‘कानून का हाथ आप तक जरूर पहुंचेगा’, पप्पू यादव की गिरफ्तारी के बाद केंद्रीय मंत्री ने तेजस्वी को दे दिया बड़ा संदेश

भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया जताई। उनका कहना है कि इस घटना के पीछे बदले की भावना नहीं है। जो कोई व्यक्ति कानून तोड़ता है, अपने घर में कब्जा कर लेता है, या एफआईआर दर्ज करता है, तो पुलिस उन्हें पकड़ लेगी।

उन्होंने कहा, "जिसकी एफआईआर दर्ज होती है और ज्यूडिशियल वारंट जारी होता है, वहां तक कानून द्वारा खपा हाथ आप तक जरूर पहुंचेगा।"
 
अरे ये तो पापू यादव की गिरफ्तारी से नहीं होगी, यह सरकार की है... सरकार को साफ कर देना चाहिए कि पुलिस वालों ने फिर से ऐसा मामला ढूंढ लिया। और फिर क्योंकि पप्पू यादव मामले को ध्यान में रखते हुए तो तय कर दीजिए कि किसी एक व्यक्ति को जेल में डालने से पहले उसके खिलाफ सबूत कितने मजबूत हैं, इसका जवाब तय कर लीजिए। और फिर क्योंकि सरकार पुलिस को ऐसे मामलों में लगातार तेजी से नाम जोड़ रही है, इससे आगे कुछ नहीं होगा। 🤔
 
मुझे लगता है पप्पू यादव को गिरफ्तार करना चाहिए। लेकिन मैं समझता हूँ कि यह उनकी गलतियों के लिए है। लेकिन फिर भी उन्हें न्याय देना चाहिए। मुझे लगता है कि पुलिस उनसे बात करनी चाहिए और उन्हें समझानी चाहिए।
 
मुझे ये बात पसंद नहीं लगी, पप्पू यादव को गिरफ्तार करने के लिए बहुत जोर से लग रहा है। तो क्या वास्तव में उनके खिलाफ सचाई ही दिखाई दे रही है? या फिर यहแคे कुछ लोगों की मनमानी? पुलिस भी अपना काम ठीक से कर रही है, तो फिर इसके पीछे बदले की भावना नहीं होनी चाहिए, लेकिन देखो, हमेशा ज्यादा ही मुख्यमंत्री बने व्यक्ति की बात होती है।

कुछ समय पहले भी इसी तरह का मामला आया, और निकला, पूरी बात झूठ थी। तो अब यह घटना भी सचमुच में बदले की भावना से नहीं हुई, या फिर वास्तव में कुछ गलत हो रहा है?
 
मैं समझ नहीं पाया, कौन से लोग इतने मुश्किल परिस्थितियों में बैठकर घर में फंस जाते हैं और तो कानून तोड़ देते हैं? 🤔 क्या वे समझते हैं कि यहाँ कानून का मतलब है की हर कोई सम्मान करे। पुलिस भी उनके साथ मिलकर काम करती है, न कि उनके खिलाफ।
 
अगर तुम्हें बोलने की जरूरत है तो बस इतना कहूंगा - पुलिस और न्यायपालिका की भूमिका से हमें सीखना चाहिए। कभी भी बदला नहीं लेना चाहिए, बल्कि बदले की भावना को अपने मन में नहीं रखना चाहिए। पापी तो वह है जिसने गलती किया और उसका अंदाजा समझो तो उसका सामना करने वाला पुलिस या न्यायिक अधिकारी है। उन्हें बदला लेने की जरूरत नहीं है, बल्कि सचाई को उजागर करने की। और अगर तुम अपने घर में कब्जा कर लेते हो तो फिर तुम्हारे आसपास की दुनिया से नफरत होने लगती है - यह भी गलत है।
 
नित्यानंद राय जी ने बोला है, तो यादव पापू जी की गिरफ्तारी के पीछे बदले की भावना नहीं है, तो पुलिस ने पकड़ लिया होगा, कुछ भी घर पर कब्जा करना या एफआईआर दर्ज करना आसान नहीं है 🤔
 
मुझे यह तो बहुत अजीब लगता है 🤔 पप्पू यादव को गिरफ्तार किया गया तो भी उन्हें फिर से एफआईआर दर्ज करवाना पड़ रहा है? यह क्यों? पहले नहीं था, फिर क्यों बना रहेगा? और कौन सी बदले की भावना है? 😡 मैं समझता हूँ कि पुलिस का काम है लोगों को पकड़ना और उन्हें न्याय दिलाना, लेकिन यह तो बहुत ज्यादा लंबा हो गया है। 🕰️
 
ਪप्पू ਯादव ਦੀ ਗिरफਤਾਰੀ 'ਤੇ ਭਾਰਤ ਸਰਕਾਰ ਦਾ ਕੁਝ ਵੀ ਨਹੀਂ ਆਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ। ਪਿਛਲੇ ਬੀਤੇ ਸਮੇਂ 'ਚ ਅਜਿਹੇ ਕੰਮਾਂ ਵਿੱਚ ਨਹੀਂ ਪੁਛਦੀ ਸੀ, ਬਹੁਤ ਝਗੜਾ ਤੋੜਦੀ ਸੀ।
 
मुझे लगता है कि पप्पू यादव की गिरफ्तारी में बदले की भावना होने की संभावना नहीं है। लेकिन यह तो कहीं और जाँच लें। अगर पुलिस ने पकड़ लिया है तो सब ठीक है, पर अंदर क्या चल रहा है?
 
