वंदे मातरम के सहारे बंगाल की राजनीति: BJP-TMC ने बनाई अपनी-अपनी रणनीति, आज संसद सत्र में भी होंगे आमने-सामने

भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों ने वंदे मातरम और जय हिंद जैसे नारों से राजनीति करने की प्रतिक्रिया दिखाई है। बुलेटिन में यह कहा गया है कि सदन की कार्यवाही के दौरान मर्यादा और गंभीरता के तहत 'धन्यवाद, थैंक यू, जय हिंद, वंदे मातरम' या किसी भी अन्य तरह के नारे नहीं लगाए जाने चाहिए। लेकिन विपक्ष ने यह कहकर दावा किया है कि बुलेटिन में कोई इस्तेमाल किए गए संदेशों पर प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। इसके अलावा, तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा समर्थित केंद्र सरकार पर स्वतंत्रता के प्रतीकों से असहज होने का आरोप लगाया है।

इस विवाद को लेकर भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों ने अपनी-अपनी रणनीति बनाई है। भाजपा ने बुलेटिन में संदेश पर प्रतिक्रिया नहीं देने का आरोप लगाते हुए कहा है कि विपक्ष को पता होना चाहिए कि सदन की कार्यवाही के दौरान मर्यादा और गंभीरता के तहत किस तरह के नारे नहीं लगाए जाने चाहिए। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा समर्थित केंद्र सरकार पर स्वतंत्रता के प्रतीकों से असहज होने का आरोप लगाया है और कहा है कि राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक इन नारों पर केंद्र के किसी भी निर्देश को नहीं मानेगी।
 
मेरी यादें तो हमेशा से थीं, जब हमारे देश में राजनीति करने वाले लोगों ने अपने नारों और प्रतिक्रियाओं में कुछ नया-नया नहीं कर रहे थे। आजकल भी देख रहा हूँ कि भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों एक जैसे ही नारे लगा रहे हैं। यह सुनकर मुझे थोड़ा दुख होता है, क्योंकि लगता है कि हमारे देश में राजनीति करने वाले लोगों ने अपने नारों और प्रतिक्रियाओं में कुछ नया-नया नहीं कर रहे हैं।

मुझे लगता है कि सदन की कार्यवाही के दौरान मर्यादा और गंभीरता के तहत किस तरह के नारे नहीं लगाए जाने चाहिए, यह भी सुनकर अच्छा लगता है। लेकिन अगर बुलेटिन में संदेश पर प्रतिक्रिया नहीं देने का आरोप लगाते हुए विपक्ष ने कह रहा है, तो यह अच्छा नहीं है।

मेरी राय में, राजनीति करने वाले लोगों को अपने नारों और प्रतिक्रियाओं में कुछ नया-नया कर सकते थे। जैसे कि हमारे देश की स्वतंत्रता की कहानी को याद करते हुए, 'वंदे मातरम' और 'जय हिंद' जैसे नारों से राजनीति नहीं कर सकते। इसके बजाय उन्हें अपने नारों और प्रतिक्रियाओं में हमारे देश की सच्चाई और परंपरा को याद करना चाहिए।
 
मुझे लगता है कि ये विवाद एक अच्छा अवसर है कि हम सब एक साथ और प्यार से बात करें। तो देखो, भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों ने कुछ ऐसे नारे लगाए हैं जो देश की स्वतंत्रता और प्रगति को बढ़ावा देते हैं। यह अच्छा है कि लोग अपने मतभेदों को व्यक्त करने के लिए एक साथ आ रहे हैं।

लेकिन, मुझे लगता है कि हमें यह भी याद रखना चाहिए कि सदन की कार्यवाही के दौरान मर्यादा और गंभीरता को ध्यान में रखकर बात करनी चाहिए। इसलिए, मैं सुझाव दूंगा कि भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों एक-दूसरे की बात सुनने की कोशिश करें। शायद हमें यह भी समझना चाहिए कि राष्ट्रीय गौरव को बढ़ावा देने के लिए कई तरह के नारे और अभिवादन हो सकते हैं।

