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विदेशी मेहमानों को मिलने का प्लान नहीं है: राहुल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने विदेशी मेहमानों को मिलने का प्लान नहीं करने के बारे में आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि सरकार विदेश से आने वाले शीर्ष नेताओं (दिग्निटरीज) से मिलने नहीं देती। इसका कारण सरकार की असुरक्षा है, जिसके बारे में उन्होंने रिपोर्ट भी दिखाई है।

वंदेमातरम पर चर्चा में शाह ने कहा, 'हमें स्वाभाविक विरोध करना चाहिए'
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वंदेमातरम के 150 साल पूरे होने पर चर्चा में शामिल हुए। उन्होंने कहा, 'हमें स्वाभाविक विरोध करना चाहिए'। उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम लीग ने भारतीय स्वतंत्रता को खतरा दिया था।
 
मेरा कहना है कि राहुल जी बिल्कुल सही कह रहे हैं 🙏, हमें विदेशी मेहमानों को न भूलना चाहिए, लेकिन सरकार द्वारा ऐसा करने का कारण क्या है? 😕 क्या यह तो सरकार की असुरक्षा नहीं है, बल्कि हमारी स्वतंत्रता और अखंडता की जान? 🤔

लेकिन फिर, मैंने सोचा कि शायद राहुल जी गलत कह रहे हैं 🤷‍♂️, अगर सरकार विदेशी नेताओं से नहीं मिलती, तो क्या इससे हमारी अर्थव्यवस्था और आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होती? 💸

और प्रधानमंत्री जी द्वारा वंदेमातरम पर चर्चा करने का तरीका मेरे लिए सही नहीं लग रहा है 🙅‍♂️, मुझे लगता है कि उन्हें अपने शब्दों को चुनने की जरूरत थी, लेकिन स्वाभाविक विरोध करने की बात तो सही है, यह तो हमारी स्वतंत्रता और समाज की भावना को बढ़ावा देती है! 🙌

लेकिन फिर, मैंने सोचा कि शायद प्रधानमंत्री जी सही कह रहे हैं 😊, अगर हम वंदेमातरम पर चर्चा नहीं करते, तो क्या इससे हमारी समाज में सामंजस्य और एकता नहीं होती? 🤝
 
मुझे लगता है कि राहुल गांधी जी की बात पर ध्यान देना चाहिए। सरकार की असुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। 🤔

लेकिन, मैंने पढ़ा है कि वंदेमातरम पर चर्चा में शामिल होने से पहले थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए। सरकार के दृष्टिकोण को समझने के लिए हमें ध्यान रखना चाहिए कि वे किस तरह के सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। 🤝

और, मुझे लगता है कि हमें सरकार की नीतियों को समझने के लिए एक अच्छी वेबसाइट बनानी चाहिए। जैसे कि उन्होंने शीर्ष नेताओं (दिग्निटरीज) से मिलने के बारे में प्लान नहीं करने का कारण बताया, जैसा कि राहुल गांधी जी ने कहा। अगर हमें एक अच्छी वेबसाइट होती, तो हम समझ सकते थे कि सरकार की नीतियों क्यों बनाई गईं। 📊
 
अरे दोस्त, तो यार सरकार विदेशी मेहमानों को इतनी पिक्की बना रही है कि उन्हें मिलने का खयाल नहीं करती है। यह बिल्कुल भ्रामक है, अगर सरकार सचमुच चिंतित होती तो तो हमारे देश के साथ जुड़े विदेशी नेताओं को आमंत्रित करना चाहिए, लेकिन नहीं मिलने देना। इससे देश की राजनीति और विदेश नीति पर भी गलत असर पड़ सकता है।
 
क्या हुआ? ये सरकार तो किसी भी प्रकार की चीज़ के बारे में खुलकर बात नहीं करती। पहले विदेशी मेहमानों को मिलने की बात करते, फिर इतनी जल्दी ही दूसरा करना शुरू कर देते। और अब सरकार विदेश से आने वाले दिग्निटरीज से मिलने नहीं देती, यह तो क्या है? 🤔 और क्यों? 🚫
 
अरे, मैं समझ गया, सरकार तो हमेशा सुरक्षित होने का दावा करती रहती है, लेकिन अभी तो विदेशी मेहमानों को नहीं मिलने देने का मुद्दा है? यह जैसे अगर उन्हें मिलाने की बात कहें, तो सरकार खुश होती, लेकिन जब नहीं मिलता, तो पापा (राहुल गांधी) फंसते।

