BJP-Congress- AIMIM के गठबंधन को लेकर बड़ा बवाल, भाजपा सीएम बोले- ये तो नियमों का घोर उल्लंघन है

मुझे लगता है कि भाजपा की यह हरकत तेजी से देश को प्रभावित कर रही है। अगर हम अपनी पार्टियों में अनुशासन बनाए रखना चाहते हैं तो हमें सख्त कदम उठाने होंगे। 🤔

क्या सरकार ने यह नहीं सोचा था कि इससे विपक्षी दलों को भी प्रभावित किया जाएगा? और चुनाव में मतदाताओं की राय कैसे लेगी अगर ऐसी गड़बड़ी होती है? 🤷‍♂️

मुझे लगता है कि यह एक बड़ा मुद्दा है और हमें इस पर ध्यान देना चाहिए। इससे न केवल भाजपा बल्कि पूरे राजनीतिक व्यवस्था को प्रभावित होगा। 🚨
 
🤔 ये सब तो समझने का एक अच्छा मौका है। कुछ दिन पहले भी सोचा था कि भाजपा के नेता अपने पार्टी के नियमों का उल्लंघन करने के लिए किस तरह की तर्कसंगति कर सकते हैं। 🤷‍♂️ फिर भी, मुझे लगता है कि यह स्थिति बहुत गंभीर है और इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। 💪
 
अगर भाजपा संगठन को अपने पार्टी के नियमों का उल्लंघन करने के लिए मजबूर नहीं किया जाता, तो यह अच्छा होगा। उनके नेताओं को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि अगर वे किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन करते हैं तो इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इससे नेताओं को अपने निर्णय लेने में धैर्य रखने का समय मिलता है और वोटर्स को भ्रामक सूचनाएं नहीं मिलने देते हैं।
 
मुझे लगता है कि भाजपा नेताओं की यह दुर्भाग्यपूर्ण गतिविधि और मुख्यमंत्री फड़नवीस की बातचीत से मुझे कई सवाल तो उठते हैं। सबसे पहले, चुनाव में गठबंधन करना हमेशा आसान नहीं होता। यह जानने के लिए मुझे यह पता होना चाहिए कि इस नेताओं ने अपनी पार्टियों से अनुमति क्यों नहीं ली। और अगर उन्होंने कोई गलती की तो उनके खिलाफ कार्रवाई करने से पहले उन्हें समझाना चाहिए। इसके अलावा, यह सवाल उठता है कि भाजपा नेताओं को अपनी पार्टी के नियमों का पालन नहीं करने दिया गया। यह एक बड़ा मुद्दा है और आगामी चुनावों में इसका असर निकल सकता है।
 
यह तो एक बहुत बड़ा मुद्दा है 😬। भाजपा की यह हरकत से हमें लगता है कि उन्होंने अपने पार्टी के अनुसार चलने की बजाय अपने विरोधियों के साथ मिलकर काम करने का फैसला किया है। यह तो एक पूरी तरह से अनुशासनहीन व्यवहार है और इसके लिए जरूरी है कि उन्हें इस पर कार्रवाई की।

लेकिन सवाल यह है कि भाजपा ने अपने पार्टी के नियमों को तोड़ने के लिए क्या विचार किया था। क्या उन्हें लगता था कि इससे उनकी पार्टी को फायदा होगा? यानी यह सवाल हमेशा ऐसी स्थिति में आता रहता है जहां नेताओं को अपने विचारों के लिए खड़े होने की जरूरत होती है।
 
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