हिमाचल IPS एसोसिएशन की MHA से शिकायत: अफसरशाही पर भड़के पूर्व DIG, बोले- IAS-IPS की प्रतिक्रिया असंवैधानिक, अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला - Shimla News

हिमाचल प्रदेश में राजस्व मंत्री जगत नेगी द्वारा IAS-IPS एसोसिएशन के बयान पर आपत्ति जताई गई है। इसके अलावा, पूर्व डीआईजी विनोद धवन ने भी एसोसिएशन की इस प्रतिक्रिया से असहमति व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि मंत्री द्वारा दिए गए बयान से नागरिकों को डराने जैसी चेतावनी की ओर इशारा होता है, जो अप्रत्यक्ष रूप से नागरिकों को दी जाने वाली कानून व्यवस्था और सुरक्षा सेवाओं को रोकने जैसी चेतावनी की ओर इशारा करती है।

विनोद धवन ने कहा है कि यह प्रतिक्रिया न केवल संविधान के अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) का उल्लंघन है, बल्कि अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) जैसे मौलिक अधिकारों की भावना के भी खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा है कि IPS एसोसिएशन द्वारा जारी बयानों को सेवा की गरिमा और संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ करार दिया गया है।

विनोद धवन ने सवाल उठाया है कि 'क्या IPS अधिकारी या उनकी एसोसिएशन को यह अधिकार है कि वे किसी नागरिक या राजनीतिक व्यक्ति के प्रति कानून के संरक्षण को लेकर सार्वजनिक रूप से चेतावनी या धमकी जैसा संदेश दें?'

उन्होंने यह भी कहा है कि पुलिस अधिकारी पवित्र गाय नहीं हैं। यदि कुछ अधिकारी भ्रष्ट या पक्षपाती हैं और उन पर सवाल उठते हैं, तो पूरे तंत्र को सामूहिक रूप से आहत होकर संविधान की मर्यादाएं लांघने का अधिकार नहीं है।

विनोद धवन ने इसे एक खतरनाक मिसाल बताया और कहा है कि अगर सुरक्षा देने वाली संस्थाएं ही यह संकेत देने लगें कि वे नागरिकों को कानून का संरक्षण देने से पीछे हट सकती हैं, तो यह संविधान और लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है।
 
नज़र में यह बयान थोड़ा अजीब लग रहा है, मुझे लगता है कि IPS एसोसिएशन ने बिल्कुल सही किया है। अगर उन्होंने ऐसा बयान दिया तो शायद सरकार ने कुछ गुप्त तौर पर चलाया हुआ है। लेकिन फिर भी, यह बयान मुझे थोड़ा चिंतित कर रहा है, मुझे लगता है कि इससे नागरिकों की सुरक्षा पर खासकर डराने वाला संदेश दिया गया है।
 
सरकार द्वारा बातें बोलने में फुसफुसाहट नहीं करती, लेकिन जब कुछ होता है तो वे तेजी से बोलने लगते हैं 🚨। हाल के बयानों ने मुझे सोचा कि क्या हमारी सुरक्षा एजेंसियां अब अपने कर्तव्य को भूल गई हैं? यह एक बड़ा सवाल है और इसका जवाब देने के लिए समय है।
 
आपको लगता है कि नागरिकों को डराने जैसी चेतावनी देना अच्छा है? नहीं, नहीं, नहीं! ऐसा करना बिल्कुल भूल गयें ताकि लोग पुलिस स्टेशन पर लगे कर्ज भुगत सकें।
 
मुझे ये बयान IPS एसोसिएशन की ऐसे कामों से निराश करता है, जैसे कि वे नागरिकों को डराने की ताकत मानते हैं। यह बिल्कुल सही नहीं है, क्या हमारे IPS अधिकारी अपने देश के लिए और उसके नागरिकों के लिए इतने कमजोर होते हैं?

मुझे लगता है कि विनोद धवन जी ने बिल्कुल सही कहा है। यह बयान संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 का उल्लंघन है, और हमें इस तरह की प्रतिक्रिया से बचना चाहिए।

क्या हमारे IPS अधिकारी अपने देश को इतना खतरा महसूस कर रहे हैं? मुझे लगता है कि वे गलत रास्ते पर चल रहे हैं। हमें अपने लोकतंत्र और संविधान की रक्षा करनी चाहिए, न कि इसे कमजोर बनाना। 🤔😒
 
😒🤔 मुझे लगता है कि आईपीएस एसोसिएशन का बयान ज्यादा फैलाव में आ गया है। 😅 यह तो सिर्फ नागरिकों की चिंताओं को बढ़ा दिया है, लेकिन इसका जवाब तो दिया नहीं। 🤷‍♂️

क्या हमारे पुलिस अधिकारी या उनकी एसोसिएशन से ऐसा कहने में रोका नहीं जा सकता? 🚫 यह तो नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण के लिए ही नहीं, बल्कि हमारे समाज की शांति के लिए भी खतरनाक है। 😨

