'अगर भारत ने चिनाब-झेलम पर कोई काम शुरू किया तो...', सिंधु समझौता रद्द होने के बाद बौखलाया PAK

पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि पर घेराव फिराया, भारत को चिनाब-झेलम पर विकास कार्यों की प्रतीक्षा में रखा।
सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) के कथित उल्लंघन के आरोप में पाकिस्तान ने कहा है कि वह पश्चिमी नदियों पर भारत की किसी भी विकास गतिविधि को उसके साथ राजनीतिक और राजनयिक स्तर पर उठाएगा।
पाकिस्तान विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने बताया कि आईडब्ल्यूटी एक बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता बना हुआ है और संधि को रोकने का कोई प्रावधान नहीं है।
अगर भारत ने चिनाब-झेलम पर कोई काम शुरू किया तो...
पाकिस्तान ने गुरुवार (8 जनवरी 2026) को कहा कि वह सिंधु जल संधि का कथित उल्लंघन करके पश्चिमी नदियों पर संचालित भारत की किसी भी विकास गतिविधि को उसके साथ राजनीतिक और राजनयिक स्तर पर उठाएगा।
चिनाब, झेलम और नीलम नदी पर बनी कोई भी परियोजना आईडब्ल्यूटी के तहत जांच के दायरे में आती है। अगर झेलम और नीलम में कुछ विकास कार्य होते हैं तो हम इसे भारत के साथ, सिंधु आयुक्त के स्तर पर उठाएंगे।
हम इसे भारत के साथ राजनीतिक/राजनयिक स्तर पर और प्रासंगिक अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उठा सकते हैं।
 
चिनाब-झेलम पर काम करने से पहले हमें समझना होता है कि सिंधु जल संधि क्या है और इसका महत्व क्या है। यह समझना भी जरूरी है कि पाकिस्तान ने संदेह व्यक्त किया है और अब भारत को चिनाब-झेलम पर विकास कार्यों की इच्छा में रुकना पड़ेगा। मेरी राय में, हमें अपने आर्थिक विकास के लिए स्थानीय और स्वदेशी स्रोतों पर ध्यान देना चाहिए, न कि सिंधु जल संधि पर अकेले निर्भर रहना।
 
नदियों को ध्यान में रखें, कोई भी नदी दूसरी की बराबर नहीं 🌊। चिनाब और झेलम जैसी बड़ी नदियों पर काम करने से पहले हमें पाकिस्तान के साथ समझौता करना चाहिए, न कि उनके बिल्कुल विरोध में 😕। अगर हम चिनाब-झेलम पर कोई काम शुरू कर देते हैं तो इससे पाकिस्तान की भावनाओं को आहत नहीं करना चाहिए, उनके साथ समझौता करना बेहतर होगा। हमें अपने आप को अच्छी तरह से समझना चाहिए और अपने पड़ोसियों के साथ मिलकर काम करने की जरूरत है।
 
इस बात तो बहुत जरूरी है कि हम सिंधु जल संधि का उल्लंघन कैसे समझें, लेकिन जो भी कहें वो पाकिस्तान ने अच्छी तरह से इशारे दिए हैं। अगर विकास कार्य शुरू कर दिया तो... तो इसका मतलब यह है कि हमें इस बात पर और भी जागरूक रहना होगा। 🌊
 
मुझे याद आ गया है जब मैं बचपन में बीता था और मेरे दादाजी ने हमें सिंधु जल संधि के बारे में बताया था। तो यह सुनकर अच्छा लगा कि वास्तविकता कितनी ही जटिल है। लेकिन मैं सोचता हूँ, अगर चिनाब-झेलम पर कोई विकास कार्य शुरू कर दिया जाए तो यह तो पाकिस्तान के लिए एक बड़ा मुद्दा बन सकता है, लेकिन हमें पहले सिंधु जल संधि की समस्याओं पर गहराई से विचार करना चाहिए। 🤔

और बात करते हैं सिंधु जल संधि, लगता है यह तो एक बड़ा मुद्दा बन गया है। मुझे याद है जब मैं छोटा था, और हमारी पूर्वी दिल्ली के लोग उस समय कितने भागदौड़ कर रहे थे। वाकई इस बात पर कोई सोचना चाहिए।
 
