BJP-Congress- AIMIM के गठबंधन को लेकर बड़ा बवाल, भाजपा सीएम बोले- ये तो नियमों का घोर उल्लंघन है

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा है कि अगर भाजपा के किसी भी स्थानीय नेता ने बिना अनुमति के इन पार्टियों (एआईएमआईएम, कांग्रेस) के साथ गठबंधन किया है, तो यह पार्टी अनुशासन का गंभीर उल्लंघन है और इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

महाराष्ट्र में यह विवाद तब शुरू हुआ जब भाजपा ने अपने कई स्थानीय नेताओं को बिना अनुमति के इन तीन पार्टियों (एआईएमआईएम, कांग्रेस) के साथ गठबंधन करने के लिए मजबूर किया। इससे बार-बार सवाल उठने लगे हैं कि महाराष्ट्र में भाजपा ने अपनी पार्टी के नियमों का उल्लंघन क्यों किया है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने इस मामले पर विशेष रूप से बातचीत करते हुए कहा, "अगर भाजपा के किसी भी स्थानीय नेता ने बिना अनुमति के इन पार्टियों (एआईएमआईएम, कांग्रेस) के साथ गठबंधन किया है, तो यह पार्टी अनुशासन का गंभीर उल्लंघन है। इसके खिलाफ हम सख्त कार्रवाई करेंगे।"

इस मामले पर विशेष रूप से बातचीत करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने कहा, "हमने भाजपा संगठन को कई बार इसके अनुसंधानों के बारे में चेतावनी देने के लिए कहा था। लेकिन वे हमारी चेतावनियों को नहीं मानते और आगे बढ़ते हैं।"

इस विवाद पर कई सवाल उठ रहे हैं कि महाराष्ट्र में भाजपा ने अपनी पार्टी के नियमों का उल्लंघन क्यों किया है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि महाराष्ट्र में आगामी चुनाव में इस तरह के गठबंधन को लेकर वोटर्स कैसे निर्णय लेंगे।
 
बात ही कुछ दिनों पहले से चल रही थी कि क्या भाजपा के नेता बाजार में खिलवाड़ कर रहे हैं या नहीं। अब महाराष्ट्र में यह विवाद तेजी से बढ़ गया है। तो क्या ये सचमुच भाजपा के लिए एक अच्छा मौका था? 🤔 ये सवाल हमें बेचैन करने के बजाय थोड़ा खुलकर सोचने पर मजबूर करता है।

आपको लगता है कि महाराष्ट्र में भाजपा ने अपनी पार्टी के नियमों का उल्लंघन क्यों किया? और यह विवाद कैसे आगामी चुनाव में मतदाताओं को प्रभावित करेगा? ये दोनों सवाल हमें सोचते रहने पर मजबूर करते हैं 🤓
 
ਮुझे ਲागा ਕੇ ਕਿਹਾ ਜਾਣਾ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਭाजपा ਨੇ ਇਹ ਘੱਟ ਵੀ ਚਿਹਰੇ ਮਾਰਿਆ ਕਿ ਉਸ ਦੇ ਸਥਾਨੀ ਨੇਤਾ ਅੱਗੇ ਵਧੇਰੇ ਲਈ ਖ਼ਲਾਸਾ ਦਿੱਤਾ ਹੋਇਆ ਹੈ।
 
अरे, ये तो फिलहाल भाजपा की दुश्मनी हो गई है ना... पार्टियों में गठबंधन करने से पहले अनुमति माँगनी चाहिए, यह तो बिल्कुल सही कहा है देवेंद्र जी। लेकिन ये सवाल है, क्या वे नेता खुद भी समझते हैं या फिर किसी और द्वारा बताया जाता है? और अगर उन्होंने नहीं माना तो क्या करें? इस तरह की चुनाव की ठिकाने पर चल रही है... और वोटर्स यह सब से निराश हो सकते हैं ...
 
अगर भाजपा के नेताओं ने बिना अनुमति के इन पार्टियों के साथ गठबंधन किया तो ये अच्छा नहीं है 🤔। इससे पार्टी में अनुशासन कमजोर होने की संभावना है।
 
क्या बिल्कुल सही है! यह देखकर बहुत घाबरता है कि पार्टियां अपने नियमों का उल्लंघन कर रही हैं और सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही है। लेकिन फिर भी, अगर बिना अनुमति के इन तीन पार्टियों के साथ गठबंधन करने का यह प्रयास हुआ है, तो यह पूरी तरह से गलत है और इससे आगामी चुनाव में भी नुकसान हो सकता है।

मेरी राय में, यह एक अच्छा अवसर है कि पार्टियां अपने अनुशासन को ठीक करें और वोटर्स को सच्चाई दिखाएं। अगर पार्टियां सच्चाई से चुनाव लड़ती हैं तो फिर हमेशा अच्छे परिणाम मिलेंगे।