हमें अपने पुलिस अधिकारियों की ईमानदारी पर भरोसा करना चाहिए, न कि उन्हें बयान देने के लिए मजबूर करना। 🙏 हमें सिर्फ उनकी गलतियों को ठीक करने की ही बात करनी चाहिए, नहीं तो यह एक खतरनाक मिसाल बन जाएगी।
 
यह बहुत चिंताजनक है जब IPS एसोसिएशन ने ऐसा बयान दिया है जिससे लोगों में डर की भावना पैदा हो रही है। इसका मतलब यह नहीं हो सकता कि हमारे सुरक्षा संसाधन अपने कर्तव्य को समझ नहीं पा रहे हैं। हमें उम्मीद थी कि IPS अधिकारी हमारी सेवा करने वाले देशभक्त होंगे, न कि अपने निजी हितों को ध्यान में रखकर. यह बयान से नागरिकों की भावनाओं को चोट पहुंच रहा है और हमारे समाज को विभाजन की ओर ले जा रहा है।
 
मुझे ऐसा लगता है कि एसोसिएशन ने गलत काम किया है 🤦‍♂️। मैंने भी बहुत से IPS अधिकारियों से बात की है, जो वास्तव में समाज की सेवा करने के लिए तैयार हैं। उन्हें ऐसा बयान देना चाहिए जो समाज को खुश करे। लेकिन एसोसिएशन ने ऐसा बयान जारी किया है जिससे नागरिकों को डराया जा रहा है। यह बहुत गलत है। 🚫 मुझे लगता है कि IPS एसोसिएशन को अपने बयान को वापस लेना चाहिए।
 
मुझे लगता है कि IPS एसोसिएशन के बयान ने कुछ लोगों को परेशान किया है, लेकिन मुझे यह सोचकर नहीं चिंतित हूँ। क्या हमारे देश में अभी भी ऐसे लोग हैं जो अपने अधिकारों के बारे में जागरूक नहीं हैं?

लेकिन, विनोद धवन की बात सुनकर मुझे लगता है कि यह बयान थोड़ा गंभीर है। अगर IPS एसोसिएशन द्वारा दिया गया बयान नागरिकों को डराने जैसी चेतावनी की ओर इशारा कर रहा है, तो यह स्थिति सामाजिक रूप से अस्थिर हो सकती है। 🤔

मुझे लगता है कि हमें यह समझना चाहिए किIPS एसोसिएशन ने दिया गया बयान क्यों दिया, और इसके पीछे क्या मकसद था। अगर यह बयान सच्चाई को छुपाने की कोशिश नहीं कर रहा है, तो हमें इसके पीछे कारणों पर विचार करना चाहिए। 💡
 
मुझे लगता है कि IPS एसोसिएशन ने गलत रास्ते पर चलने की शुरुआत कर दी है, भले ही उनका उद्देश्य विचारों की स्वतंत्रता की रक्षा करना हो। अगर हम एक समृद्ध और निष्पक्ष लोकतंत्र में रहते हैं, तो हर व्यक्ति को अपने विचारों को व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन यह सुनिश्चित होना चाहिए कि हमारी बोलचाल प्रत्येक अनुच्छेद को ध्यान में रखते हुए हो। सरकार और राजनीतिक दलों को भी अपने बयानों में सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि हम एक समृद्ध लोकतंत्र बनाए रख सकें।
 
मुझे लगता है कि आईपीएस एसोसिएशन का यह बयान बहुत बड़ा मुद्दा उठाता है। मैं सोचता हूँ कि पुलिस अधिकारी किसी भी बात पर जोर देने से पहले अपने विचारों को अच्छी तरह से सोच लें 🤔। उन्होंने कहा है कि यह बयान नागरिकों को डराने जैसी चेतावनी की ओर इशारा करता है, जो मुझे बहुत परेशान करता है।

मैं सोचता हूँ कि IPS एसोसिएशन का यह बयान संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 का उल्लंघन कर रहा है। पुलिस अधिकारी हमेशा अपने पद को बहुत गंभीरता से लेते हैं, लेकिन कभी-कभी उनके बयान इसी नाम के बाहर जाते हैं।

मुझे लगता है कि यह बयान पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एक खतरनाक मिसाल है। अगर सुरक्षा देने वाली संस्थाएं ही यह संकेत देने लगें कि वे नागरिकों को कानून का संरक्षण देने से पीछे हट सकती हैं, तो यह संविधान और लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ा खतरा है।
 
मैंने पढ़ा कि राजस्व मंत्री जगत नेगी ने IAS-IPS एसोसिएशन के बयान पर आपत्ति जताई है, और पूर्व डीआईजी विनोद धवन ने भी इसके खिलाफ कहा है कि यह संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 का उल्लंघन है। मुझे लगता है कि इससे लोगों को डराने जैसी चेतावनी दी जा रही है, जो कि संविधान की मर्यादाओं के खिलाफ है। मैं सवाल करता हूं कि क्या IPS अधिकारी या उनकी एसोसिएशन को यह अधिकार है कि वे नागरिकों के प्रति कानून के संरक्षण को लेकर सार्वजनिक रूप से चेतावनी या धमकी जैसा संदेश दें।
 
