ब्लैकबोर्ड-तानों से परेशान महिला ने डुबोकर 4 बच्चे मारे: पड़ोसी काला कहकर चिढ़ाते थे, आखिर में अपना बेटा भी मार दिया

संदीप और उनकी पत्नी पारुल की बातें हैं:

हमारे घर में सुनने को मिलता था कि पूनम हमारी बहन को सुंदर नहीं समझती। घर में लोग उसकी दूसरों से तुलना करते थे।

उसकी शिकायतों में एक अजीब गुस्सा था। पढ़ी-लिखी थी- एमए, बीएड। दिखने में शांत, समझदार। समाज में उठती-बैठती थी। लेकिन अंदर खामोशी थी, जैसे कुछ दबा रहता है।

पूनम ने कभी किसी से बदjabiानी नहीं की, लेकिन अगर चोट आई तो हमेशा बात करना बंद कर देती। उसकी यही आदत थी।

उस रात मैंने जिया को खुद अपने पास रखा था। जब उसने सोने चली गई तो उसने खुद वापस आ गई और उसे चारों ओर घेर लिया। उसकी खिड़की के पीछे एक अलमारी थी, जिसमें जिया ने अपने नए कपड़े सजाए थे।

जयंत मांना को तीन बच्चों के लिए सरकारी गुड़िया देने के बारे में बताई, ‘मेरे शिशुओं ने भी तुम्हारे सिर पर चुंबन छोड़े।’
 
पूनम जी की कहानी बहुत ही गहरी है। मैं समझता हूँ कि समाज में लड़कियों को अक्सर दबाव में रखा जाता है और उनके विचारों को सुनने में भी कठिनाई होती है। लेकिन यह तो हमें सबक सिखाती है कि हमें अपनी बेटियों को खुलकर सुनना चाहिए और उन्हें सही रास्ता देना चाहिए।
 
यह तो बहुत गंभीर मुद्दा है जो हमारे समाज की बेहद जरूरत है। जब कोई इंसान अपने अंदर की खामोशियों और दर्दों से नहीं निकाल पाता, तो वह कभी-कभी दूसरों पर भी अपना दर्द छोड़ने लगता था। जिया की कहानी एक बहुत ही गहरी बात है जिससे हमें अपने समाज में ऐसी आदतों को पहचानने और बदलने की जरूरत है। 🙏🌟
 
अरे, यह तो मजाक है! सरकारी गुड़िया देने के बारे में जयंत मांना बोल रही थी, लेकिन वास्तविकता यह है कि उनके शिशुओं ने उसके सिर पर चुंबन छोड़ने की बजाय, वह अपने बच्चों को कैसे रोकेगी? और सरकारी गुड़िया देने से उनका बच्चा खुश होगा, या नहीं? यह तो शायद उसके बेटों को देखने में जिया को खुश करेगी, लेकिन हमें इसका अंदाजा लगाने की जरूरत नहीं है। 🙄
 
बच्चों को खिलौने नहीं चाहिए, खिलौनों को बच्चे चाहिए। 🤔 हम तो उन्हें खिलौने दे देते हैं और फिर उनकी सेहत पर ध्यान नहीं देते। इसका नतीजा यह होता है कि उनके पास उसी तरह के खिलौने जैसे खिलौने मिलते हैं जो उन्हें चोट पहुंचाते हैं।

मेरी बहन की भी ऐसी ही कहानी है, जब वह छोटी थी, तो हमने उसे एक खिलौना दिया जिससे उसके हाथ में कट लग गया, लेकिन फिर उसे कहीं नहीं सांभलाया। मैं तो उनके लिए अच्छे से कुछ खरीदता था जिससे वे खुश रहें।
 
मुझे लगता है कि बचपन में हमारी खिड़कियों में अलमारी नहीं थी, वह तो हमेशा दीवार पर लगी होती थी। और जिया के कपड़े सजाने से पहले उसकी खाली बोर्डर पर पत्थर लगाते थे।
 
अरे, यह पूनम की कहानी को सुनने पर मुझे बहुत खेद हुआ। उसकी दोस्तों और परिवार वालों ने उसे इतना बदनाम किया था, जैसे वह अपने आप को नहीं समझती। पूनम की आदतें तो ठीक थीं, लेकिन जब उसकी खिड़की के पीछे अलमारी में उसके नए कपड़े सजाए हुए देखो, तो मुझे बहुत आफ़ता हुआ महसूस हुआ। वह कैसे अपने आप को इतना दबाकर रख रही थी, जैसे उसे चोट लगने से खामोशी हो गई हो। और जिया भी कैसे उसके पास चला, जैसे वह अपने दोस्तों के साथ खेल रही थी। तो मुझे लगता है कि हमें विचार करना चाहिए कि हम किस तरह की बातें करते हैं और किस तरह की प्रतिक्रियाएं हम लेते हैं।
 
पूनम जी को समझने की जरूरत है जितना हमारे बच्चों को समझने की। घर में खिड़की के पीछे अलमारी रखने से पहले क्या-क्या चिंताएं होती? शायद जिया जी को भी ऐसे ही कुछ दबा रहा था। और जिया जी की खिड़की पर नई सजावट रखने से कोई दोस्त उसकी बातें नहीं मानता, तो फिर गुस्सा क्यों लेती?
 
प्रियजनों को देखकर मुझे बहुत दुःख होता है... पूनम जी की कहानी एक दर्दनाक सच्चाई की बात है। समाज में हमेशा से महिलाओं को कमजोर माना जाता है, उनकी आवाज़ दबाए जाती है और उनकी भावनाओं को महत्व नहीं दिया जाता।

मैंने ऐसी कई कहानियां पढ़ी हैं, जिनमें महिलाएं अपने पति या परिवार से नफरत करती हैं लेकिन उन्हें बोलने का मौका नहीं मिलता। यह एक बड़ा सवाल है कि हम समाज में बदलाव लाने के लिए क्या कर सकते हैं? 🤔

पूनम जी की कहानी सुनकर मुझे लगता है कि हमें अपनी भावनाओं को दूसरों के सामने रखना चाहिए और उन्हें समझने का प्रयास करना चाहिए। यही हमारा समाज बदलने का रास्ता है। 🌈

इसीलिए मैंने जिया को खुद अपने पास रखा। 😊
 
મેં તો એવું સોચાયું કે જ્યારે આપણી સામાન્ય ગલ્લથી ખબર પડે તો એક અજવાળો દિશા સામે આવે છે. મારા ઘરની હતી એક અભિલાષાજની, જેણે સાથે વળીને ખબર પડતું હતું. એક દિવસ મારો ઘર ભર્યો હતો, પણ આપણને જોઈને અજવાળુ સમાંતર દૃષ્ટિએ ચલકવાય છે.
 
क्या सच्चाई है? जिया अपने पति से खुलकर बात नहीं कर पाती। उसकी खिड़की के पीछे अलमारी तो किसी और की मान जाए। और जयंत मांना की सरकारी गुड़िया देने वाली तो बच्चों के लिए ही नहीं बल्कि अपने पति के लिए भी।
 
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