बारिश ना होने से परेशान उत्तराखंड के किसान: बढ़ती ठंड से फूलों-सब्जियों को नुकसान, उपज में 40% तक आ सकती है कमी - Dehradun News

उत्तराखंड में बारिश नहीं होने से किसान परेशान, ठंड और ओस बढ़ रही है, जिससे फूलों-सब्जियों को नुकसान होता है।

करीब 57 हजार 716 हेक्टेयर भूमि पर सब्जियों की खेती होती है लेकिन आने वाले दिनों में तापमान में लगातार गिरावट आ रही है, जिससे सब्जियों की फसलों को नुकसान होता है। ज्यादा ठंड से पौधों की कोशिकाएं फट सकती हैं और तापमान में गिरावट आने से पौधों का विकास रुक जाता है और वे मुरझा जाते हैं।

इस समय गड्ढे बनाए जाते हैं, जिसमें मुख्य रूप से सेब की बागवानी की जाती है, लेकिन अगर बारिश नहीं होती है तो इसमें भी किसानों को परेशानी होती है। इस सीजन में बारिश न होने की वजह से सब्जियों को बहुत ज्यादा नुकसान होता है और पहाड़ों में अगर बारिश नहीं होती है तो मटर जैसी फसल काफी हद तक प्रभावित होती है।

किसानों को इसके कारण काफी नुकसान होता है, लेकिन इस स्थिति से बचने के लिए उन्हें प्लास्टिक की पलवार (मल्चिंग) करने की जरूरत है जिससे फसलों में नमी बनाए रखने में मदद मिलती है। नवंबर महीने में हुई 98% कम बारिश से उत्तराखंड के निचले इलाकों में पाला पड़ने की भी पूरी संभावना है, जिससे यहां की फसलों को भी पूरा नुकसान हो सकता है।
 
बाढ़ से लड़े तो फिर ठंड में खेती करें, ये तो किसानों का खेल नहीं है 🌪️👀 उत्तराखंड में बारिश न होने से सब्जियों की खेती पर दबाव बढ़ जाता है, लेकिन अगर उनकी खेती के लिए प्लास्टिक की पलवार करनी पड़ती है तो यह हमेशा आसान नहीं होती। किसानों को अपनी फसलों की देखभाल के लिए और भी अधिक मेहनत करनी पड़ती है।
 
🌡️ बारिश नहीं होने से किसान परेशान हो रहे हैं! ठंड और ओस बढ़ रही है, जिससे फूलों-सब्जियों को बहुत नुकसान होता है। मुझे लगता है कि किसानों को गड्ढे बनाकर सेब की बागवानी करनी चाहिए, लेकिन अगर प्लास्टिक की पलवार (मल्चिंग) नहीं की जाती है, तो सब्जियों को बहुत नुकसान होता है। मुझे लगता है कि नवंबर महीने में कम बारिश से उत्तराखंड के निचले इलाकों में पाला पड़ने की भी पूरी संभावना है, जिससे यहां की फसलों को बहुत नुकसान हो सकता है।

કેવી નીતિથી ફરીઓ હશે?
 
तो ये तो उत्तराखंड की समस्या कितनी गंभीर है 🤕, अगर बारिश नहीं होती तो सब्जियों और अनाज के फसलों को बहुत ज्यादा नुकसान होता है। मैंने भी कई बार अपने घर के पास जाकर देखा है कि ठंड और ओस बढ़ जाती है और फूल-फलों को नुकसान होता है, यह बहुत दुखद है 🌧️। सरकार तो ऐसी समस्याओं से लड़ने के लिए कुछ नहीं कर पा रही है, इसलिए हमें अपनी जिम्मेदारियों निभानी चाहिए और प्लास्टिक की पलवार करने से फसलों में नमी बनाए रखने में मदद मिलती है 💪
 
भाई, ये बारिश तो हमेशा नहीं होती, तो तो ठंड और ओस बढ़ जाती। लेकिन अब किसानों को यह सब मालूम होने से पहले ही पलवार करने की जरूरत। भाई, सब्जियों की खेती में हमेशा कोशिश करना चाहिए, तभी फसलें अच्छी बगड़ेती। और अगर बारिश नहीं होती तो किसानों को अपने खेतों को सूखा रखने की जरूरत। 😊
 
तो अब तो उत्तराखंड में किसान परेशान हुए हैं और सब्जियों को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है, इसीलिए उन्हें अपनी फसलों के लिए प्लास्टिक की पलवार करने की जरूरत है ताकि वे फिर से समाज में फल-फूल खिलाएं, लेकिन यह एक बड़ी चुनौती होगी, और ज्यादा ठंड से सब्जियों की फसलें नुकसान हो सकती हैं... 🌫️
 
