उत्तराखंड में बारिश नहीं होने से किसान परेशान, ठंड और ओस बढ़ रही है, जिससे फूलों-सब्जियों को नुकसान होता है।
करीब 57 हजार 716 हेक्टेयर भूमि पर सब्जियों की खेती होती है लेकिन आने वाले दिनों में तापमान में लगातार गिरावट आ रही है, जिससे सब्जियों की फसलों को नुकसान होता है। ज्यादा ठंड से पौधों की कोशिकाएं फट सकती हैं और तापमान में गिरावट आने से पौधों का विकास रुक जाता है और वे मुरझा जाते हैं।
इस समय गड्ढे बनाए जाते हैं, जिसमें मुख्य रूप से सेब की बागवानी की जाती है, लेकिन अगर बारिश नहीं होती है तो इसमें भी किसानों को परेशानी होती है। इस सीजन में बारिश न होने की वजह से सब्जियों को बहुत ज्यादा नुकसान होता है और पहाड़ों में अगर बारिश नहीं होती है तो मटर जैसी फसल काफी हद तक प्रभावित होती है।
किसानों को इसके कारण काफी नुकसान होता है, लेकिन इस स्थिति से बचने के लिए उन्हें प्लास्टिक की पलवार (मल्चिंग) करने की जरूरत है जिससे फसलों में नमी बनाए रखने में मदद मिलती है। नवंबर महीने में हुई 98% कम बारिश से उत्तराखंड के निचले इलाकों में पाला पड़ने की भी पूरी संभावना है, जिससे यहां की फसलों को भी पूरा नुकसान हो सकता है।
करीब 57 हजार 716 हेक्टेयर भूमि पर सब्जियों की खेती होती है लेकिन आने वाले दिनों में तापमान में लगातार गिरावट आ रही है, जिससे सब्जियों की फसलों को नुकसान होता है। ज्यादा ठंड से पौधों की कोशिकाएं फट सकती हैं और तापमान में गिरावट आने से पौधों का विकास रुक जाता है और वे मुरझा जाते हैं।
इस समय गड्ढे बनाए जाते हैं, जिसमें मुख्य रूप से सेब की बागवानी की जाती है, लेकिन अगर बारिश नहीं होती है तो इसमें भी किसानों को परेशानी होती है। इस सीजन में बारिश न होने की वजह से सब्जियों को बहुत ज्यादा नुकसान होता है और पहाड़ों में अगर बारिश नहीं होती है तो मटर जैसी फसल काफी हद तक प्रभावित होती है।
किसानों को इसके कारण काफी नुकसान होता है, लेकिन इस स्थिति से बचने के लिए उन्हें प्लास्टिक की पलवार (मल्चिंग) करने की जरूरत है जिससे फसलों में नमी बनाए रखने में मदद मिलती है। नवंबर महीने में हुई 98% कम बारिश से उत्तराखंड के निचले इलाकों में पाला पड़ने की भी पूरी संभावना है, जिससे यहां की फसलों को भी पूरा नुकसान हो सकता है।