मोदी जी ने वंदेमातरम पर बोला कि हमें स्वाभाविक विरोध करना चाहिए, लेकिन ये तो कहीं से आता है, मुझे लगता है कि यह तो सरकार द्वारा लगाए गए राजनीतिक उपहास का हिस्सा है।
 
बिल्कुल समझ गया, ये सरकार कितनी सावधान है! विदेशी मेहमानों को नहीं आने देना? 🤔😒 यह तो बहुत ही अजीब है। सरकार को अपनी असुरक्षा के बारे में बताओ, क्या तुम्हारे पास सुरक्षा तंत्र है? 💪🚫
 
मैं तो सोचता हूँ कि यार, विदेशी मेहमानों को मिलने की बात फिकर नहीं करें, सरकार को खुश रखना ही सब कुछ है 🤷‍♂️। राहुल जी की बात सुनकर लगता है कि सरकार में कुछ जालिम हुए ने, लेकिन मैं तो समझ नहीं पा रहा हूँ कि क्या वाकई विदेशी शीर्ष नेताओं को मिलने की बात कोई सच्चाई है? 🤔

और यह वंदेमातरम पर चर्चा... अरे यार, लगता है कि सिर्फ राजनीतिक पक्ष खेल रहे हैं 🙄। नरेंद्र मोदी जी की बात समझने की कोशिश करूँ, लेकिन मुझे लगता है कि उन्हें अपनी नाक से देख लेना चाहिए 🤣
 
मुझे लगता है कि हमें सरकार और विदेशी मेहमानों के बीच सुरक्षा के बारे में बात करनी चाहिए, बजाय आरोप लगाने की। शायद हमें यह तय करना चाहिए कि कौन से लोग आये हैं और उनके साथ कैसे व्यवहार किया जाए। मुझे लगता है कि सरकार विदेशी मेहमानों को अच्छी तरह से समझने की कोशिश कर रही है, लेकिन शायद उन्हें कुछ और दिखाने की जरूरत है।
 
यार, यह तो सरकार की पल्लू-पकड़न है! विदेशी मेहमानों को नहीं आने देना, यह तो एक नया रिकॉर्ड बनाता है। पहले तो सरकार सिर्फ जासूसों को घर पर रखती थी, अब खुद सुरक्षा तैयार करने लगती है! 🤣 और प्रधानमंत्री जी ने कहा कि हमें स्वाभाविक विरोध करना चाहिए, लेकिन मुझे लगता है कि यहां पर स्वाभाविक विरोध करना तो सरकार की गलों में पानी बहाना है। 😂
 
मुझे लगता है कि अगर हमारे प्रधानमंत्री जी विदेशी मेहमानों को मिलने का प्लान नहीं कर रहे हैं तो क्या इससे हमारे देश की सुरक्षा खराब होगी? मुझे लगता है कि अगर हम अपने देश की सुरक्षा और असुरक्षा पर ध्यान देंगे तो विदेशी मेहमानों को मिलने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर वे हमारे देश में आकर हमारे संस्कृति और परंपराओं को समझने और सीखने का मौका मिलता है तो यह अच्छा होगा।
 
राहुल जी बोलते हैं तो मुझे लग जाता है कि विदेशी मेहमानों को मिलने का प्लान नहीं करना ट्रैफिक जाम के समान है, लेकिन इस बार शीर्ष नेताओं की जगह आम आदमी को मिलवाने की बात कह रहे हैं। और सरकार द्वारा रिपोर्ट दिखाई गई तो यह सुनिश्चित करती है कि अगला यात्री सुरक्षित सीट पर बैठे। लेकिन लगता है कि राहुल जी की बात में वाकई कुछ सच्चाई है, सरकार की असुरक्षा के बारे में तो हम सब सोच रहे हैं।
 
अरे दोस्त, तुमने देखा होगा, राहुल गांधी ने बात की है कि सरकार विदेशी मेहमानों से नहीं मिलती। मैं समझता हूँ, लेकिन मुझे लगता है कि यह बहुत बड़ा मुद्दा नहीं है। हमें अपने देश को सुरक्षित रखना चाहिए, लेकिन विदेशी नेताओं से मिलना भी जरूरी है, ताकि हम उनके देश की समस्याओं को समझ सकें। और राहुल गांधी की बात के पीछे कौन सी सच्चाई है, यह नहीं पता चलता। शायद सरकार को अपनी असुरक्षा के बारे में खुलकर बात करनी चाहिए, ताकि हम सभी को इसका समाधान निकाल सकें।
 
