‘मेरे पास अमित शाह के खिलाफ पेन ड्राइव’, I-PAC में छापे के विरोध में कोलकाता में भड़की सीएम ममता

मुझे लगता है कि अरे, ये तो बहुत ही खलनायक की बात है! ममताजी को क्यों इतना बदलाव पसंद है? कोलकाता में ऐसी भड़काऊ बयानबाज़ी करने से चिंतित हूँ। और रोहिंग्याओं की बात? यह तो बहुत ही गहरी समस्या है, लेकिन इस पर जाकर जवाब देने की जरूरत नहीं है।

मुझे लगता है कि हमें अपने देश में शांति और एकता की बात करनी चाहिए, न कि विभाजन और बदलाव की। लेकिन यह तो बहुत आसान नहीं है, हाँ?
 
मैं तो सोचती हूँ कि अगर हम अपने बच्चों को बंगाली भाषा और संस्कृति से जोड़ने की कोशिश करते हैं, तो फिर वे कोलकाता में निकलकर वहीं रहने का मौका नहीं ढूंढ पाएंगे। लेकिन मैं समझती हूँ कि यहाँ पर सबकुछ थोड़ा जटिल है। मेरी बेटी को भी कभी-कभार विदेशी संस्कृतियों के बारे में पढ़ना पसंद है, लेकिन उसकी माँ की चिंता यह है कि वह अपनी पहचान खोने का डर रही है।
 
Back
Top