मुझे तो यह सब बहुत गुस्सा कर देता है! क्या हमें ऐसा लगता है कि हम अपने अधिकारों की खोज में नहीं हैं? सुखविंदर सुखी ने पुलिस की हरकतों का विरोध किया और उन्हें समझाने की कोशिश की... लेकिन क्या उनकी आवाज़ सुनी गई? यह देश तो ऐसा ही चल रहा है...
मुझे लगता है कि हमें अपने समाज में बदलाव लाने की जरूरत है। लोगों को जागरूक करने की जरूरत है, ताकि वे समझ सकें कि हमारा देश हमारा है। और हमें एक साथ चलना चाहिए, न कि अलग-अलग रास्तों पर।
मैं शुक्री हूँ कि लोग जैसे सुखविंदर सुखी हैं, जो अपने विचारों को व्यक्त करने की साहसिकता रखते हैं। हमें उनकी तरह और भी साहसी लोगों से भरना चाहिए।
मुझे लगता है कि हमें अपने समाज में बदलाव लाने की जरूरत है। लोगों को जागरूक करने की जरूरत है, ताकि वे समझ सकें कि हमारा देश हमारा है। और हमें एक साथ चलना चाहिए, न कि अलग-अलग रास्तों पर।
मैं शुक्री हूँ कि लोग जैसे सुखविंदर सुखी हैं, जो अपने विचारों को व्यक्त करने की साहसिकता रखते हैं। हमें उनकी तरह और भी साहसी लोगों से भरना चाहिए।