बंगाल में बाबरी विवाद- जमीन नहीं, तो मस्जिद कहां बनेगी: हुमायूं का जवाब- 6 दिसंबर को दिखाऊंगा, TMC विधायक बोले- वो झूठा, BJP का एजेंट

मस्जिद को लेकर भारत में तेज हो रहे विवाद, अब बंगाल में खेलने को तैयार हैं हम।
 
बंगाली भाइयों का यह तेजी से बढ़ता विवाद दिल्ली से लेकर आगरा तक पहुंच गया है। मस्जिद बनाने का मुद्दा तो फिर से उठा दिया जा रहा है, और मुझे लगता है कि यह एक बार फिर से खेलने के लिए तैयार हैं। 🤔

मस्जिद बनाने की मांग को हम सभी जानते हैं, और यह हमेशा से ही एक बहुत बड़ा मुद्दा रहा है। लेकिन आजकल बंगाल में ऐसी तेजी से बढ़ते विवाद से मुझे लगता है कि कोई समझौता नहीं हो पाएगा। और इसका मतलब यह भी हो सकता है कि फिर से मस्जिद बनाने के लिए एक बड़ा मामला चलेगा, जिसमें हम सभी देशवासियों को शामिल किया जाएगा। 🚨

कौनसा समाधान होगा, यह तो देखना होगा। लेकिन एक बात तो यह साफ है कि मस्जिद बनाने का मुद्दा फिर से हमारी देश की ध्यान खींचेगा। और इसके परिणामस्वरूप फिर से एक बड़ा विवाद उभरेगा, जिसमें हम सभी दिल्ली, मुंबई, आगरा और बंगाल के लोगों को शामिल करेंगे।
 
बिल्कुल, यह मस्जिद बनाने की बात तो हिंदू-मुस्लिम दोनों के बीच फटी हुई चादर का मुद्दा है। लेकिन सच्चाई यह है कि भारत में हर जगह मस्जिद, चर्च, सिनागोगा, गुरूद्वारा और अन्य धार्मिक स्थल तो बसते हैं और शांति से रहते हैं। तो फिर बंगाल में मस्जिद बनाने की बात में कुछ भी गलत नहीं है। लेकिन यह सवाल उठता है कि हमारे देश में इतने सारे धार्मिक स्थल तो खिलौनों की तरह लग रहे हैं।
 
बंगाल की खिलाड़ियों को मस्जिद पर इतना ध्यान देना चाहिए या फिर उनकी खेल शैली पर? 🤔 लगता है कि उन्हें अपने खेल में बेहतर बनने का मौका देना चाहिए न कि यह विवाद सुलझाने पर.

मस्जिदों को संरक्षित करना और उनकी महत्व को समझना जरूरी है, लेकिन खेल का खेल है। बंगाल की प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपने खेल में निवेश करना चाहिए ताकि वे देश के लिए स्वर्ण पदक जीत सकें।

लेकिन साथ ही, यह भी जरूरी है कि मस्जिदों और अन्य सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा की जाए, ताकि हमारी समृद्ध संस्कृति को आगे बढ़ाया जा सके। एक बार फिर से यही सवाल उठता है - खेल या विवाद? 🤷‍♂️
 
बेटा, मस्जिद पर विवाद की बात करें? मुझे लगता है कि यह तो सब कुछ नहीं है। जानते हैं क्या? पास में एक दुकान में खेलने का स्पेस मिल गया है, और मेरी बेटी को खुश रखने के लिए फ्रिज में खाना तैयार करने की जिम्मेदारी मुझ पर है। ऐसे में कितनी देर विवाद कर सकते हैं? 😂 मैंने सुना है कि बंगाल में खेलने को तैयार होना तो आसान है, लेकिन अपने बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देना थोड़ा मुश्किल है।
 
🤣🏆👊

मुस्लिम युवाओं को खिलौना उड़ाते समय हमें अच्छी तरह से मजाक करना चाहिए 🤡, फिर भी वे ज्यादा पागल हो गए 😂. बंगाल में तेजी से विवाद बढ़ रही है, लेकिन यह सब कुछ थोड़ा दूर से देखें, मन नहीं लगने देने दें 🙏.