मैंने पढ़ा है कि उत्तराखंड में बारिश नहीं होने से सब्जियों की खेती पर बहुत ज्यादा दबाव आ रहा है। लेकिन मुझे लगता है कि अगर बारिश नहीं होती तो सब्जियों को नुकसान होगा, लेकिन अगर बारिश होती तो भी मटर जैसी फसल को पूरी तरह से बचाया नहीं जा सकता। और फिर क्या करें? 😐

मुझे लगता है कि किसानों को जरूरत है, लेकिन अगर उन्हें प्लास्टिक की पलवार करने में मदद मिले, तो शायद सब कुछ ठीक हो जाएगा। लेकिन अगर नहीं होती, तो क्या करें? 🤔

मुझे लगता है कि उत्तराखंड के निचले इलाकों में पाला पड़ने की संभावना बहुत अधिक है, लेकिन शायद अगर बारिश होती तो सब्जियों को भी नुकसान होगा। क्या यह सही है? 🤷‍♂️
 
मुझे लगता है कि ये देखकर बहुत परेशान होना चाहिए 🤕। किसानों की मेहनत और सावधानी का फायदा भी नहीं हो रहा। इस समय गड्ढे बनाकर सब्जियों की खेती करना अच्छा विचार है, लेकिन अगर बारिश नहीं होती तो क्या करें? मुझे लगता है कि प्लास्टिक की पलवार करना एक अच्छा तरीका है, जिससे फसलों में नमी बनाए रखने में मदद मिल सकती है। लेकिन हमें यह भी सोचना चाहिए कि अगले सीजन में ऐसी स्थितियाँ नहीं आ रही, ताकि हमें जल्द से जल्द कोई समाधान ढूंढने की जरूरत न हो।
 
😔 मौसम की इस तरह से खिलौना नहीं बनता, पेड़ों को ठंड होने लगी है और जानवरों को भी बीमार पड़ रहा है। किसानों की जिंदगी बहुत मुश्किल हो गई है, प्लास्टिक की मल्चिंग करने से पहले तय कर लेना चाहिए कि कितने फसल उगाएंगे। उत्तराखंड में बारिश न होने से सब्जियों और फलों पर बहुत दबाव पड़ रहा है, यही कारण है कि पेड़ों को ठंड होने लगी है। 🌳😓
 
ਖੇਤੀ ਦੇ ਮੁੱਦੇ ਤੇ ਸਭ ਕੁਝ ਪੁੱਛਣਾ ਹੈ, ਕਿ ਹਰ ਵਾਰ ਜਿਹੋ ਜਿਹੀ ਬਰਸਾਤ ਆ ਜਾਏ ਉਹੀ ਫਲ ਮਿਲਦੇ ਹਨ। ਲੱਗਣ ਵਾਲੇ ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਘਟ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਫ਼ਲਾਂ ਤੇ ਫ਼ਲ-ਗੁਣਾਂ 'ਤੇ ਵੀ ਪ੍ਰਭਾਵ ਪੈ ਰਿਹਾ ਹੈ। 🌡️
 
बढ़ रही ठंड और ओस किसानों को बहुत परेशान कर रही है 😔, जो कि बारिश नहीं होने से उत्पन्न हो रही है, तो सब्जियों की फसलें भी पूरा नुकसान हो रही हैं। मैंने अपने गांव में जब भी ठंड बढ़ती है तो हमारे खेत में सब्जियों की फसलें धीरे-धीरे मरने लगती हैं, जैसे कि हरा प्याज और अन्नपूर्णा। इसे देखकर मुझे बहुत गुरur महसूस होती है, जो कि बारिश नहीं होने से उत्पन्न हो रही है और यह ठंड ओस फसलों को नुकसान पहुंचा रही है।
 
ਅरे, ये ਕिसानਾਂ ਨੂੰ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਦੁੱਖ ਦੇ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਉਹਨਾਂ ਲਈ ਜ਼ਮੀਨ 'ਤੇ ਬਗ਼ੈਰ ਵੀਰ' ਫਸਲਾਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ, ਪਰ ਅਜੋਕੇ ਹਲਣਕੀ ਹਨ। ਉਹਨਾਂ ਲਈ ਫਸਲਾਂ ਵਿੱਚ ਤਾਪਮਾਨ ਮੁੜ ਗਰਮ ਕਰਨ ਦੀ ਅਣਹੋਂਦ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਲੱਗੀ ਹੈ।
 