ਦੇਖ ਰਿਹਾ ਹੈ ਕਿ ਪਾਕਿਸਤਾਨ ਵਾਲੀ ਬੁਰੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਅੱਜ ਇਹ ਹੈ ਕਿ ਮੇਰੇ ਦੇਸ ਨੂੰ ਚਿਨਾਬ-ਝੇਲਮ 'ਤੇ ਵਿਕਾਸ ਕਾਰਜਾਂ ਲਈ ਰੋਕ ਦਿੱਤਾ ਜਾਵੇ। ਪਾਕਿਸਤਾਨ ਕਹਿ ਰਿਹਾ ਹੈ ਕਿ ਉਹ ਬਚਪਨ ਦੀ ਦੋਸ਼ੀ ਨਾਗਰਿਕ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਵਧੇਰੇ ਜਾਣ ਵਾਲੀ ਹਸਪਤਾਲ 'ਚ ਭਾਗੀਦਾਰ ਬਣੀ ਖੇਡ ਵਿੱਚ ਆਪਣੀ ਕੁਝ ਨਿੱਜੀ ਘਟਨਾ 'ਤੇ ਮੇਰੇ ਦੇਸ ਦਾ ਧਿਆਨ ਖਿੱਚਾ ਹੋਵੇਗਾ।
 
बड़े बड़े! पाकिस्तान ने फिर से सिंधु जल संधि को धमकी दे दी। ताहिर अंद्राबी के शब्दों में भारत पर दबाव रखने वाला यह बयान कितना अच्छा लग रहा है। चिनाब, झेलम और नीलम नदियों पर कोई परियोजना शुरू करने से पहले इस बात की ज्यादा जरूरत नहीं है कि पाकिस्तान हमें धमकाने की कोशिश कर रहा है।
मुझे लगता है कि भारत को अपनी नदियों पर काम करने के लिए सुरक्षित महसूस करना चाहिए। अगर पाकिस्तान इतना खफा है, तो फिर वह शायद अपनी खुद की नदियों में नहीं लगातार पानी डाल रहा था।
 
भाग्यudas! यह तो बहुत ही बुरा न्याय है कि पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि का उल्लंघन करके अब हमारी नदियों पर विकास कार्य शुरू करने की उम्मीदों को फाड़ दिया है। मैं तो लंदन में एक पुरानी पुस्तकालय में बैठकर सोच रहा था कि कैसे हमने इतनी नदियाँ बनाकर अपने जीवन को अच्छा बनाया है, और फिर भारत-पाकिस्तान के बीच ऐसी बातें हों जो हमारे पास जीने का मौका न दें। लेकिन लगता है अब कुछ तय नहीं कर सकते, सभी नदियाँ चोरी हो गई हैं! 🤕💧
 
पाकिस्तान ने फिर से सिंधु जल संधि को घेर लिया है! 😕 तो हमें यह देखने की जरूरत नहीं कि वह इधर-उधर पर क्या बोलता है, हम अपने विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। चिनाब और झेलम पर सुधार करने के लिए हमें पाकिस्तान की राजनीति से बाहर रहना चाहिए। 🙅‍♂️
 
अगर चिनाब-झेलम पर विकास कार्य शुरू करने की बात भारत देख रहा है तो उसका मतलब यह नहीं होता कि वह अपने पास से गुजरने वाली नदियों की देखभाल नहीं करेगा। कभी-कभी हमें इस बात पर विचार करना चाहिए कि जब हमारे पास जो चीजें हैं वे किसी और की जरूरत में भी उपयोगी हो सकती हैं। अगर हम अपने आसपास की नदियों की सेहत पर ध्यान नहीं देते तो उसका मतलब यह होता है कि हमारी नीतियां सही नहीं हैं।
 
पाकिस्तान का यह दावा करना बिल्कुल सही नहीं है कि अगर हम चिनाब-झेलम पर कोई काम शुरू करेंगे तो उनके साथ प्रासंगिक अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जाने की जरूरत नहीं है। वे बस अपने दावों को बढ़ा-चढ़ाकर और सिंधु जल संधि पर घेराव फिराकर खुद को बदनाम कर रहे हैं। हमें यह समझना चाहिए कि सिंधु जल संधि का उल्लंघन करना बिल्कुल भी सही नहीं है, लेकिन पाकिस्तान के दावों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
क्या हमें वास्तव में अपने पड़ोसी से डरना चाहिए और उनकी हर बात माननी चाहिए? यह सवाल जरूर है, अगर हम अपने पड़ोसी को सही-सही राजनीति खेलने का अवसर देते हैं तो वे लोग हमें कभी भी समझ नहीं पाएंगे।
 
क्या यह सच में पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि पर घेराव फिराया? मुझे लगता है कि अगर भारत चिनाब-झेलम पर विकास कार्य शुरू करेगा, तो इसे कैसे हल होगा? पहले से यह समझना जरूरी है कि आईडब्ल्यूटी क्या है और इसका उद्देश्य क्या है। लेकिन अगर पाकिस्तान वास्तव में चिनाब-झेलम पर कोई परियोजना शुरू करने को तैयार नहीं है, तो यह एक बड़ा मुद्दा है। क्या हमें इसके बारे में और जानने की जरूरत है? 🤔
 
