गजनवी ने सोमनाथ शिवलिंग के टुकड़े मस्जिद में लगवाए: 6 टन सोना लूटा; नेहरू मंदिर बनवाने के इतने खिलाफ क्यों थे

महमूद गजनवी की लूट, बाद में नरेन्द्र मोदी के सोमनाथ जाएं

महमूद गजनवी ने 1026 में सोमनाथ पहुंचा था, जिसके 1000 साल पूरे होने पर उन्होंने अपने आखिरी हमले के लिए कश्मीर, मथुरा और ग्वालियर को चुना। उसके साथ 30 हजार घुड़सवार और हजारों पैदल सैनिक थे।

15 दिन तक मारकाट और लूटपाट करने के बाद गजनवी वापस लौटा, तो उसके पास 6 टन से ज्यादा सोना था। सोमनाथ में 50 हजार से ज्यादा लाशें और खंडहर बन चुका हुआ मंदिर था।

गजनवी के बाद भी सोमनाथ मंदिर कई बार तोड़ा गया, फिर बनाया गया। आखिरी बार 75 साल पहले सरदार पटेल ने इसे बनाया था।
 
बेटियों को पढ़ाई करनी चाहिए ताकि वे इतिहास के बारे में पता कर लें कि कैसे हमारे देश पर बहुत से आक्रामक हमले हुए हैं और कैसे हमने उनसे लड़ाई जीती। मुझे लगता है कि हमें अपनी ऐतिहासिक स्मृतियों को समझने की जरूरत है ताकि हम उनकी सीख ल सकें।
 
मैंने पढ़ा की कश्मीर, मथुरा और ग्वालियर जैसे शहर जो अजनबी होते दिखाई देते हैं, वास्तव में भारतीय इतिहास का हिस्सा हैं। यह सोच कर मुझे लगता है की हमारी ऐतिहासिक पहचानों को समझने की जरूरत है। मैं समझ नहीं पाया की 1000 साल पहले कैसे इतने भीड़भाड़ वाले हमलावर थे जिन्होंने अपने लक्ष्य पर हमला कर दिया। और फिर सोमनाथ मंदिर को इतना नुकसान पहुंचाया, अब यह समझना की हमें भविष्य में ऐसी हिंसक घटनाओं को रोकने के लिए कैसे तैयारी करें, यह महत्वपूर्ण है।
 
मुझे लगता है कि हमें अपने इतिहास को समझना चाहिए, लेकिन आजकल हर जगह देखने को मिलता है कि हमारी इतिहास को क्यों भूल रहे हैं। सोमनाथ जैसे प्राचीन मंदिरों की लूट और तोड़फोड़ को लेकर बहुत बातें नहीं होती हैं, लेकिन यह सच है कि हमारा इतिहास बहुत ही जटिल है।

मुझे लगता है कि अगर हम अपने प्राचीन मंदिरों और स्थलों को बनाए रखने के लिए एक साथ मिलकर काम करें, तो हम उन्हें फिर से ताज़ा कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए हमें अपनी समृद्धि और संस्कृति को समझना होगा। 🏛️💫
 
मुझे लगता है कि यह कहानी बहुत ही दिलचस्प है! मैंने कभी नहीं सोचा था कि गजनवी इतने बड़े हमले को करने के लिए तैयार था। 30 हजार घुड़सवार और हजारों पैदल सैनिक, वाह! यह तो बहुत ही खतरनाक लग रहा है। और मंदिर में 50 हजार से ज्यादा लाशें और खंडहर बन चुका हुआ दृश्य... यह तो बहुत ही दर्दनाक लगता है।

मुझे लगता है कि हमें गजनवी की कहानी को याद रखना चाहिए, ताकि हम अपने ऐतिहासिक परंपराओं और संस्कृतियों को समझ सकें। और मंदिरों की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।
 
मुझे लगता है कि हमें अपने ऐतिहासिक स्थलों को समझने और उनकी महत्ता को पहचानने की जरूरत है। सोमनाथ मंदिर की कहानी बहुत पुरानी है, और यह सच है कि कई बार इसे तोड़ा गया है, लेकिन फिर भी इसका महत्व बना हुआ है।

मुझे लगता है कि हमें अपने ऐतिहासिक स्थलों को बचाने के लिए और उनकी देखभाल करने की जरूरत है। सोमनाथ मंदिर की कहानी न केवल इतिहास की बात करती है, बल्कि यह हमें अपने पर्वार्तक विरोधियों से शांति और समझौते की दिशा में चलने की प्रेरणा भी देती है 🙏

लेकिन, मुझे लगता है कि हमें अपने ऐतिहासिक स्थलों को बचाने के लिए और उनकी देखभाल करने की जरूरत है, ताकि भविष्य की पीढ़ियाँ भी उन्हें देख सकें और उनका आनंद ले सकें। हमें अपने ऐतिहासिक स्थलों को एक महत्वपूर्ण संस्कृति का हिस्सा मानकर उनकी देखभाल करनी चाहिए।
 