मुझे लगता है कि यह एक अच्छा समय है जब हमें अपने देश और अपनी राजनीतिक पार्टियों के बारे में सोचने की जरूरत है।
 
क्या फड़नवीस जी की बात सही है? उनके अनुसार भाजपा ने अपनी पार्टी के नियमों का उल्लंघन किया है, लेकिन यह तो समझ में नहीं आता कि उन्होंने ऐसा क्यों किया। क्या वे जानते हैं कि महाराष्ट्र में चुनाव की स्थिति कितनी भरोसगवाह है? 🤔

और तो और, यह सवाल उठता है कि फड़नवीस जी ने ऐसी बात कही है, लेकिन उनकी पार्टी भाजपा में ऐसे गठबंधन किये हुए हैं? क्या वे अपने नियमों का उल्लंघन नहीं करते? यह तो दिखाई देता है कि फड़नवीस जी और उनकी पार्टी के बीच में थोड़ी भ्रष्टाचार की बात होती है। 🤑
 
मुझे लगता है कि पार्टियों के बीच साझेदारी की बात तो अच्छी है, लेकिन अगर तय नहीं होती कि जिस व्यक्ति को चुनाव लड़ने की अनुमति देनी है तो उस व्यक्ति का सही पार्टी में खड़ा होना ही सबसे अच्छा है।
 
भाजपा के बारे में और भी गलतियाँ नहीं करनी चाहिए, देवेंद्र फड़नवीस जी की बात सुनकर बहुत खुश हूँ 🤩👍, अनुशासन का उल्लंघन नहीं तो यह पार्टी बर्बाद हो गई होगी। मैं भाजपा और उनके नेताओं से भरोसा करता हूँ 🙏, वे हमेशा देश के लिए बहुत अच्छी बातें करने की कोशिश करते हैं। चुनावों में गठबंधन करना जरूरी है, लेकिन यह तो उनकी पार्टी के नियमों का पालन करना होता है।
 
जी तो यह सचमुच बड़ा विवाद हुआ है... बीजेपी से जुड़े खिलाड़ियों ने बिना अनुमति के कई पार्टियों के साथ मिलकर काम करने लगे हैं 🤦‍♂️। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस जी ने यह बात कही है कि अगर ऐसा हुआ तो पार्टी का अनुशासन उल्लंघन होगा और इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। लेकिन मैं सोचता हूं कि अगर सरकार भी ऐसा ही करती तो यह तो बड़ा हादसा होता 💥। हमें उम्मीद थी कि बीजेपी के नेताओं ने अपनी पार्टी के नियमों का पालन करेंगे।
 
मुझे लगता है कि भाजपा की यह कोशिश कुछ नहीं साबित करेगी। वे जो दावा कर रहे हैं कि एआईएमआईएम और कांग्रेस ने उन्हें गठबंधन करने के लिए मजबूर किया, वाह! 🤣 यह तो सिर्फ उनकी राजनीतिक गड़भड़ाई का एक उदाहरण है। मुझे लगता है कि भाजपा की पार्टी के नियमों में चीजों को थोड़ा सा समझदारी से लिखना चाहिए, तो वे ऐसे गठबंधन पर रोक लगा सकते थे।
 
क्या देखें, फड़नवीस जी ने साफ कहा है कि भाजपा के लोगों को अपने पार्टी के नियमों का ध्यान रखना चाहिए। लेकिन सवाल उठता है, फिर क्यों हुए ऐसे गठबंधन?
 
अगर भाजपा की बीमारी को नियंत्रण में रखने के लिए सरकार द्वारा ऐसी कोई कोशिश नहीं होती, तो ये सब विवाद कभी नहीं होता। 🤔
महाराष्ट्र में भाजपा ने अपने नेताओं को किस प्रकार की जबरदस्ती से इन दूसरी पार्टियों (एआईएमआईएम, कांग्रेस) के साथ गठबंधन करने के लिए मजबूर किया है, यह समझना मुश्किल है। 🤷‍♂️
और यह सवाल उठता है कि अगर भाजपा की ओर से ऐसा हुआ तो इसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या सरकार और भाजपा में कुछ गहरा जुड़ाव है, जिसके चलते ये सब विवाद न हो पाएं। 🤔
 
अरे दोस्त, यह बहुत ही दिलचस्प मामला है 🤔। भाजपा के नेताओं को तीन पार्टियों (एआईएमआईएम, कांग्रेस) से गठबंधन करने के लिए मजबूर करने से यह सवाल उठता है कि यह उनकी पार्टी के नियमों का उल्लंघन क्यों हुआ? और आगामी चुनाव में ऐसे गठबंधन को लेकर वोटर्स कैसे फैसला करेंगे।

