संदीप और उनकी पत्नी पारुल की बातें हैं:
हमारे घर में सुनने को मिलता था कि पूनम हमारी बहन को सुंदर नहीं समझती। घर में लोग उसकी दूसरों से तुलना करते थे।
उसकी शिकायतों में एक अजीब गुस्सा था। पढ़ी-लिखी थी- एमए, बीएड। दिखने में शांत, समझदार। समाज में उठती-बैठती थी। लेकिन अंदर खामोशी थी, जैसे कुछ दबा रहता है।
पूनम ने कभी किसी से बदjabiानी नहीं की, लेकिन अगर चोट आई तो हमेशा बात करना बंद कर देती। उसकी यही आदत थी।
उस रात मैंने जिया को खुद अपने पास रखा था। जब उसने सोने चली गई तो उसने खुद वापस आ गई और उसे चारों ओर घेर लिया। उसकी खिड़की के पीछे एक अलमारी थी, जिसमें जिया ने अपने नए कपड़े सजाए थे।
जयंत मांना को तीन बच्चों के लिए सरकारी गुड़िया देने के बारे में बताई, ‘मेरे शिशुओं ने भी तुम्हारे सिर पर चुंबन छोड़े।’
हमारे घर में सुनने को मिलता था कि पूनम हमारी बहन को सुंदर नहीं समझती। घर में लोग उसकी दूसरों से तुलना करते थे।
उसकी शिकायतों में एक अजीब गुस्सा था। पढ़ी-लिखी थी- एमए, बीएड। दिखने में शांत, समझदार। समाज में उठती-बैठती थी। लेकिन अंदर खामोशी थी, जैसे कुछ दबा रहता है।
पूनम ने कभी किसी से बदjabiानी नहीं की, लेकिन अगर चोट आई तो हमेशा बात करना बंद कर देती। उसकी यही आदत थी।
उस रात मैंने जिया को खुद अपने पास रखा था। जब उसने सोने चली गई तो उसने खुद वापस आ गई और उसे चारों ओर घेर लिया। उसकी खिड़की के पीछे एक अलमारी थी, जिसमें जिया ने अपने नए कपड़े सजाए थे।
जयंत मांना को तीन बच्चों के लिए सरकारी गुड़िया देने के बारे में बताई, ‘मेरे शिशुओं ने भी तुम्हारे सिर पर चुंबन छोड़े।’