मुझे लगता है कि हमें अपने ऐतिहासिक स्थलों को बचाने की कोशिश करनी चाहिए, खासकर जब वे इतने पुराने और महत्वपूर्ण होते हैं। अगर हमारे मंदिरों और स्मारकों का ख्याल न रखें तो हमारी सांस्कृतिक धरोहर भी खत्म हो सकती है।

सोमनाथ के मामले में यह बात समझ में आती है, लेकिन अगर हम वहाँ जाकर एक अच्छा प्रबंधन करें तो वहाँ पर सांस्कृतिक महत्व और आधुनिकता को मिलाने की कोशिश करनी चाहिए।
 
मुझे लगता है कि हमें अपने इतिहास को समझने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि हम यह जान सकें कि हमारे देश पर कब और क्यों हमला किया गया। मैं सोचता हूँ कि अगर हमारे पूर्वजों ने इतनी ताकत और संगठितता कैसे बनाई, तो फिर आज हम यहाँ खड़े हैं। लेकिन फिर भी, यह सवाल उठता है कि क्या हमें अपने भविष्य के लिए तैयार हैं? मुझे लगता है कि हमें अपने परंपराओं और इतिहास से सीखने की जरूरत है, ताकि हम अपने देश को मजबूत बना सकें। 🤔
 
मैं समझता हूँ कि हमारे देश की ऐतिहासिक परिस्थितियाँ जितनी भी दुखद और हिंसक लगन, उतनी ही महत्वपूर्ण भी हैं। लेकिन फिर भी, मुझे लगता है कि हमें गजनवी की घटनाओं से निकलना चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए। 1000 साल पहले जो ऐसा हुआ था, वह हमारे इतिहास का एक नकारात्मक अध्याय है, लेकिन हमें उसे याद रखने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए।

हमें अपने देश की समृद्धि और संस्कृति पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि उसकी दर्दनाक पृष्ठभूमि पर। हमें अपने मंदिरों और ऐतिहासिक स्थलों की रक्षा करनी चाहिए, लेकिन उनकी रखवाली में भी एक नई दिशा ढूंढनी चाहिए जो शांति और एकता पर आधारित हो।

मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि हम अपने इतिहास को भूल सकते हैं, बल्कि हमें उसे सीखना और समझना चाहिए, ताकि वह कभी फिर न हो।
 
😒 ये सब मजाक है! हम तो यहाँ अपने देश की ऐतिहासिक घटनाओं पर चर्चा कर रहे हैं लेकिन फिर भी वीडियो में कोई सोमनाथ जैसा मंदिर नहीं दिखाई देता। और ये सब महमूद गजनवी की कहानी तो पूरी तरह से भूल गया है। 15 दिन तक लूटपाट करने के बाद भी, उनके पास इतना सोना था? क्या हमें लगता है कि यहाँ पर ऐतिहासिक तथ्यों को धुंधला कर देने की जरूरत है? 🤦‍♂️
 
बात सोमनाथ मंदिर की हो रही है... लगता है कि हमें अपने ऐतिहासिक देश की सच्चाई को समझने की ज़रूरत है। अगर हम गजनवी की यात्रा पर ध्यान दें, तो हम देखते हैं कि उनका हमला सिर्फ एक ही मकसद से नहीं था। वे न केवल लूटपाट कर रहे थे, बल्कि उन्होंने स्थानीय समुदाय के साथ भी गलतियाँ कीं।

और फिर, जैसे हमें पता चला है, नरेन्द्र मोदी ने यहाँ आकर पूजा-अर्चना कर रहे थे। लेकिन, मुझे लगता है कि यह वही दौर नहीं है। अगर हम सोमनाथ को एक ऐतिहासिक स्थल के रूप में देखें, तो हमें इसकी सच्चाई को समझने की ज़रूरत है, न कि इसकी पूजा-अर्चना करने की।
 
मुझे यह जानकारी बहुत दुखद लग रही है... सोमनाथ मंदिर पर इतना विनाश क्यों हुआ? हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यह मंदिर किसी व्यक्ति या समूह के आक्रामक कार्यों का शिकार नहीं हुआ, बल्कि इतिहास का एक हिस्सा है। हमें अपने गौरव और संस्कृति को बनाए रखने में मदद करने के लिए एक दूसरे पर भरोसा करते हैं। हमें यह सीखना चाहिए कि हमारी भारतीयता और हिंदुत्व को केवल एक धर्म या समूह के नाम पर नहीं घेरना चाहिए, बल्कि सभी के लिए एक विशाल प्यार और सौहार्द की भावना। 🤗💕
 
मैं समझ नहीं सकता कि इतनी देरों तक यह मंदिर खत्म हो गया। पहले तो मुझे लगता है कि हमें अपने ऐतिहासिक स्थलों पर और भी जोर देना चाहिए। याद रखें, सोमनाथ मंदिर बहुत पुराना है, 1000 साल पहले यहां इतनी बड़ी संख्या में लोग लूटपाट करने के लिए आईं, और आज भी ऐसा ही होता जा रहा है। मुझे लगता है कि हमें अपने इतिहास को समझने की जरूरत है, ताकि हम आगे चलकर ऐसे हमलों से बच सकें। 🤔
 
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