बता दो, उत्तराखंड में बारिश नहीं होने की बात तो बहुत ही आम बात है 🤔। लेकिन मुझे लगता है कि इसके पीछे कुछ और जरूरी बातें भी हैं। अगर हम सब्जियों की खेती से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान दें, तो यह एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। लेकिन मेरी राय में, हमें प्लास्टिक की पलवार करने के बारे में बहुत कम सोचते हैं 🌱। अगर हम पौधों को नमी देने के तरीके पर ध्यान देते, तो शायद हम सब्जियों की फसलों को भी बचा सकते थे। और मटर जैसी फसल को कुछ और स्थिरता देने के लिए हमें कुछ और रणनीति बनानी चाहिए 🌼
 
बारिश नहीं होने की बात तो देखें तो हमारी खेती पर बहुत पड़ती है 🌡️। लेकिन फिर सोचते हैं कि ये सब क्यों होता है? अगर पहले अच्छे तरीके से जल संचयन करें, तो जैसे पहाड़ों में भी पानी बचाए रखने के दौर, तभी किसानों को बहुत परेशानी नहीं होती। और अगर अब भी बारिश नहीं होगी, तो फिर कुछ ऐसा जरूरी है जिससे खेती में नमी बनाए रखें, ताकि पौधे ठीक से उग सकें। इससे हम सब किसानों की मदद कर सकते हैं और अपने खाद्य सुरक्षा को भी बनाए रख सकें।
 
बिल्कुल सुनहरे सीजन के बीच में ऐसी ठंड लग गई है 🌡️, जैसे अगर सब्जियां और फल तैयार होने वाली थीं लेकिन पहले ही ठंड पड़ गई। यह नुकसान किसानों को बहुत बड़ा होगा चाहे वह सब्जियों की खेती कर रहे हो या सेब की बागवानी। प्लास्टिक की मल्चिंग करना जरूरी है ताकि फसलें नमी बनाए रख सकें।
 
बिल्कुल तो लगता है कि सब्जियों को सही मौसम में रखने के लिए हमें बहुत कोशिश करनी पड़ती है, लेकिन फिर भी जंगल की दुनिया में जाने पर मैंने एक सुंदर बिल्ली देखी थी, जिसका रंग इतना समांतर था, वह तो पूरी तरह से खुशी में रहती है...🐈 और इसके अलावा मैंने सोचा कि अगर हम सब्जियों की फसलों को सही मौसम में रखने के लिए प्लास्टिक की पलवार करें, तो वह भी हमारे गड्ढे में लगकर खुशी के साथ घास खा सकती है... 🌼👍
 
बड़ा दुःख 😔 उत्तराखंड में बारिश नहीं होने से सब्जियों और फलों को बहुत ज्यादा नुकसान हो रहा है 🌪️ तापमान में गिरावट आ रही है तो पौधों को परेशानी होती है 🤕 फूलों को ठंड से नुकसान हो रहा है और सब्जियों की फसलें भी टूटती जा रही हैं 💔 गड्ढे में सेब की बागवानी करना फायदेमंद नहीं है अगर बारिश नहीं होती तो 🌫️
 
बड़ा दुःख है उत्तराखंड में बारिश नहीं होने से। किसान कितने परेशान हैं, ठंड और ओस बढ़ जाने से सब्जियों को नुकसान होता है। मैं समझता हूँ कि पौधों की कोशिकाएं फट सकती हैं और तापमान में गिरावट आने से विकास रुक जाता है और वे मुरझा जाते हैं।

किसानों को बहुत परेशानी होती है, लेकिन प्लास्टिक की पलवार करने से मदद मिलती है। नवंबर महीने में 98% कम बारिश से निचले इलाकों में पाला पड़ने की भी संभावना है, जिससे फसलों को पूरा नुकसान हो सकता है। हमें सहायता करनी चाहिए किसानों को।
 
बहुत दुर्भाग्य से उत्तराखंड में बारिश नहीं होने से सब्जियों की खेती पर बहुत दबाव पड़ रहा है 🌧️। किसानों को ठंड और ओस का सामना करना पड़ रहा है, जिससे फूलों-सब्जियों को नुकसान होता है। यह बहुत चिंताजनक है कि आगे की फसलों को भी पूरा नुकसान हो सकता है 🤕
 
तापमान में गिरावट आ रही है तो सब्जियों की फसलों को बचाया जाना चाहिए। बहुत ज्यादा ठंड से पौधों की कोशिकाएं फट सकती हैं और विकास रुक जाता है। गड्ढे बनाने में प्लास्टिक की पलवार करना जरूरी है ताकि नमी बनाए रखी जा सके।
 
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