नेहा सिंह रात 9 बजे लखनऊ में कोतवाली पहुंचीं: दिन ढलने के कारण पुलिस ने लौटाया, गाना गाया था- चौकीदरवा कायर बा - Lucknow News

नेहा सिंह राठौर ने लखनऊ में कोतवाली पहुंचीं थी, पर पुलिस ने उनको वापस लौटा दिया।

इस बीच नेहा ने कहा है कि पुलिस ने बताया है कि किसी महिला का बयान रात में दर्ज नहीं किया जा सकता।
 
नहीं, यह तो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बात है। लेकिन मैं सोचता हूँ कि शायद पुलिस ने ऐसा कहा था क्योंकि उनकी बात सुनने के लिए वे खुद भी चिंतित थे। तो फिर भी, यह बहुत ही असामान्य और अनुमोदनीय है। मुझे लगता है कि हमें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए, खासकर महिलाओं।
 
नेहा सिंह राठौर की यह हरकत मुझे अजीब लगी, क्या पुलिस में भी इतनी असंवेदनशीलता है? 🤔 उन्होंने कहा कि कोई महिला रात में बयान देने का सोचने का तौर नहीं देती। लेकिन, यह बात तो बहुत जरूरी है कि पुलिस भी हमारी मर्ज़ी से निर्णय ले। पुलिस को पता होना चाहिए कि आज की महिलाएं औरतें अलग-अलग हैं। 🚨 मुझे लगता है कि पुलिस को अपने तरीकों को बदलना होगा, ताकि सामाजिक समानता बनी रहे।
 
मेरा विचार है कि यह तो एक बहुत बड़ा मुद्दा है। क्योंकि हमारे देश में स्त्री के लिए इतने नियम हैं और इतनी सीमाएं तो बिल्कुल भी ठीक नहीं हैं। जब नेहा जी कोतवाली जाकर अपना बयान देने की कोशिश करती हैं तो उन्हें वापस लौटा दिया जाता है। यह तो एक बहुत बड़ा झूठ है कि कोई महिला रात में बयान दर्ज नहीं कर सकती।

क्योंकि हमारे समाज में अभी भी बहुत से लोग हैं जो स्त्रियों के अधिकारों को नहीं समझते। और पुलिस भी ऐसा ही है। वे तो बहुत ही बुद्धिमान होते हैं, लेकिन कभी-कभी ऐसे मामले आते हैं जब उन्हें अपने नियमों को ध्यान में रखने से पहले सबकुछ समझना होता है।
 
बिल्कुल सही, यह तो सरकार से नहीं, लेकिन आम आदमी की बात भी नहीं सुन रही है। नेहा सिंह राठौर जी की बात मान लें तो यह सच है कि किसी महिला का बयान रात में दर्ज नहीं किया जा सकता। लेकिन इसका मतलब यह नहीं होना चाहिए कि वह व्यक्तिगत तौर पर अपने बयान बता नहीं पाई। पुलिस को सुनने की ज़रूरत नहीं है, हमें सरकार की नीतियों और विरोधों की बात करनी चाहिए। लेकिन यह एक दूसरे के साथ मिलकर बात करना चाहिए, फिर कोई भी पुलिस या सरकार व्यक्ति को रोकने की जरूरत नहीं है। 😡💥
 
नेहा सिंह राठौर ने लखनऊ में कोतवाली पहुंचीं थी, पर पुलिस ने उनको वापस लौटा दिया, यह बात सुनकर तो मुझे बहुत गुस्सा आ रहा है 🤬। क्या यही है हमारे समाज में महिलाओं का स्थिति? किसी महिला का बयान रात में दर्ज नहीं किया जा सकता, यह तो पूरी तरह से अस्वीकार्य है। लेकिन ये सवाल उठता है कि क्या हमारी पुलिस को कोई शिकायत नहीं करनी चाहिए?

मुझे लगता है कि नेहा जी ने सही बात कही है, हमें अपनी स्वतंत्रता और समानता की लड़ाई जारी रखनी चाहिए। पुलिस को यह नहीं कहना चाहिए कि कोई महिला का बयान रात में दर्ज नहीं किया जा सकता, हमें अपने अधिकारों की रक्षा करनी है। 🙏
 
🚔 मेरे लिए यह बिल्कुल सही निकला है। पुलिस का यह तरीका चीजों को और भी गंभीर बना देता है। 🤕 नेहा सिंह राठौर जी की बात सुनकर लगता है कि उन्हें उनके बयान को लेकर खेद हुआ होगा। यह कहना मुश्किल है कि किसने वास्तव में कहा, लेकिन पुलिस का यह तरीका सभी महिलाओं को धमकाता है। 👮‍♂️ अगर किसी महिला को फोन करने का मौका नहीं मिलता है तो देखिए कि स्थिति कहां पहुंच जाती है।
 
