मैंने पढ़ा है कि अगर अपनी सैलरी में इतना खर्च हो जाता है कि उसके बाद शेष खत्म हो जाता है, तो वास्तव में मारा गया पैसा वही होता है जो हम बचाते हैं
। और यही कारण है कि 50-30-20 रूल इतना जरूरी है। अगर खर्च का ढांचा तय नहीं किया गया है, तो सेविंग करना मुश्किल ही होता है।
मेरे विचार में, यह रूल हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम अपने पैसों को सही दिशा में निर्देशित कर रहे हैं। जरूरतीदार और चाहते के बीच का भला संतुलन तय करना बहुत जरूरी है। अगर हम अपनी जरूरतों को सबसे पहले पूरा करते हैं, फिर खुशी और आराम के लिए समय निकालते हैं, तो हमारा जीवन संतुलित होगा।
मेरे विचार में, यह रूल हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम अपने पैसों को सही दिशा में निर्देशित कर रहे हैं। जरूरतीदार और चाहते के बीच का भला संतुलन तय करना बहुत जरूरी है। अगर हम अपनी जरूरतों को सबसे पहले पूरा करते हैं, फिर खुशी और आराम के लिए समय निकालते हैं, तो हमारा जीवन संतुलित होगा।