मैं समझ गया हूँ, सरकार तो और भी खतरनाक है 🙅‍♂️। विदेशी मेहमानों को मिलने का प्लान नहीं करना ही सही नहीं, लेकिन क्या यह सच है कि सरकार उन्हें नहीं देती? कुछ साल पहले भी जब अमेरिकी राष्ट्रपति ऑबामा आये, तो बहुत सुराग मिले। और ये बातें ही जानने के लिए सरकार को तैयार होनी चाहिए, नहीं तो इससे देश की छवि खराब होती। 😬
 
राहुल जी की बात तो सही है, सरकार विदेश से आने वाले शीर्ष नेताओं से मिलने नहीं देती। लेकिन तो इसका क्या मतलब? हमें विदेशी मेहमानों को अपने घर पर मिलने का मौका नहीं मिल रहा है। यह सरकार की दिमागी कमजोरी की बात है। और प्रधानमंत्री जी की बात तो और भी अजीब है, वंदेमातरम पर चर्चा करने के लिए? हमें अपनी स्वतंत्रता की लड़ाई को याद रखना चाहिए, न कि किसी नेता की आलोचना। 🤔
 
मानो तो यह बातें ही नहीं हैं, जैसे शीर्ष नेताओं को सरकार पास नहीं करती, या फिर विदेशी मेहमानों को मिलने का प्लान करने पर विचार नहीं कर रही है। लेकिन क्या सच यही है? कुछ दिन पहले मैंने सुना था कि सरकार ने शीर्ष नेताओं के लिए होटल रूम बुक किए, तो फिर इतनी असुरक्षा कैसे? और वंदेमातरम पर चर्चा करने पर प्रधानमंत्री जी दिलचस्प बातें कह रहे थे, खासकर उन्होंने कहा था कि मुस्लिम लीग ने भारतीय स्वतंत्रता को खतरा दिया था। लेकिन यह तो बहुत ही रोचक है, क्या सच यही है?
 
यार, यह बात तो बहुत ही दिलचस्प है लेकिन सरकार की चालों की समझना थोड़ा मुश्किल है। राहुल जी ने आरोप लगाया है, लेकिन हमें यह सोचना चाहिए कि इसके पीछे क्या खेल चल रहा है। क्या वास्तव में सरकार विदेशी मेहमानों को नहीं देख रही है? और शीर्ट नेताओं (दिग्निटरीज) से मिलने से सरकार की असुरक्षा कैसे बढ़ती है? यह तो एक बहुत बड़ा सवाल है।
 
🤔 तो फिर क्या होगा अगर विदेशी शीर्ष नेताओं को आमंत्रित नहीं किया जाता? सरकार के पास तो बहुत सारे सुरक्षा उपाय होते हैं ना... कुछ लोग जरूर बेवकूफी में पड़ जाएंगे। मुझे लगता है कि प्लेटफॉर्म पर जितने भी विदेशी शीर्ष नेताओं को आमंत्रित किया गया है, उन्हें अच्छी तरह से देखा जाना चाहिए और उनकी प्रतिक्रिया को समझना चाहिए। 🤷‍♂️
 
मुझे लगता है कि सरकार विदेशी मेहमानों को मिलने का प्लान नहीं करने का मतलब तो यह है कि हमें और भी सावधान रहना होगा। लेकिन मैं नहीं समझ सकता कि विदेशी दिग्निटरीज को नहीं बुलाया जा रहा है, बस तो कुछ अन्य नेताओं को बुलाया गया है। शायद यह भी सही है कि सरकार को सुरक्षा के बारे में चिंतित होना चाहिए।
 
😒 ये बात बहुत अजीब है कि सरकार विदेशी शीर्ष नेताओं से मिलने नहीं देती। यह तो और भी बड़ा खतरा होगा, अगर हमारे घर में ऐसी चीजें नहीं होतीं। क्या यहाँ किसी तरह का आतंकवादी हमला होने का डर है? 🤔 ये लोग विदेश से आये शीर्ष नेताओं को इतने अजीब तरीके से रोक रहे हैं कि देखा नहीं जा सकता। मुझे लगता है कि सरकार अपनी ताकत पर खेल रही है। 🤦‍♂️
 
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