बोलते बोलते ये देश कैसे चल रहा है, तो यही सोचता हूँ कि लोग अपने अधिकारों का प्रयोग करने के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं और फिर भी वो नहीं मानती कि ये उनके अधिकार थे। नेहा सिंह राठौर जी ने लखनऊ में पुलिस स्टेशन पहुंचीं तो उन्हें वापस लौटा दिया। यह बात भी चिंताजनक है कि पुलिस ने बताया है कि रात में किसी महिला का बयान दर्ज नहीं किया जा सकता, यह तो सिर्फ एक बहाना है कि वो अपने अधिकारों का उपयोग करने को डर रही है। लेकिन मैं ऐसा नहीं कह सकता कि पुलिस ने गलत कर दिया है, बस यह सोचने की जरूरत है कि हमें अपने अधिकारों का उपयोग कैसे करें। 🤔
 
भाई, यह तो बहुत बुरा है... नेहा सिंह राठौर लखनऊ कोतवाली गईं थीं, पुलिस ने उन्हें वापस भेज दिया, और फिर पुलिस ने बताया कि रात में बयान दर्ज नहीं किया जा सकता। यार, यह तो महिलाओं के अधिकारों पर आड़ है... हमें अपनी आवाज सुनने देना चाहिए। पुलिस क्या मतलब था कि महिला बोलती हैं तो उनका बयान रात में कैसे दर्ज कर सकते? यह तो एक नई उम्मीद है... हमें आगे चलकर इस मुद्दे पर जोर देना चाहिए।
 
राह में जो बात है, वो तो हमेशा कुछ सीखने का मौका देती है। ये नेहा सिंह राठौर की कहानी सुनकर लगता है कि पुलिस की बात सही हो सकती है, लेकिन इसके पीछे कुछ और भी जानकारी होनी चाहिए। क्योंकि एक महिला का बयान रात में दर्ज नहीं किया जा सकता, यह तो बिल्कुल सही है। लेकिन अगर उसका बयान लिखने की जरूरत है, तो किसी और व्यक्ति की मदद से करना चाहिए। जैसे कि हमारे आसपास के लोगों को बात करें, फिर पता चलेगा कि कौन सही से बयान दे सकता है।
 
मैंने भी ऐसा ही सोचा, तो फिर क्यों पुलिस कर रही है? 😒 कोतवाली पर नेहा सिंह राठौर का विरोध करना बिल्कुल सही था। महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने में कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए। और पुलिस ने कहा है कि रात में बयान दर्ज नहीं किया जा सकता, यह तो और भी दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं सोचता हूं कि पुलिस पर यह क्यों लग रही है, कि महिलाओं के बयान को रात में दर्ज करना असंभव है? क्या ये भी ऐसा ही सोच रही है जैसे हमारे देश में महिलाएं बेगुनाह और कमजोर हैं? 🙄
 
मुझे लगता है कि यह बहुत ही अजीब सी बात है। नेहा सिंह राठौर जी ने लखनऊ में कोतवाली पहुंचीं थीं, पर फिर वापस लौट गईं। मुझे लगता है कि यहां पुलिस को अपनी नीतियों और दिशानिर्देशों को अच्छी तरह से जानने की जरूरत है। क्या यह सचमुच इसलिए नहीं था कि उन्हें कोई समस्या हुई या फिर वे बस ऐसी जगह पर गए थीं जहां वे चाहें। यह तो बहुत ही अजीब लग रहा है कि पुलिस ने उनको वापस लौटा दिया।
 
नेहरा सिंह राठौर की बात कर रही हैं तो मुझे लगता है कि पुलिस वालों ने वहाँ के परिस्थितियों को समझ नहीं लिया 😕। देश में ऐसे कई महिलाएं हैं जिन्हें रात में घर छोड़ना पड़ता है, खासकर जब वे अकेली आ रही होती हैं। तो बोलते कि बयान दर्ज नहीं किया जा सकता, लेकिन क्या वह महिलाएं कुछ नहीं कह पाती? 🤔

मुझे लगता है कि हमें अपने देश में महिलाओं के अधिकारों को ध्यान में रखना चाहिए। अगर वे जो कहती हैं वह सच है, तो पुलिस को उसे सुनना चाहिए और मदद करनी चाहिए, न कि वापस लौटाना। 💪
 
