ब्राह्मणवाद, RSS से नजदीकी, जस्टिस स्वामीनाथन पर क्यों लगे आरोप: वकील बोले- कोर्ट में अपमान करते हैं, सिर्फ एक समुदाय को तवज्जो

मद्रास हाईकोर्ट में जस्टिस एम. स्वामीनाथन पर महाभियोग नोटिस दाखिल किया गया है। इसके पीछे वजह क्या है, इस मामले में तमिलनाडु की DMK सरकार, विपक्षी दलों और कई वकीलों ने आरोप लगाए हैं। जस्टिस स्वामीनाथन पर ब्राह्मणवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगे हैं। उनकी अदालत में खासतौर पर ब्राह्मण समुदाय के वकीलों को फायदा पहुंचाने की विशेषता दिखाई गई है, जबकि दलित और अन्य अल्पसंख्यक समूहों को कम महत्व दिया गया है।
 
मुझे लगता है कि यह बात सच नहीं होगी, जस्टिस स्वामीनाथन एक बहुत ही निष्पक्ष और अनुभवी न्यायाधीश हैं और उन्हें कोई भी ऐसा आरोप न लगा सकता है। लेकिन फिर से मुझे लगता है कि यह बात सही नहीं होगी, जस्टिस स्वामीनाथन पर आरोप लगाने वालों को जरूर ध्यान रखना चाहिए कि उन्हें अपने दावों को ठीक-ठीक साबित करना होगा। और फिर मुझे लगता है... नहीं, मैं सही सोच रहा था! 🤔
 
मुझे लगता है कि इस मामले में आरोप लगाना सही नहीं है 🤔। जस्टिस स्वामीनाथन एक अनुभवी और निष्पक्ष न्यायाधीश हैं जिन्होंने देश को कई महत्वपूर्ण मामलों में सुनवाई की है। उनकी अदालत में सभी समूहों के वकीलों को समान अवसर मिला होता है, यह बिल्कुल सही नहीं है कि वे केवल ब्राह्मण समुदाय के वकीलों को फायदा पहुंचाते हैं। 🙅‍♂️

इसके अलावा, जस्टिस स्वामीनाथन ने अपने जीवनकाल में कई मामलों में दलित और अन्य अल्पसंख्यक समूहों की मदद की है। उन्होंने अपनी अदालत में उन्हें भी महत्वपूर्ण स्थान दिया है, लेकिन यह हमेशा आसान नहीं होता है 🤷‍♂️। मुझे लगता है कि इस मामले में आरोप लगाना सही नहीं है और जस्टिस स्वामीनाथन को उनके पूरे करियर में अच्छे कार्यों के लिए सम्मानित किया जाना चाहिए 💪
 
जस्टिस एम. स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग नोटिस की बात सुनकर मुझे लगता है कि हमारे देश में समानता और न्याय की जड़ें कहीं गुम हो गई हैं। 🤔

तो क्या हमारी अदालतें वास्तव में सभी के लिए न्याय भारती हैं या यह सिर्फ ब्राह्मण समुदाय के लिए? क्या दलित और अन्य अल्पसंख्यक समूहों को अपने अधिकारों के लिए लड़ने का मौका मिलता है? हमें सोचना चाहिए कि हम अपनी अदालतें कैसे बनाना चाहते हैं जो न्याय और समानता की भावना को बढ़ावा देती हों।

लेकिन इसके पीछे क्या वजह है? यह सवाल मुझे बहुत ही गंभीरता से सोचाना पड़ता है। क्या हमारे समाज में ब्राह्मणवाद और राजनीतिक दबाव इतने मजबूत हो गए हैं कि अब लोग अपने अधिकारों के लिए लड़ने के बजाय शांति से भुगतने लगे हैं।
 
अरे, यह बात तो बहुत गंभीर है ना, जस्टिस स्वामीनाथन पर महाभियोग लगाने की बात। मुझे लगता है कि यह हमारी देश की सच्चाई को उजागर कर रहा है। हमें यह समझना चाहिए कि अदालत में न्याय और समानता की बात करना आसान है, लेकिन प pratic करने की बात बहुत मुश्किल होती है।

मैं सोचता हूँ, अगर हम अपने जीवन में भी इसी तरह की ही समस्याओं को देखते हैं, तो हम कभी भी उन्हें हल नहीं कर पाएंगे। इसलिए, हमें अपने आप से पूछना चाहिए, कि हमारी समाज में समानता और न्याय की बात करने वाले लोगों ने खुद अपने जीवन में इसको लागू किया है या नहीं।
 
नम क्या है इस बड़े मामले पर! 👀 जस्टिस एम स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग नोटिस दाखिल करने की बात तो सुनकर दिल दिला रहा है। अगर सच्चाई कहीं तो क्या है कि हमारे न्याय प्रणाली में भ्रष्टाचार जैसी चीजें हो सकती हैं।

बस ये सवाल है कि क्यों इस तरह की आरोप लगाए गए? क्या यह सच है कि जस्टिस स्वामीनाथन ने ब्राह्मणवाद को बढ़ावा देने के लिए अदालत में खासतौर पर ब्राह्मण समुदाय के वकीलों को फायदा पहुंचाने की विशेषता दिखाई?

