उज्जैन के तराना में फिर पथराव, पुलिस ने खदेड़ा: बस फूंकी-दुकान जलाई, मंदिर पर हमला किया, अब तक 15 गिरफ्तार - Ujjain News

जानवरों की तरह क्या होता है, जब भी कुछ नहीं होता, तब सारा दंगा कर देता है 🐒। यह विवाद में जिन लोगों ने पहले हमला किया, उनके मन में तो शायद खाली पेट ही थी, क्योंकि बसों और घरों को नुकसान पहुंचाया गया। और फिर जब आग लग गई, तो दूसरी बार वे लोग कैसे बदल गए? यही सवाल हमें सोचने पर मजबूर करता है कि मनुष्य कितना भ्रमित होता है।
 
जानलेवा विवाद हुआ तो फिर भी लोग सोचते हैं कि सब ठीक है 🙅‍♂️। यह देश में ऐसे कई स्थान हैं जहां पुलिस तैनात नहीं होती और लोग इस तरह जैसे कुछ भी कर सकते हैं।

मेरा कहना है कि अगर ऐसे विवाद हो रहे हैं, तो सरकार को सीधे प्रभावित इलाकों में थाने लगाने चाहिए। न केवल यह है, बल्कि पुलिस की तैनाती बढ़ाकर उन दुकानों और बसों पर भी जांच करना चाहिए जिन्हें नुकसान पहुंचाया गया है।

क्या हमारे देश में अभी भी इतना हिंसा कैसे सहन किया जा सकता है? 🤔 अपने बेटों और बहनों को खतरे में डालने वाली ऐसी गतिविधियों के लिए सजा तुरंत देनी चाहिए।

उज्जैन की तराना में एक बार फिर से पथराव हुआ, बसों और घरों को नुकसान पहुंचाया। लोगों को याद रखना चाहिए कि अगर हम सभी मिलकर मिल कर इस तरह की गतिविधियों के खिलाफ खड़े हों, तो ऐसी घटनाएं कभी नहीं होंगी।

इस मामले की जांच करवानी चाहिए। इन लोगों को सजा देनी चाहिए ताकि फिर भी ऐसी गतिविधियाँ न हों।
 
क्या बात करे ताराना में फिर से सड़क पर उतरे हुए लोग। पहले तो यहाँ कुछ लोग दीवाल से गुर्रा रहे थे, अब यहाँ की पुलिस खदेड़ रही है। आगजनी की बात करे तो यह तो बहुत बड़ी चीज़ है और पुलिस ने भी सही कदम उठाए। लेकिन जेल में डाले गए लोगों की बात करते हैं तो लगता है कि युवकों को आगे चलने वाली राजनीति से बचाने की जरूरत है।
 
उज्जैन की तराना में फिर से विवाद हो रहा है, लेकिन यह तो समझ नहीं आता कि लोग क्या बोल रहे हैं। पहले तो पुलिस ने खदेड़ दिया, फिर खुद को घायल कर लिया। यह तो सोचकर भी चिंतित हूं कि यह विवाद कैसे शुरू हुआ, और आगजनी क्यों हुई। मुझे लगता है कि यह सब कुछ एक ही बात का अंतिम निष्कर्ष है।
 
उज्जैन की तराना में हो रहे विवाद को समझने की कोशिश करने से पहले, मुझे लगता है कि यहाँ कुछ ऐसी बातों पर ध्यान देना चाहिए। सबसे पहले, यह ताज़ा हुआ कि पुलिस ने इस विवाद में शामिल लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

लेकिन, यह तो एक सवाल है कि क्या पुलिस की ओर से चुनाव से पहले वोट देने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस योजना है? यह भी सच है कि पुलिस ने इलाके में 7 थानों की तैनाती कर दी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति सुरक्षित है।

उज्जैन की तराना में हो रहे विवाद को समझने के लिए, हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि यहाँ कुछ ऐसी भावनाएं तेज हैं। चुनाव के समय भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और उसके समर्थकों को बड़ा समर्थन मिल रहा है, जिससे उनकी ओर से कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई है।

इसलिए, यह तो एक बात है कि पुलिस ने इस विवाद में शामिल लोगों को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन इसके परिणामस्वरूप क्या होगा, यह सोचकर हमें चिंतित रहना चाहिए।
 
😕 यह दोबारा हुआ, तो क्या बदलाव नहीं आ रहा? पहले जानलेवा हमला हुआ था, फिर मामला हल्के घायल हुए और अब पुलिस ने खदेड़ कर दिया। लेकिन सब कुछ ठीक नहीं है, बसों और घरों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। मुझे लगता है कि यह विवाद शुरू करने वाली स्थिति को समझना जरूरी है। क्या हमें विश्व हिंदू परिषद के नेताओं को उनकी बातों से रोकने के लिए कुछ और करना चाहिए? 🤔
 
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