जी, इस मामले में पुलिस की बात समझनी चाहिए। अगर उन्होंने कहा है कि रात में बयान दर्ज नहीं किया जा सकता, तो शायद वे सही कर रहे हैं। लेकिन फिर भी, यह सवाल उठता है कि क्या महिलाओं को बिना सुरक्षा के, सार्वजनिक स्थानों पर अपने बयान रखने की अनुमति मिलेगी? यह एक अच्छा सवाल है।
 
🤔 यह तो बहुत अजीब लग रहा है। नेहा सिंह राठौर की बात में से हमें पता चला कि लखनऊ में कोतवाली पहुंचने पर उन्हें वापस भेज दिया गया। यह तो एक बड़ा सवाल है कि पुलिस ने उनको वापस कहीं भेजा ताकि क्यों? 🤷‍♀️

और बात है, उन्होंने बताया कि पुलिस ने कहा था कि रात में कोई महिला का बयान दर्ज नहीं किया जा सकता। लेकिन यह तो एक बहुत बड़ा खिलाफत है। हमारी देश की कानूनों के अनुसार, हर किसी की बात सुनना और दर्ज करना चाहिए। रात में भी, दिन में, या खाने के समय में। 🕰️ यह तो एक बहुत बड़ा सवाल है कि पुलिस ने ऐसा कहकर उन्हें वापस भेजने का क्यों कारण?
 
मैंने सुना था यह बहुत ही अजीब बात है, नेहा सिंह राठौर को लखनऊ में पुलिस ने वापस लौटा दिया, और वो बताया कि बयान रात में दर्ज नहीं किया जा सकता। मुझे लगता है कि यह बहुत ही गड़बड़ है, क्या हमारे पास इतनी सी बातें हैं कि खुद महिलाओं को अपने बयान देने पर रोकना है? और ये पुलिस वाले लोग तो कहते हैं कि बयान रात में दर्ज नहीं किया जा सकता।

मैं थोड़ी नाराज़ हूँ, मुझे लगता है कि यह बहुत ही बुरी बात है। क्या हमारे पास इतनी सी बातें हैं कि खुद लोगों को अपने अधिकार देने पर रोकना है?

मैं समझ नहीं पा रही हूँ, मुझे लगता है कि यह बहुत ही अजीब व्यवस्था है।
 
अरे यह तो मजेदार लग रहा है... नेहा सिंह राठौर को लखनऊ कोतवाली में वापस बुलाया गया... और फिर पुलिसने बताया कि रात में बयान दर्ज नहीं कर सकते, अरे यह तो बस दिन का काम है... रात में तो हमारे देश की सबसे बड़ी व्यवसायियों से कोई बयान लेना चाहिए, न कि पुलिस को... 😂🤣
 
मुझे लगता है कि यह तो बहुत ही अजीब बात है 🤔 यार, पुलिस को यह जरूर पता चलना चाहिए कि महिलाएं भी अपने अधिकारों का उपयोग कर सकती हैं और अपने विचारों को साझा कर सकती हैं। जानबूझकर महिलाओं के बयान रात में दर्ज नहीं करने की बात तो बहुत ही अजीब है।

मुझे लगता है कि लखनऊ की पुलिस ने गलती की है, यार। पुलिस को यह जरूर सीखना चाहिए कि हर किसी को समान अधिकार मिलेंगे और विरोध की जगह सहिष्णुता का रास्ता अपनाया जाए।
 
मुझे लगता है कि यह बहुत अजीब है... नेहा सिंह राठौर लखनऊ में कोतवाली जाएं, फिर पुलिस उनको वापस लौटा दें। तो यह तो क्या है? मुझे लगता है कि पुलिस को पता होना चाहिए कि महिलाओं को भी खुद को सुरक्षित रखने के लिए कुछ करना चाहिए। और इसके बाद, पुलिस ने कह दिया कि रात में बयान दर्ज नहीं किया जा सकता, यह तो पूरी तरह से सही नहीं है। मुझे लगता है कि पुलिस को अपने तरीके पर चलने देने की जरूरत नहीं है, चाहे वो कोई भी महिला हो।
 
मुझे लगता है कि यह बहुत ही अजीब सा दृश्य हुआ है। नेहा सिंह राठौर को लखनऊ में पुलिस स्टेशन पहुंचाया गया था, लेकिन वहां उन्हें वापस भेज दिया गया। यह तो बहुत ही गंभीर मामला लगता है। पुलिस ने कहा कि रात में महिलाओं के बयान दर्ज नहीं किए जा सकते, तो यह सिर्फ एक ही समस्या है - कि महिलाएं अपने अधिकारों के बारे में जागरूक नहीं हैं और उन्हें पता नहीं चलता कि उनके कैसे सशक्तीकरण किया जा सकता है।
 
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