‘हमें बचा लो, बांग्लादेश में मर जाएंगे‘: भारत से 14 लोग डिपोर्ट, बहन बोली- वोटर कार्ड, 60 साल पुराने कागज, फिर क्यों भगाया

शेख जब्बार की कहानी बहुत दुखद है, उनको शरण में भेजने के बाद भी पुलिस ने उन लोगों को पकड़ लिया जिन्हें उनके परिवार के साथ रखना चाहती थी। यह तो एक बड़ा अपराध है और हमें लगता है कि ओडिशा पुलिस को अपनी गलती मान लेनी चाहिए। शेख जब्बार जैसे लोगों को भारत में शरण देने से पहले हमें सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी जिंदगी और सुरक्षा सुनिश्चित हो।
 
मेरा मानना hai ki इस मामले को जुड़े व्यक्तियों के नाम नहीं छापते हुए देखकर मुझे थोड़ा परेशानी हुई। बात कुछ ऐसी है जिसमें हम सबको सुनने का मौका मिलता है। शेख जब्बार और उनके परिवार के लोगों को ओडिशा पुलिस ने हिरासत में लिया था, लेकिन बाद में उन्हें अवैध घुसपैठी बताने वाली मशीन से दोषी ठहराया गया। ऐसा लगता है कि यह एक बड़ा गड़भड़ हो रहा है।

मैंने जानकारी देखी है कि बांग्लादेश से आये लोगों में 55% के लिए पासपोर्ट और वीज़ा मंजूरी मिलना मुश्किल होता है, जबकि बाकी 45% लोगों को आसानी से मिलता है।

इस दौरान ओडिशा में 22.5% गरीब आबादी है जिसके पास सुनिश्चित रोजगार का नहीं होना है, जबकि बांग्लादेश के बीच से आये लोगों में 65% के पास ऐसी स्थिति है।
 
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