मुझे 200 दिनों का विरोध आंदोलन करना हुआ था, जिसने मेरे गांव को खत्म कर दिया। मैं नाबालिग थी, लेकिन मुझे पता चला था कि अपनी उम्र से ज्यादा बूढ़ी लड़कियों को वारदात का शिकार होने की खतरा थी। मेरे गांव में तीन ऐसी लड़कियाँ थीं, जिन्हें 200 दिनों तक वहां बैठना पड़ा था।
जब हम सब विदेशों में गए, तो हमारे बच्चे भी उसे देखकर मनमस्त हुए और वहां से चले गए। लेकिन मैं बहनों के साथ फिर से जाने नहीं आई। बाकी सभी ने अपने परिवारों को छोड़ दिया था।
हमें पंचायत भेजी, और एक गुरुद्वारे में यह बातें हुईं। हमें पता चला कि सरकार के काले कानून हमें धमकी देने के लिए लगाए गए थे। तो हमने सोचा, 'यह क्या काम है?' और हम दिल्ली गईं।
हमने कहा, 'पहले भाई, तुम्हारी सरकार हमें क्यों धमकी दे रही है? तुम्हारी सरकार हमें कैसे लापता कर रही है?'
हम जब दिल्ली में पहुंचे, तो हमारा सामना एक विशाल समूह से हुआ। हमें पता चला था कि यह पूरा पंजाब मेरे साथ खड़ा था।
हमने कहा, 'तुम्हारे देश की सरकार हमें कैसे लापता कर रही है?'
हमारे बच्चे और पत्नियाँ, विदेशों में शिक्षा प्राप्त करके आ गईं।
उन्होंने कहा, 'बेटी, तुम्हें अपनी सरकार को देखना चाहिए, न हमें!'
हम किसान आंदोलन में बैठकर संघर्ष कर रहे थे, लेकिन सरकार ने प्रेस जारी नहीं किया। हमने कहा, 'बेटी, तुम्हारी सरकार को समझाएं, न ही हम!'
हमें पता चला था कि पूरा देश मेरे साथ खड़ा है। हमने कहा, 'देश की सरकार को हमें कैसे छूना चाहती है?'
तो हमारा विरोध आंदोलन सफल रहा।
जब हम सब विदेशों में गए, तो हमारे बच्चे भी उसे देखकर मनमस्त हुए और वहां से चले गए। लेकिन मैं बहनों के साथ फिर से जाने नहीं आई। बाकी सभी ने अपने परिवारों को छोड़ दिया था।
हमें पंचायत भेजी, और एक गुरुद्वारे में यह बातें हुईं। हमें पता चला कि सरकार के काले कानून हमें धमकी देने के लिए लगाए गए थे। तो हमने सोचा, 'यह क्या काम है?' और हम दिल्ली गईं।
हमने कहा, 'पहले भाई, तुम्हारी सरकार हमें क्यों धमकी दे रही है? तुम्हारी सरकार हमें कैसे लापता कर रही है?'
हम जब दिल्ली में पहुंचे, तो हमारा सामना एक विशाल समूह से हुआ। हमें पता चला था कि यह पूरा पंजाब मेरे साथ खड़ा था।
हमने कहा, 'तुम्हारे देश की सरकार हमें कैसे लापता कर रही है?'
हमारे बच्चे और पत्नियाँ, विदेशों में शिक्षा प्राप्त करके आ गईं।
उन्होंने कहा, 'बेटी, तुम्हें अपनी सरकार को देखना चाहिए, न हमें!'
हम किसान आंदोलन में बैठकर संघर्ष कर रहे थे, लेकिन सरकार ने प्रेस जारी नहीं किया। हमने कहा, 'बेटी, तुम्हारी सरकार को समझाएं, न ही हम!'
हमें पता चला था कि पूरा देश मेरे साथ खड़ा है। हमने कहा, 'देश की सरकार को हमें कैसे छूना चाहती है?'
तो हमारा विरोध आंदोलन सफल रहा।