मेरी बात है... पुतिन को देखकर मुझे थोड़ा अजीब महसूस होता है। वह अपनी ऑरस सीनेट कार छोड़कर भारत आया, और फिर तुरंत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एयरपोर्ट पर बैठने लगा। ऐसा लगता है जैसे उन्होंने रूस से हमेशा यहीं की दुनिया से खास कर गुजरना शुरू कर दिया हो। और फिर, ये बात तो मजाक नहीं है। पुतिन ने सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़ दिया, जैसे कि वह वास्तव में हमारी सुरक्षा की दुनिया को समझ रहे हैं? यह तो हैरान करने के बजाय, आभारी होने लगा। लेकिन फिर भी, मुझे लगता है कि यह एक रोचक पल था, जिसे हम कभी नहीं भूलेंगे।