और यह भी सवाल है कि दलित और अन्य अल्पसंख्यक समूहों को कैसे कम महत्व दिया गया? क्या हमें अपने अदालत में सामाजिक न्याय की ओर बढ़ने की जरूरत है? 🤔
 
भरोसे क्यों, जस्टिस स्वामीनाथन की बात करने के पीछे वजह तो बहुत जटिल है 🤔। मैं यह कह सकता हूँ कि उनकी अदालत में ऐसी स्थितियाँ निकलती हैं जहाँ कुछ लोगों को बढ़ावा देने के लिए ब्राह्मणवादी समूहों को आराम दिया जाता है, जबकि दलित और अन्य अल्पसंख्यक समूहों को उनके हक्कों से वंचित रखा जाता है। यह सोचकर चिंता करने को तैयार हूँ कि कैसे हमारी अदालतें ऐसे मामलों में फंस जाती हैं जहाँ समानता और न्याय की बात कही जाती है, लेकिन वास्तविकता में अलग-अलग वर्गों को अलग स्थिति देने का मकसद बनता है 🚫
 
मुझे लगता है कि जस्टिस एम. स्वामीनाथन पर महाभियोग नोटिस दाखिल करने की बात बिल्कुल सही नहीं है 🙅‍♂️। अगर ब्राह्मणवाद को बढ़ावा देने के आरोप सच हैं तो जस्टिस स्वामीनाथन को पूरी तरह से बरी न करें लेकिन उन्हें माफ करने की जरूरत नहीं है। उनकी अदालत में दलित और अन्य अल्पसंख्यक समूहों की आवाज़ को सुनने की जरूरत थी, लेकिन अगर ऐसा न हुआ तो यह भी बुरा है, लेकिन इसके लिए महाभियोग नोटिस दाखिल करने की जरूरत नहीं है 🙄
 
मुझे लगता है कि यह मामला बहुत बड़ा है। जस्टिस स्वामीनाथन पर आरोप लगाना बिल्कुल सही नहीं है, लेकिन अदालत में दलित और अन्य अल्पसंख्यक समूहों को कम महत्व देने की बात जरूर चिंताजनक है। क्या यह सच है कि उनकी अदालत में खासतौर पर ब्राह्मण समुदाय के वकीलों को फायदा पहुंचाने की विशेषता दिखाई गई है? मुझे लगता है कि यह एक बड़ा मुद्दा है जिस पर जरूर ध्यान देना चाहिए।
 
अरे ये तो बहुत बड़ा मामला है! मैंने पढ़ लिया है कि जस्टिस स्वामीनाथन पर महाभियोग नोटिस दाखिल किया गया है, और लोगों को यह सुनकर आश्चर्य हुआ है। मेरी राय में ब्राह्मणवाद को बढ़ावा देने के आरोपों पर जस्टिस स्वामीनाथन को तुरंत छानबीन करनी चाहिए। उनकी अदालत में खासतौर पर दलित और अन्य अल्पसंख्यक समूहों को कम महत्व दिया जाता है, यह अच्छा नहीं है। 🤦‍♂️👮‍♀️📚
 
मुझे यह सारा मामला थोड़ा अजीब लगता है! मैं समझ नहीं पाऊंगा की जस्टिस एम. स्वामीनाथन पर यह आरोप लगे। लेकिन मेरा सवाल यह है कि क्या हमें अपने न्यायपालिका में इन चीजों को फैलाने वाले लोगों से दूर रहना चाहिए? मुझे लगता है कि हमें अपनी अदालतों में जितने भी वकील और अधिवक्ता हों, उनकी बातों पर ध्यान रखना चाहिए, लेकिन उनकी निष्पक्षता को कभी नहीं तोड़ना चाहिए। 🤔
 
मद्रास हाईकोर्ट में जस्टिस एम. स्वामीनाथन पर महाभियोग नोटिस दाखिल करने की बात बहुत ही विवादित हो रही है 🤔। मेरा मानना है कि यह मामला एक बड़ा मुद्दा है जिसमें हमें अपनी समाजव्यवस्था और न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर प्रकाश डालने की जरूरत है। लेकिन जस्टिस स्वामीनाथन को आरोपित करने से पहले हमें यह समझने की जरूरत है कि उनकी न्यायपालिका में क्या गलतियाँ हुईं और उनकी विचारधारा क्या है। शायद इस मामले में सरकारों और विपक्षी दलों को अपने आरोपों को सही साबित करने की जरूरत है और न्यायपालिका की स्वतंत्रता का जश्न मनाने की जरूरत नहीं है।
 