मेरे दोस्त, यह बात बहुत बड़ी समझदारी है कि हमें अपने पड़ोसियों के काम में हाथ डालने से पहले सोचना चाहिए। पाकिस्तान ने भारत को सिंधु जल संधि के उल्लंघन के आरोप लगाए, लेकिन उन्होंने यह भी बताया कि अगर हम उनके साथ विकास कार्य करेंगे, तो वे इससे खुश होंगे। यह एक बड़ा सबक है कि हमें अपने पड़ोसियों की जरूरतों को समझना चाहिए और उन्हें भागीदार बनाने का प्रयास करना चाहिए, न कि उनके खिलाफ लड़ना।
 
नदियों की लड़ाई तो हमेशा भारत-पाकिस्तान के बीच एक बड़ी समस्या रही है... 😕 पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि पर घेराव फिराया और भारत को चिनाब-झेलम पर विकास कार्यों की प्रतीक्षा में रखा। यह तो एक बड़ा खतरा है... भारत को अपनी नदियों की सुरक्षा के लिए कुछ करना होगा।

क्या भारत ने अपनी नदियों की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान से माफ़ी नहीं मांगी? 😒 पाकिस्तान विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा है कि आईडब्ल्यूटी एक बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता बना हुआ है, लेकिन यह तो सच नहीं है। भारत को अपनी नदियों की सुरक्षा के लिए कुछ करना होगा।

कोई देश पाकिस्तान जैसी चीजें कर सकता है न? 🤔
 
बड़ा चिंता का विषय है यह। सिंधु जल संधि जैसे महत्वपूर्ण समझौते पर ध्यान न देने से क्या फायदा? पाकिस्तान की बातें सुनकर लगता है कि वह केवल अपने हितों की रक्षा कर रहा है, लेकिन यहां भारत को भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। चिंाब-झेलम पर विकास कार्यों को निर्धारित करने में समय लगना, यह दिलचस्प है कि पाकिस्तान कैसे इस पर ध्यान देगा।
 
जल संधि में फंस गया हमारा देश 🌊 निकलना चाहिए सोचना चाहिए। लेकिन यह तो पाकिस्तान की राजनीतिक खेल है, हमें ध्यान में रखना होगा। अगर भारत चीनामार विकास पर फिरे तो जल संधि का उल्लंघन कह दूंगा 🤔 और इस पर भारत अपने देश की बात करेगा।

आजकल पाकिस्तान ऐसी बातें करता है जैसे वह हमारे साथ लड़ रहा है, लेकिन यह तो सब राजनीति है। हमें सोच-समझकर आगे बढ़ना होगा, जल संधि को लेकर भारत की बात कहें और देश के विकास पर ध्यान केंद्रित करें। 🙏

चिनाब-झेलम पर कोई भी परियोजना हमारे देश के लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए हमें उस पर ध्यान देना होगा। और अगर पाकिस्तान जल संधि का उल्लंघन करता है तो हम उस पर राजनीतिक और राजनयिक स्तर पर कहीं भी जाएंगे। 🗣️
 
अरे, यह तो बहुत ही दिलचस्प है कि पाकिस्तान ने चिनाब-झेलम पर काम करने की इच्छा नहीं रखने के लिए एक बेहतरीन तरीका ढूंढ लिया है 🤣। जैसे कि अगर भारत कोई काम शुरू करे तो पाकिस्तान हमेशा उनकी नींद उड़ा देगा। यह तो बहुत ही मजेदार है। और ताहिर अंद्राबी जी ने बात की कि आईडब्ल्यूटी एक बाध्यकारी समझौता है, लेकिन यह तो पाकिस्तान ने पहले से ही अपने आप को इसे 'कथित उल्लंघन' कहकर बचा लिया है 😂
 
बिल्कुल सही किया, भारत को चिनाब-झेलम पर विकास कार्य शुरू करने से पहले पाकिस्तान ने दोनों पक्षों के बीच समझौता करने का समय है। अगर हम चिनाब, झेलम और नीलम नदी पर बन रही प्रोजेक्ट्स में पाकिस्तान को शामिल नहीं करते तो फिर वो क्या कहेगा? 😊 हमें सिंधु जल संधि के तहत सभी पक्षों को एक हाथ में लेना चाहिए।
 
अगर चिनाब-झेलम पर कोई विकास कार्य शुरू कर दिया जाए तो ये बिल्कुल भी फायदेमंद नहीं होगा। पाकिस्तान हमेशा ऐसी बातें कहता रहता है लेकिन यह साबित करने में असमर्थ है। उनकी सोच पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। अगर भारत कोई परियोजना शुरू करता है तो यह एक राजनयिक मंच होगा जहां दोनों देश बातचीत कर सकते हैं लेकिन नतीजा यही है कि पाकिस्तान हमेशा इस स्थिति को अपने फायदे के लिए उपयोग करेगा।
मुझे लगता है कि भारत को अगर सिंधु जल संधि पर ध्यान देने की जरूरत है तो वह शांतिपूर्ण राजनयिक मंचों पर बातचीत करनी चाहिए।
 
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