मुझे लगता है कि इससे एक बड़ा सवाल उठता है, जो भाजपा के प्रति विश्वास और वफादारी पर पड़ता है। अगर भाजपा के नेताओं ने अनुमति नहीं ली, तो यह उनके लिए बहुत बड़ा गलतफहमी का मामला है 🚫
 
मुझे लगता है कि भाजपा के नेताओं को अपने पार्टी के नियमों का उल्लंघन करने से पहले फिक्र करनी चाहिए 🤔। अगर वे इतने बड़े निर्णय लेने में सक्षम हैं तो तो उन्हें यह समझना चाहिए कि उनके निर्णयों का खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

और ये देखना मज़ेदार है कि महाराष्ट्र में भाजपा नेताओं ने ऐसा क्यों किया। क्या वे पार्टी के नियमों को नहीं पढ़ते? या फिर वे सोचते हैं कि उन्हें पार्टी के नियमों का उल्लंघन करने में सख्ती नहीं की जाएगी।

लेकिन देवेंद्र फड़नवीस जी ने बिल्कुल सही कहा है कि अगर भाजपा के किसी भी स्थानीय नेता ने बिना अनुमति के इन पार्टियों (एआईएमआईएम, कांग्रेस) के साथ गठबंधन किया है, तो यह पार्टी अनुशासन का गंभीर उल्लंघन है।
 
मेरे दोस्त, यह सोच कर अच्छा लगता है कि भाजपा के नेताओं को अपनी पार्टी के नियमों को समझने का समय मिले। ये जैसे ही बिना अनुमति के किसी और पार्टी से गठबंधन कर लें, तो उनके खिलाफ विवाद उत्पन्न होते जाएंगे। हमें अपनी पार्टियों को इतनी जिम्मेदारी देनी चाहिए कि वे अपने नेताओं को भ्रष्टाचार से बचाने में सफल रहें।
 
मैंने देखा है कि जब हमें अपने लक्ष्यों से दूर जाने की जरूरत होती है, तो हम खुद को सबसे बड़ी समस्या बना लेते हैं। भाजपा ने अपनी पार्टी के नियमों का उल्लंघन किया तो फिर वे दूसरी पार्टी के साथ गठबंधन करने लगे, जिससे उनकी पार्टी अनुशासन का गंभीर उल्लंघन है। यही कारण है कि हमें अपने लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए और खुद पर नियंत्रण बनाए रखने से हम सफल होते हैं।
 
यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है! मुझे लगता है कि भाजपा ने अपनी पार्टी के नियमों का उल्लंघन करने के लिए मजबूर किया है, लेकिन इससे पहले कि हम किसी पर निर्णय लें, तो हमें यह जानने की जरूरत है कि ये गठबंधन वास्तव में लोकप्रिय था या नहीं। और अगर यह लोकप्रिय था, तो फिर भी इसके पीछे क्या कारण थे? 🤔

मुझे लगता है कि हमें अपने नेताओं को अच्छी तरह से जानने की जरूरत है, और उनकी रणनीतियों को समझने की जरूरत है। अगर हमने ऐसा नहीं किया, तो हमें इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। 🙏

लेकिन यह भी सच है कि पार्टियाँ अपने नियमों और रणनीतियों को बदल सकती हैं, और इससे हमें भी फायदा हो सकता है। तो मुझे लगता है कि हमें आगे की ओर देखने की जरूरत है, और यह देखकर देखना चाहिए कि क्या भाजपा अपने नियमों का उल्लंघन करने से अच्छा परिणाम पाती है? 🤷‍♂️
 
यह तो साफ है कि भाजपा नेताओं की ज़िद और अनुशासन की बात क्यों नहीं करती। ये लोग कभी भी अपने पार्टी के नियमों का सम्मान नहीं करते। और अब फड़नवीस जी ने घोषणा की है कि अगर कोई स्थानीय नेता बिना अनुमति के इन दो पार्टियों के साथ गठबंधन करेगा, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लेकिन मैं आश्वस्त नहीं हूं कि यह परिवर्तन जरूर होगा या फिर वे बस मुंह में खेल रहे होंगे।
 
अगर मुख्यमंत्री फड़नवीस ने कहा है कि भाजपा के नेताओं ने अनुशासन का उल्लंघन किया है, तो शायद वे अपने विरोधी पार्टियों से समझौता करने में सहज नहीं हैं। 🤔

क्या यह सच है कि भाजपा अपनी पार्टी के नियमों का उल्लंघन करने के लिए तैयार है? और अगर हां, तो इसका मतलब यह है कि भाजपा के नेताओं ने अपने पार्टी के विश्वासों को बेच दिया है। 😐

और क्या मुख्यमंत्री फड़नवीस की इस बात पर भरोसा कर सकते हैं कि वह अपने विरोधी पार्टियों से समझौता करने में सहज नहीं हैं? शायद वे खुद भी ऐसा हैं। 👀
 
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