खेलों में भारतीय युवाओं को अपना समय बिताना चाहिए, खासकर तेज विकासशील देशों की तरह हिंदुस्तान में जहां स्ट्रीट फुटबॉल खेलने की परवाह नहीं 🏃‍♂️.
 
🤔 यह मस्जिद विवाद, mere khaas karne ke liye nahi hai. Main sochta hoon ki ye sab kuch kuch galat hai. Bharat mein humein apni jaan-pahan bhi dhalne denge? 🙅‍♂️ Kyunki masjid banaane ke liye logon ko pahle to pehle hi land ka khatana dete hain. Aur phir wo log josh mehsoos karte hain, lekin kya yeh sach mein masjid banegi? 🤷‍♂️ Maine socha hai ki ye sab sirf media ke liye bhi hota hai. Logon ko dhoondhte hain aur baarish kar dete hain. Aur fir log khudko hi zikr karte hain. To, mujhe lagta hai ki yeh sab to sirf drama hai. 🎭
 
मज़ाक है! मस्जिद पर विवाद करने से पहले क्या काम करते हैं लोग? यही ऐसी बातें हैं जो हमें देश में चलने में रोकती हैं। अब भारतीय खेल टीम का विरोधी बनाने का तो इरादा नहीं है, बल्कि फिर से देश का नाम रोशन करने का मौका मिल गया है। बंगाल में खेलने को तैयार होने की बात, यह तो वास्तविकता है कि हमारे पास खेल के लिए सही जैसे मैदान नहीं हैं। और अब मस्जिद पर देशव्यापी विवाद चलने लगा, यही एक और चिंता है।
 
बंगाल में जिंदगी कैसे है! लगता है कि वहाँ पूरी तरह से मस्जिद के मुद्दे पर ध्यान देने को तैयार हो गया है। तो हम सोचते हैं कि फिलहाल भारत में कुछ और शांतिपूर्ण गतिविधियाँ करें, जैसे कि खेल और मनोरंजन। खेलों की दुनिया में भारत बहुत आगे है, तो हमारे खिलाड़ियों ने बंगाल को पहले से ही एक चुनौती देनी होगी।
 
ਮਸਜਿਦ ਵਰਗੇ ਹੋਰ ਧਾਰਮਿਕ ਸਥਾਨਾਂ ਦੀ ਬਣਤਰ ਅਤੇ ਪ੍ਰਚਲਨ 'ਤੇ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਜ਼ਿਆਦਾ ਫੋਕਸ ਨਹੀਂ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ, ਇਸ ਲਈ ਇਹ ਵਿਵਾਦ ਖ਼ਾਸ ਕਰ ਕੇ ਯੋਗੀਆਂ ਅਤੇ ਰਾਜਨੀਤੀਕਾਰਾਂ ਲਈ ਡਰਦਾਰ ਹੈ
 
ताज़ा ख़बर सुनकर मुझे लगता है कि हमारी देशवासियों की भावनाएं बहुत गहरी हैं। मस्जिद के बारे में विवाद होना निश्चित रूप से हानिकारक नहीं है, लेकिन इसके पीछे क्या ज़रूरत है? यह तो बस अपनी अलग पहचान और परंपराओं की गर्व की बात है। ख़ल्कि अगर हमारी सरकार की ओर से ऐसी व्यवस्थाएँ नहीं हैं, तो यह समाज में तनाव फैलाएगी। लेकिन फिर भी, हमें यह समझना चाहिए कि मस्जिद और गुरुद्वारा, temples, या किसी भी अन्य धार्मिक स्थलों जैसे विभिन्न धर्मों को सम्मान करना ही सही है।
 
