मुझे लगता है कि अरे, ये तो बहुत ही खलनायक की बात है! ममताजी को क्यों इतना बदलाव पसंद है? कोलकाता में ऐसी भड़काऊ बयानबाज़ी करने से चिंतित हूँ। और रोहिंग्याओं की बात? यह तो बहुत ही गहरी समस्या है, लेकिन इस पर जाकर जवाब देने की जरूरत नहीं है।
मुझे लगता है कि हमें अपने देश में शांति और एकता की बात करनी चाहिए, न कि विभाजन और बदलाव की। लेकिन यह तो बहुत आसान नहीं है, हाँ?
मुझे लगता है कि हमें अपने देश में शांति और एकता की बात करनी चाहिए, न कि विभाजन और बदलाव की। लेकिन यह तो बहुत आसान नहीं है, हाँ?