DU में एडमिशन का बदला तरीका, मैनेजमेंट कोर्सों के लिए अब इतने सब्जेक्ट जरूरी, जानें पूरा प्लान

दिल्ली यूनिवर्सिटी ने मैनेजमेंट से जुड़े कोर्सों में दाखिले की पात्रता शर्तों में बदलाव किया है. अब छात्रों को चार विषयों के सीयूईटी स्कोर के आधार पर प्रवेश लेना होगा, न कि तीन विषयों के सीयूईटी स्कोर के आधार पर. यह बदलाव इतना बड़ा है कि हजारों छात्रों की रणनीति बदल सकता है.

अगर पिछले वर्ष की तरह, छात्रों को एक भाषा विषय, गणित और जनरल टेस्ट के सीयूईटी स्कोर पर आधार पर मेरिट में शामिल करने जाना था, तो अब उन्हें एक अतिरिक्त विषय को देखना होगा. अब छात्रों को एक भाषा, गणित, एक डोमेन सब्जेक्ट और जनरल टेस्ट कुल चार विषयों के सीयूईटी स्कोर पर आधार पर मेरिट में शामिल करना होगा.

इस बदलाव ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में मैनेजमेंट और बिजनेस से जुड़े कोर्सों में दाखिले के लिए छात्रों की डोमेन नॉलेज बहुत जरूरी है. केवल भाषा और गणित से ही छात्र की तैयारी का पूरा आकलन नहीं हो पाता. इसलिए, एक अतिरिक्त विषय को जोड़ा गया है ताकि यह देखा जा सके कि छात्र अपने चुने हुए क्षेत्र को कितनी अच्छी तरह से समझते है.
 
वाह! ये बदलाव बहुत बड़ा है और इसका अर्थ है छात्रों को अपने कौशलों को और भी अच्छी तरह से प्रदर्शित करने का मौका मिलेगा 😊. अब दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रवेश लेने के लिए छात्रों को अपनी समझदारी और डोमेन नॉलेज का प्रदर्शन करना होगा, जो बहुत अच्छा है 💡. इससे हमें पता चलेगा कि कौन सा विषय में वे खास रुचि रखते हैं और उनकी समझ भी कितनी गहरी है 🤓.
 
बिल्कुल, ये बदलाव एक अच्छा कदम है... अब भी छात्रों को पूरी तरह से तैयार नहीं करने देना चाहिए, लेकिन कम मेहनत करने वालों को रोकने में मदद कर रहा है. 🤝

मेरा ये मानना है कि इस बदलाव ने हमें यह सोचने पर मजबूर किया है कि केवल भाषा और गणित जैसी बुनियादी चीजों से ही किसी की तैयारी हो पाती है, लेकिन ये दिल्ली यूनिवर्सिटी में मैनेजमेंट और बिजनेस से जुड़े कोर्सों में वास्तविक दुनिया की जरूरतों को समझने में मदद करता है.

अब छात्रों को अपने विषय चुनने के लिए और अधिक सावधानी से विचार करना चाहिए, ताकि वे अपने गंभीरता से अपने सपनों को पूरा कर सकें.
 
मुझे लगता है कि ये बदलाव बहुत ही उपयुक्त है. अगर पिछले वर्ष जैसे तीन विषयों पर आधारित मेरिट सिस्टम में छात्रों को एक भाषा विषय, गणित और जनरल टेस्ट के आधार पर शामिल करने जाना था, तो अब यह बदलाव ही सही है. चूंकि दिल्ली यूनिवर्सिटी में मैनेजमेंट से जुड़े कोर्सों में छात्रों को अपने डोमेन नॉलेज को अच्छी तरह से समझने की जरूरत है, इसलिए एक अतिरिक्त विषय जोड़ना बिल्कुल सही है.
 
यह बदलाव बहुत ही रोचक है, लेकिन मुझे लगता है कि यह एक नए दिशानिर्देशों की शुरुआत है। पहले तो छात्रों को कम स्कोर पर भी प्रवेश मिल सकता था, लेकिन अब यह बदल गया है और उन्हें अपने डोमेन नॉलेज पर ज्यादा ध्यान देना होगा। इससे साफ होता है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में मैनेजमेंट से जुड़े कोर्सों में छात्रों को अपने विषयों में और मजबूत होने की आवश्यकता है। 😊
 
क्या ये बदलाव बहुत ही सही मायने में लाया गया है? पहले तो छात्रों को सिर्फ एक भाषा विषय और गणित पर आधार पूरा करना पड़ता था, अब चार विषयों को देखना होगा... यह जरूर एक अच्छी बात है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी ने छात्रों की डोमेन नॉलेज पर ध्यान दिया है, लेकिन फिर भी कुछ सोचेंगे कि अगर मेरी तैयारी अच्छी नहीं थी, तो मैं चार विषयों को नहीं पास कर सकता। 😐
 
माने तो अब यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए छात्रों को दोहराव करना पड़ेगा, चार विषयों को हलाना होगा 😂🤣 यह तो एक नई रणनीति है! पहले तो एक सीटी थी, अब दो! जिंदगी में भी ऐसा ही होता है, एक बार फिर से शुरू करना पड़ता है। लेकिन सादे सच्चाई की बात कहें, यानी यह बदलाव इतना बड़ा है कि छात्रों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ेगी। मेरी सोच है कि अब यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए छात्रों को अपनी डोमेन नॉलेज पर ध्यान देना चाहिए।
 
बड़ा बदलाव आया है डिल्ली यूनिवर्सिटी में... 🤔 अब तीन विषयों के बजाय चार विषयों पर देखा जाएगा. यह कैसा है? दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्रों को कमर्स से जुड़े कोर्स लेना चाहते हैं तो उन्हें एक अतिरिक्त विषय देखना पड़ेगा... 📚 क्या यह अच्छा विचार था या नहीं?
 
मुझे लगता है कि ये बदलाव मैनेजमेंट कोर्सों में छात्रों की तैयारी को देखने के तरीके को बदलने की कोशिश कर रहे है. लेकिन, मैं सोचता हूँ कि यह बदलाव छात्रों की रणनीतियों पर अधिक दबाव डाल सकता है और उन्हें अपने विषयों को अच्छी तरह से चुनने के लिए मजबूर कर सकता है. 🤔
 
बड़ा बदलाव आ गया है दिल्ली यूनिवर्सिटी में! अब चार विषयों के सीयूईटी स्कोर पर आधार पर मेरिट में शामिल होना होगा, न तीन विषयों का सीयूईटी स्कोर पर आधार. यह बदलाव तो छात्रों की रणनीति से लेकर पूरी तरह से दाखिले तक बिगड़ गई तो है 🤯। इससे पहले एक भाषा, गणित, और जनरल टेस्ट का सीयूईटी स्कोर पर आधार मेरिट में शामिल होना था, लेकिन अब एक अतिरिक्त विषय को देखना होगा। यह बदलाव तो डोमेन नॉलेज को देखकर आए है कि छात्र अपने चुने हुए क्षेत्र को कितनी अच्छी तरह से समझते हैं। 👍
 
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