जस्टिस एम. स्वामीनाथन को महाभियोग नोटिस दाखिल करने वाली सभी पक्षों को खुद को समझाने की जरूरत है कि हमारे देश में न्यायपालिका की स्वतंत्रता बहुत महत्वपूर्ण है। अगर जस्टिस स्वामीनाथन को यह आरोप लगने वाला पहला मामला है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि उनकी न्यायपालिका करने की क्षमता कम ह गई है। हमें इस मामले में सबको खुलकर बोलने की जरूरत है, ताकि हम समझ सकें कि वास्तव में क्या हो रहा है और न्यायपालिका की स्वतंत्रता कैसे बचाई जाए।
 
मुझे लगता है कि यह मामला थोड़ा जटिल है। मैंने सुना है कि जस्टिस स्वामीनाथन पर आरोप लगे हैं लेकिन मुझे नहीं पता कि ये सच्चे या झूठे हैं। मैं समझता हूँ कि तमिलनाडु में ब्राह्मणवाद एक बड़ा मुद्दा है, लेकिन लगता है कि इस मामले में सरकार और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने राजनीतिक स्वार्थ को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

मुझे लगता है कि अदालत में न्याय बाहरी नहीं होना चाहिए, बल्कि वह वहां होना चाहिए जो सच्चाई के अनुसार हो। अगर जस्टिस स्वामीनाथन को भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप लग रहा है, तो उस पर उचित मुकदमा चलाना चाहिए, लेकिन अगर यह एक राजनीतिक हमला है, तो ऐसा न हो।
 
बिल्कुल सही माननीय न्यायमूर्ति स्वामीनाथन जी के खिलाफ यह आरोप लगाना एक बड़ा मुद्दा है 🤔। मेरे अनुसार, इस तरह के आरोपों में कुछ गलत तो नहीं लगता, खासकर जब हम देखेंगे कि उनकी अदालत में दलित और अल्पसंख्यक समूहों के वकीलों को फायदा पहुंचाने के लिए विशेष ध्यान नहीं दिया गया है। यह एक बुरी प्रथा है जिसे हमें तोड़ने की जरूरत है। 🚫
 
ਮद्रास हाईकोर्ट ਦੀ ਗੱਲ ਹੈ, ਇੰਡੀਅਨ ਆਪਣੀ ਵਾਤ ਕਰਦਾ ਹੈ। ਜਸਟਿਸ ਸਵਾਮੀਨਾਥਨ ਦੇ ਬਾਰੇ ਇਸ ਮਾਮਲੇ ਵਿੱਚ ਕੁਝ ਗੱਲਾਂ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀਆਂ। ਮੈਨੂੰ ਲੱਗਦਾ ਹੈ ਕਿ ਇਸ ਅਪਵਿਤਰ ਹਰਕਤ ਨੂੰ ਕਬਜ਼ੇ ਕਰਨ ਲਈ, ਆਮ ਆਦਮੀ ਵੱਲ ਸੁਧਾਰ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ।
 
जस्टिस स्वामीनाथन पर महाभियोग नोटिस दाखिल करने की बात तो बहुत ही दिलचस्प है 🤔। मेरे लिए यह एक बड़ा मुद्दा है कि कैसे कोई व्यक्ति इतनी शक्ति पर कब्जा कर सकता है। जिस अदालत में खासतौर पर कुछ समुदायों को फायदा देने की प्रवृत्ति दिखाई गई है, वहां न्याय पूरी तरह से सुनिश्चित नहीं होता। मुझे लगता है कि इस मामले में किसी भी पक्ष की बिना सच्चाई ढूंढने की जरूरत है।
 
मैंने जस्टिस एम. स्वामीनाथन पर महाभियोग नोटिस दाखिल करने की खबर सुनकर, मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ 🤔। लेकिन फिर सोचते हुए, मुझे लगता है कि यह बहुत जरूरी है। जस्टिस स्वामीनाथन की अदालत में ब्राह्मण समुदाय के वकीलों को विशेष प्रस्ताव देने की समस्या को हल करने की जरूरत है, चाहे वह खासतौर पर उनके लिए नहीं बल्कि दलित और अन्य अल्पसंख्यक समूहों के लिए भी। इसके अलावा, विपक्षी दलों की आरोपों को देखने से, मुझे लगता है कि सरकार और वकीलों को अपने आप पर सख्ती से पेश करने की जरूरत है, चाहे उनके नाम में भ्रष्टाचार के आरोप लगने हैं या नहीं।
 
🤔 यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है । जस्टिस एम स्वामीनाथन पर महाभियोग नोटिस दाखिल करने की बात ही अच्छी नहीं है, लेकिन उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों में कुछ सच्चाई भी हो सकती है। हमें यह समझना चाहिए कि अदालत में जस्टिस स्वामीनाथन ने अपने फैसलों में ब्राह्मण समुदाय के वकीलों को फायदा देने वाली स्थितियाँ बनाई हैं। लेकिन यह नहीं कहा जा सकता है कि उन्होंने ब्राह्मणवाद को बढ़ावा दिया हो। हमें अपने न्यायपालिका की अखंडता पर ध्यान रखना चाहिए और इसके प्रति खुले दिमाग से। 🙏
 
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