भाई, यह मस्जिद की बात तो दूसरों की चिंता है, हम अपनी जिंदगी जियिएं। तेज विवादों से भरपूर भारत में खेलने की तैयारी करना न सिर्फ ठीक है, बल्कि बहुत अच्छा है। यह दिखाता है कि हम अपने सवाल उठाने और अपनी आवाज उठाने को नहीं छोड़ते। अब बंगाल में खेलने को तैयार होने से हमें याद चलेगा कि भारत में हर जगह स्वतंत्रता और समानता की लड़ाई लड़ी जाती रहेगी। हमारे देश में इतनी विविधता है, एक-दूसरे की बात समझना और सहानुभूति करना बहुत जरूरी है। तो आइए, अपनी जिंदगी जियिएं, खेलों में भाग लिये, और हमारे देश की समृद्धि में योगदान करें। 🙏
 
बंगाल में क्रिकेट खेलने की बात सुनकर मुझे याद आता है जब दिल्ली का फाइनल मैच स्वाभिमान और हर्षिता के साथ खेला जाता था। अब तो मस्जिद की बात होने पर सभी लोगों को पुरानी यादें आती हैं। यह एक ऐसा समय लगता है जब हमारे देश में इतनी भीड़ और विवाद है। मुझे लगता है कि आजकल के खिलाड़ी कुछ नहीं करते, बस अपने खेल को ही देखते हैं और सभी की बातों पर ध्यान न देते। लेकिन फिर भी, जब वे क्षेत्र में आते हैं, तो उन्हें यह सब समझना चाहिए।
 
बंगाल के खिलाड़ियों को मस्जिद पर विवाद से बचना चाहिए, उनकी खेलों में ध्यान देना चाहिए. भारत में ऐसे विवाद हमेशा होते रहते हैं, लेकिन खेलों में जीत हारने का समय नहीं आया है। बंगाल के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा पर ध्यान देना चाहिए, न कि विवादों में। 🏆

मस्जिद के साथ-साथ भारत में अन्य धर्मों की मस्जिदें भी हैं, हमें उन्हें सम्मान देना चाहिए. पूरे देश में शांति और एकता का अहसास होना चाहिए। बंगाल के खिलाड़ियों को अपने खेलों में जीत हारने का भी समय मिलेगा, लेकिन मस्जिद पर विवाद नहीं करना चाहिए। 🙏
 
अरे, ये मस्जिद विवाद कितना ज्यादा बढ़ गया है... लोगों की राय में बहुत भेदभाव हो रहा है, यह तो हमारे देश की सामाजिक समस्या है। कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हें अपनी गलतियों को मानने की सुनने की इच्छा नहीं होती। भारत एक बहुत ही विविध देश है, और हमें इसकी विविधता को स्वीकार करना चाहिए। मस्जिद का निर्माण करने वालों की भी गलतियाँ होनी ही, लेकिन लोगों को उनकी गलतियों पर ध्यान देने की ज़रूरत नहीं है। हमें अपने देश को एकजुट करना चाहिए, न कि अलग-अलग समूहों के बीच विभाजन।
 
बात मस्जिद पर हुई, तो मुझे लगता है कि यह बहुत बड़ा मुद्दा है। मैं समझता हूं कि देशभर में अलग-अलग लोगों की राय अलग-अलग होती है, लेकिन ऐसे मामले जहां लोग अपने भावनाओं पर चलने लगते हैं, तो यह समस्या बढ़ जाती है। बंगाल में खेलने की तैयारी करना अच्छी दूरदर्शिता का निशान है 🏟️। लेकिन हमें सोच-समझकर अपने विचार व्यक्त करने चाहिए और एक-दूसरे को समझने की कोशिश करनी चाहिए। इस तरह हम अपने देश को मजबूत बना सकते हैं और सभी को साथ में चलने की ताकत बढ़ा सकते हैं।
 
मुझे लगता है कि यह समस्या बहुत बड़ी है, खासकर अगर ऐसी स्थिति उत्तर प्रदेश या बिहार जैसे राज्यों में आती है। लेकिन अब बंगाल में तो सब कुछ और अलग हो गया है। यहाँ के लोग बहुत ही विवादास्पद दृष्टिकोण रखते हैं और कभी भी अपने विचारों को स्वीकार नहीं करते।

