्तान की यह बात एक राजनीतिक खिलवाड़ है, वह भारत को धमकाने की कोशिश कर रहा है। अगर हम चिनाब-झेलम पर कोई विकास कार्य शुरू करें तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि हम सिंधु जल संधि का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि हम अपने देश की जरूरतों को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।
मुझे लगता है कि भारत और पाकिस्तान दोनों ही सिंधु जल संधि को समझने में असफल हैं, और इसका परिणाम हमारे देश के लिए हानिकारक हो सकता है।
मुझे लगता है कि पाकिस्तान की यह बात एक राजनीतिक खिलवाड़ है, वह भारत को धमकाने की कोशिश कर रहा है। अगर हम चिनाब-झेलम पर कोई विकास कार्य शुरू करें तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि हम सिंधु जल संधि का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि हम अपने देश की जरूरतों को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।
मुझे लगता है कि भारत और पाकिस्तान दोनों ही सिंधु जल संधि को समझने में असफल हैं, और इसका परिणाम हमारे देश के लिए हानिकारक हो सकता है।