सलीम और रुस्तम गैंग की बात सुनते हुए, मुझे लगता है कि यह देखकर आश्चर्य होता है कि इन तीनों ने अपना पहला मर्डर ईद की तैयारी के समय कर दिया था। चांद रात 2005 में लखनऊ के दो शहरों में तीन मर्डर किए, यह बहुत बड़ा अपराध है। पुलिस उन्हें पकड़ने में असमर्थ रही, जिससे सारे समुदाय में डर और असुरक्षा की भावना फैल गई।
इन दिनों तो ऐसे कई अपराध होते हैं जहां पर पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया है, लेकिन सलीम और रुस्तम गैंग की बात सुनते हुए मुझे लगता है कि जिंदगी में एक अपराध करने वाले को दूसरों के अपराधों से निर्धारित नहीं किया जा सकता।
इसीलिए, अगर हम इस तरह के अपराधों को रोकना चाहते हैं तो हमें अपनी समाज में शिक्षा, न्याय और सुरक्षा की भावना पैदा करनी होगी।