जगत नेगी के बयान से पहले सोचो कि ये भारत में क्यों हुआ? हमारे देश में तो सुरक्षा और कानून व्यवस्था बहुत जरूरी है, लेकिन फिर भी ऐसे बयान कैसे कर सकते हैं जो नागरिकों को डराते हैं। यह तो किसी भी पार्टी या सरकार के खिलाफ था नहीं, बस एक मंत्री द्वारा ऐसा बयान करने से।

मेरी राय है कि इस तरह के बयान ने नागरिकों को सचेत कर रहे हैं और उन्हें सोच रहे हैं कि सरकार या पुलिस उनकी रक्षा नहीं करेगी। यह तो बहुत खतरनाक है, क्योंकि इससे लोगों में शक्ति की भावना बढ़ने लगेगी।

हमें लगता है कि IPS एसोसिएशन ने सही काम किया है। जिस तरह हमारे देश में संविधान और मर्यादाएं बहुत महत्वपूर्ण हैं, उसी तरह पुलिस अधिकारी भी उनको लागू करने चाहिए।
 
मैने देखा है कि IPS एसोसिएशन ने जारी बयान तो बहुत ही दुर्भावनापूर्ण लग रहा है, क्या उन्हें पता है कि वे अपने बयान से कितना नागरिकों को डरा सकते हैं? 🤔 मेरे मानने के अनुसार, यह बयान सिर्फ नागरिकों की गरिमा और संविधान की मर्यादाओं का उल्लंघन करता है, इसके अलावा यह भी एक खतरनाक मिसाल है जिससे लोकतंत्र को खतरा हो सकता है। 😬
 
वाह, इस मामले में लगातार संवेदनशील रहकर जो बोल रहे हैं वो सही कह रहे हैं। ऐसे बयान देने से नागरिकों का डर बढ़ता है और यह एक गंभीर समस्या है। पुलिस अधिकारियों को अपने काम में ईमानदारी बनाए रखनी चाहिए और नागरिकों को सुरक्षा देनी चाहिए, न कि डराना। IPS एसोसिएशन का यह बयान सेवा की गरिमा के खिलाफ है और इससे लोकतंत्र को खतरा है। हमें ऐसी बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए जो नागरिकों को डराती हैं 🤔
 
मुझे लगता है कि ये सब कुछ बड़ा-बड़ा मामला नहीं बनाया जाना चाहिए। अगर राजस्व मंत्री ने तो अपने बयान से लोगों को डराने की इच्छा थी, तो उन्हें और भी बिगड़-बोलट कर काम करना चाहिए ना, फिर सारी राजनीति के बारे में सुनने की जरूरत नहीं होती। लेकिन देखो, पूर्व डीआईजी विनोद धवन ने अपना बयान दिया और अब सब सोच रहे हैं कि IPS एसोसिएशन तो फिर भी दूसरी जंग की शुरुआत कर रहा है।

मेरी राय में, यह एक बड़ा-बड़ा विवाद होने से पहले हल करने का समय आ गया है। हमें अपने देश में तो इतनी समस्याओं का सामना करना पड़ता है और फिर ऐसी चीजें होती जिनसे हम सभी परेशान हो जाते।
 
नमस्ते मित्रों! 🤔 आज की बात है हिमाचल प्रदेश में आईएसएएस सोसायटी के बयान पर। मुझे लगता है यह बहुत खतरनाक है और हमारे देश की संविधान की मर्यादाओं को भी लांघता है। यह तो नागरिकों को डराने जैसी चेतावनी देने वाला बयान है, जिससे हमारी लोकतंत्र की स्थिरता पर प्रभाव पड़ सकता है...
 
बोलते हुए मैंने सोचा, ये बयान बहुत खतरनाक है क्या लोगों को डराने की भावना है? 🤔 हमारे देश में नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करने वाली संस्थाएं कैसे कमजोर कर सकती हैं? इससे पहले तो सरकार और पुलिस को अपना काम साफ साफ करना था, अब बोलते हुए उन्हें भी लोकतंत्र की मर्यादाओं में आ जाना चाहिए।

ये बयान IAS-IPS एसोसिएशन से आया है, लेकिन इसके पीछे यह नहीं है कि उनमें नागरिकों को बुरा महसूस हो रहा है, बल्कि यह एक गलती है। हमारे देश में हमेशा से लोकतंत्र और संविधान के महत्व को ध्यान में रखते हुए अपने बयानों को बनाते थे, आज भी ऐसा करना चाहिए।

मैंने सवाल उठाया, अगर एक पुलिस अधिकारी गलत है तो उसकी सहायता नहीं करें, लेकिन अगर हम इस तरह से बोलते हैं कि नागरिकों को डराने जैसा संदेश देते हैं, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
 
मुझे लगा कि यह बयान सचमुच भयानक है 🤯, मंत्री ने इतना बयान दिया है जैसे वो खुद को खतरे में डाल रहा है। और यह IPS एसोसिएशन का बयान तो पूरी तरह से असहमति का प्रतीक है, लेकिन मुझे लगता है कि यह बयान नागरिकों को डराने जैसा लगता है, जिससे हमारी देशभक्ति और सम्मान कम होता है।
 
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