मुझे लगता है कि अगर हम सब एक साथ मिलकर बात करेंगे, तो हम देश की समस्याओं को हल करने में मदद कर पाएंगे।
 
अरे दोस्त 🤔, यह तो बहुत ही अच्छा विचार था कि सदन की कार्यवाही के दौरान मर्यादा और गंभीरता के तहत नारे नहीं लगाए जाते 😉। लेकिन फिर भी, जैसे ही विपक्ष ने अपनी प्रतिक्रिया दिखाई, तो सब कुछ खराब हो गया 😒। मुझे लगता है कि संसद की कार्यवाही में मर्यादा और गंभीरता बहुत जरूरी है, लेकिन इसके लिए हमें सभी को एक ही पृष्ठ पर लाने की जरूरत है। यह तो विपक्ष के नेताओं की गलती नहीं थी, बल्कि संसद में मर्यादा और गंभीरता बनाए रखने की जरूरत थी। 🤷‍♂️

अब, जैसे ही दोनों दल अपनी-अपनी रणनीति बना रहे हैं, तो मुझे लगता है कि यह विवाद अभी भी आगे बढ़ने वाला है। मैं सिर्फ एक ही बात कह सकता हूँ - हमें सदन की कार्यवाही में मर्यादा और गंभीरता बनाए रखने की जरूरत है, और इसके लिए हमें सभी को एक ही पृष्ठ पर लाने की जरूरत है। 🙏
 
🙏 मुझे लगता है कि यह विवाद सिर्फ़ एक तरीका है जिसमें लोग अपनी राजनीतिक पहचान बना रहे हैं। वंदे मातरम और जय हिंद जैसे नारे तो हमेशा से हमारे देश की आज़ादी और स्वतंत्रता के प्रतीक माने जाते थे, लेकिन अब ये नारे राजनीतिक दलों के बीच लड़ाई का हथियार बन गए हैं।

मुझे लगता है कि हमें अपने देश की विविधता और स्वतंत्रता को समझने की जरूरत है। अगर हम ये नारे हमारे पूरे देश में लेकर चलते हैं, तो यह हमारे देश की एकता और भाईचारे को कमजोर कर सकता है।

🤔
 
मुझे लगता है कि बुलेटिन में संदेशों पर प्रतिक्रिया नहीं देने का आरोप लगाना थोड़ा हद से परे है। अगर विपक्ष ने सचमुच जानती है कि कौन से नारे सदन की कार्यवाही के दौरान नहीं लगाए जाने चाहिए, तो उन्हें बुलेटिन में संदेश पर प्रतिक्रिया करनी चाहिए। लेकिन अगर विपक्ष खुद भी यह नियम नहीं seguकरती है, तो क्या इसके लिए कोई दोषी है? 🤔 और यह बात भी तो स्वाभाविक है कि सदन की कार्यवाही में राष्ट्रीय गौरव के प्रतीकों का उपयोग करना जरूरी है।
 
अरे, ये तो सरकारी बुलेटिन में ही इतना बड़ा विवाद आया है? लगता है कि लोग तो सचमुच भूल गए हैं कि राजनीति करने का सिर्फ एक तरीका होता है, दूसरा तरीका यह कि हमारे देश की स्थिति को समझें और सही निर्णय लें। तृणमूल कांग्रेस की बात समझने में भी मुश्किल है। अगर वे इतने असहज हैं तो फिर सरकार से ज्यादा सरकार बनाने का रास्ता कैसे दिखेगा। और भाजपा की बात, वह तो नारे लगने से राजनीति करने की चीज नहीं कह रही है, बल्कि यह कह रही है कि सदन में कोई नुकसान न हो। लेकिन दोनों पार्टियों का कहना है कि विपक्ष को पता होना चाहिए, तो फिर सरकार को भी पता होना चाहिए। मुझे लगता है कि यह सारा विवाद बिल्कुल भी महत्वपूर्ण नहीं है। हमें अपने देश की स्थिति और समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, न कि राजनीतिक नारों पर। 🤔
 
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