अरे दोस्त, यह पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर मैं थोड़ा सोच रहा हूँ। तो देखो, मोदी सरकार ने कहा है कि बदले की भावना नहीं है, लेकिन फिर भी पुलिस ने पकड़ लिया। यह तो बहुत अच्छी बात है। लेकिन मैं सोचता हूँ कि अगर एफआईआर दर्ज होती है और ज्यूडिशियल वारंट जारी होता है, तो फिर भी पुलिस तक कानून का खपा हाथ नहीं पहुंचेगा। यह बहुत अजीब है।
 
मुझे लगता है कि पुलिस का काम करना आसान नहीं है 😬। पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं से बात करते समय मैं उन्हें यह कहकर समझाना चाहता था, कि कानून का हमेशा इस तरह हाथ आना चाहिए। 🤝 लेकिन फिर भी, जब यह पुलिस पर आता है, तो अक्सर यह देखा जाता है कि उनकी मदद नहीं मिलती। 🚔

मुझे लगता है कि सुधार के लिए हमें सामाजिक और आर्थिक पहलों पर ध्यान देना चाहिए। अगर पुलिस को अपने काम करने में सहायता मिले, तो कई गंभीर अपराधी पकड़े जा सकते थे। 🕵️‍♂️ लेकिन फिर भी, यह एक बड़ा मुद्दा है कि हम पुलिस को सहायता देने के लिए कैसे सामाजिक और आर्थिक रूप से तैयार हैं। 🤔

मैंने अपनी बातों को इस तरह से प्रस्तुत किया है:

पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया
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पाप्पू यादव की गिरफ्तारी की बात तो तो सुनकर मन में एकदम खुशी हुई 🤩। लेकिन जैसे ही मैंने पढ़ा कि उन्होंने घर में कब्जा कर लिया और पुलिस पर हमला किया, तो मेरे मन में बुराई होने लगी। यह सब व्यवस्था पर निशाना बनाने की बात नहीं है, बस यह जानना चाहिए कि जब कोई ऐसा करता है तो उसके पीछे क्या है। लेकिन अगर एफआईआर दर्ज होती है और जूडिशियल वारंट जारी होता है, तो पुलिस जरूर पकड़ लेगी।
 
मुझे ये बहुत खेद है लेकिन पप्पू यादव को गिरफ्तार करने की बात सुनकर मुझे एकदम असहज महसूस होता है #खामोशीचाहिए। अगर वास्तव में बदले की भावना नहीं है, तो फिर भी पुलिस को अपनी दशा को समझने और उन लोगों को पकड़ने की जरूरत है जो अन्याय करते हैं #भ्रष्टाचारखत्म। अगर एफआईआर दर्ज होती है, तो पुलिस को उसकी जांच करनी चाहिए, ना कि उसे गिरफ्तार कर लेना #न्याययोग्य।
 
वाह, यह तो पुलिस ठीक से काम कर रही है... लेकिन फिर भी मुझे लगता है कि कुछ नहीं होता जब पुलिस को पता चलता है कि कोई व्यक्ति अपने घर में कब्जा कर लेता है। तो ऐसा कह सकते हैं कि पप्पू यादव ने सोचा था कि वह पुलिस से दूर रह जाएंगे, लेकिन ख़बरें नहीं चलती... 🤔

उसके अलावा, मुझे लगता है कि यह घटना किसी भी तरह से राजनीतिक मुद्दों को बढ़ा नहीं सकती। पुलिस को तो अपना काम करना चाहिए, और सरकार को उनकी मदद करनी चाहिए। लेकिन फिर भी, मुझे लगता है कि यह घटना कुछ ऐसी है जिसके बारे में हम सभी सोच सकते हैं... 📚

पड़ोसियों ने कहा, "मेरे दोस्त को भी कभी ऐसा करने का मन नहीं करेगा।"
 
मैंने पढ़ा पप्पू यादव को गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन मुझे लगता है कि मीडिया ने इस कहानी को बहुत बड़ा बना दिया है। अगर उन्होंने इतनी गलती की, तो फिर वे शायद अपने घर में कब्जा कर लेते और एफआईआर दर्ज करते, तो क्या पुलिस उन्हें नहीं पकड़ लेगी?
 
पप्पू यादव को तो फिलहाल गिरफ्तार करने में भी सामान्य नागरिक की तरह ही पुलिस के हाथों में ही चिपका दिया गया है 🙄, इसके पीछे बदले की भावना नहीं है, बस यह तो पुलिस का काम ही है। लेकिन तो जब सालों से वहां स्थितियां ऐसी रह गई हैं और वास्तविकता छुपाई जाती है तो मुझे लगता है कि कुछ गलत होता है 🤔
 
मुझे इस बात पर बहुत गहराई से तड़पने की जरूरत नहीं है। पुलिस को अपने कर्तव्य को पूरा करने में सफल होने का सही मौका मिला और उन्होंने इस मामले में न्याय का रास्ता खोला है।
 
मुझे लगता है कि पप्पू यादव की गिरफ्तारी से बिल्कुल निराश नहीं होना चाहिए। उनके क्रियाकलापों में बदले की भावना जरूर है, लेकिन पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया तो अच्छा ही कर दिया। अब उनकी जांच का समय आ गया है और हमें पता चलेगा कि वास्तव में उनके पीछे क्या कारण थे।
 
मुझे यह बात अजीब लगती है कि पुलिस हमेशा अपनी निष्ठा पर चलती है। लेकिन मैं एक सवाल उठाना चाहता हूं - पप्पू यादव को गिरफ्तार किया गया तो क्यों? और अगर बदले की भावना नहीं थी, तो फिर कौन सी भावना थी जिसने उन्हें ऐसा करने पर मजबूर किया?

मुझे लगता है कि यह बात सिर्फ राजनीतिक मुद्दों को दूर करने के लिए नहीं कही गई है। अगर सच्चाई के पीछे कोई सबूत नहीं है, तो फिर क्यों? 😐
 
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