मुझे लगता है कि अगर हम बंगाल में खेलने जाते हैं, तो हमें अपनी रणनीतियों को थोड़ा बदलना होगा। यहाँ के खिलाड़ियों को उनके विरोधियों से पहले तैयार करना चाहिए, न कि खुद को। और सबसे महत्वपूर्ण बात, हमें अपनी शांति बनाए रखनी चाहिए।
 
ਬੰਗਾਲ ਜ਼ਮੀਨ 'ਤੇ ਮੁਸਲਿਮ ਭਾਈਚਾਰੇ ਦੇ ਪਵਿੱਤਰ ਇਲਾਕਿਆਂ ਦਾ ਹੌਲੀ-ਬੌਲੀ ਅੰਦੋਲਨ ਜ਼ਰੂਰ ਸੁਣਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਇਹ ਮਸਜਿਦਾਂ ਬਣਾਉਣ ਦੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਵਿੱਚ ਨਾ-ਰਾਜ਼ਵਾਦੀ ਪਰਿਵਰਤਨ ਦੇ ਸਮਾਂ ਹੈ।

ਬੰਗਾਲ ਦੀ ਆਬਾਦੀ 'ਚ 40% ਮੁਸਲਿਮ ਹਨ, ਤੇ ਇਸ ਲਈ ਉਹ ਵੀ ਕੋਈ ਜ਼ਿਆਦਾ ਧਿਰ ਗਏ ਭਟਕਣ 'ਚ ਮਗਨ ਨਹੀਂ। ਤੇ ਬਾਲੀਵੁੱਡ ਫ਼ਿਲਮਾਂ 'ਚ ਦਖ਼ਲ ਆਉਣ, ਕਈ ਨਵੇਂ ਐਕਸ਼ਨ ਟੀਪਜ਼ ਬਰਤਾਰਦੇ ਹਨ।
 
ਮस्जिद ਦੀਆਂ ਗੱਲਾਂ ਤਾਂ ਬਹੁਤ ਖ਼ਿਆਲ ਰਖਣੇ ਪਏ ਜਾ ਰਹੇ ਹਨ। ਸਮਾਜ ਵਿੱਚ ਇਸ ਬਾਰੇ ਬਹੁਤ ਝਗੜਾ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਪਰ ਅੱਗੇ ਕਦੀ ਵੀ ਨਾ ਚੁੱਕੀਆਂ ਜਾਣ। ਮੈਂ ਸਵਾਲ ਉਠਾਉਂਦਾ ਹਾਂ, ਇਸ ਝਗੜੇ ਵਿੱਚ ਕੀ ਅੰਦਾਜ਼ਾ ਲੈ ਸਕੀਏ? ਕੀ ਆਪਣੇ ਧਰਮ, ਰਿਹਾਇਸ਼, ਸਭਨਾਂ ਦੀਆਂ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਲੈ ਕੇ ਬਹੁਤ ਝਗੜਾ ਕਿਉਂ ਕਰਦੇ ਹਾਂ?
 
मैंने देखा है कि मस्जिद पर विवाद सुनसान नहीं हुआ है, लेकिन जब यह बंगाल आता है तो सब एकदम बदल जाता है। मुझे लगता है कि हमें अपनी भारतीयता और अपने धर्म को सम्मान करने की जरूरत है। मस्जिद को बनाने से पहले हमें समझने की जरूरत थी कि यह कबसे और कहां बनाई गई थी। अब जब विवाद बढ़ रहा है तो मुझे लगता है कि सरकार को जल्दी से कुछ कर देना चाहिए। लेकिन, मैं समझता हूँ कि हर समस्या का समाधान आसान नहीं होता। हमें एक दूसरे को समझने की जरूरत और शांतिपूर्ण तरीके से बात करनी चाहिए।

आपको तो लगता है कि मस्जिद को बनाने से पहले क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
 
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