भागवत बोले-बेटी बहकावे में कैसे आती है, परिवार सोचें: भोपाल में स्त्री शक्ति संवाद में कहा- परिवारों में चर्चा होगी तब रुकेगा लव जिहाद - Bhopal News

"परिवार, समाज और राष्ट्र में महिलाओं की भूमिका को समझने की जरूरत है। परिवारों से शुरू करके लोग इस बात पर विचार करें, कि बेटियां बहकावे में कैसे आ जाती हैं।

देश में महिलाओं का एक-तिहाई हिस्सा सामाजिक और राष्ट्रीय भूमिका से पूरी तरह नहीं जुड़ा है। ऐसी महिलाओं के विकास के लिए विशेष प्रयास की जरूरत है। जहां नारी का सम्मान सुरक्षित होता है, वहीं समाज स्वतः स्वस्थ रहता है और राष्ट्र की रक्षा करने के लिए तैयार रहता है।"
 
मैंने देखा है कि बहुत सारी महिलाएं अपने परिवार में बहकावे में आ जाती हैं और वे अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाती। लेकिन मुझे लगता है कि अगर हम उनकी मदद करें तो वे अपने लक्ष्यों तक पहुंच सकती हैं। मेरी बेटी भी बहुत अच्छी है और वह अपने सपनों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करती है। मुझे लगता है कि अगर हम सभी अपनी लड़कियों की मदद करें तो वे बेहतर भविष्य बना सकती हैं।
 
राजनीति में महिलाओं को जरूरी जोड़ देने की जरूरत है, वे हमेशा से ही नेतृत्व की भूमिका में रह सकती हैं। लेकिन आजकल उनकी भाग्यचक्र पर पूरा ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

यदि भारतीय समाज में महिलाओं को अपने स्थान के बारे में समझाया जाए, तो हमें यह समझने की जरूरत है कि उनकी रुचि और प्रतिभा न केवल घरेलू कामों में भी लाई जा सकती है।
 
🌹 बेटियों को खिलौने में नहीं, परिवारों में साथ साथ पाला जाना चाहिए। देखो, उनके प्यार और सहयोग से घर में भी ठीक होता है और बाहर के लिए भी बहुत जिम्मेदार बनती हैं। 🤝 महिलाओं को अपने सपनों को पूरा करने दो, उन्हें आगे बढ़ने का मौका दो। फिर देखें, विकास और समृद्धि हमेशा उनके साथ ही आती है। 💪
 
बेटियों को पूरी तरह से समझने की जरूरत है, बस इतना नहीं कि हम उन्हें अपने घरों में रखें और फिर बाहर बेचें। उन्हें स्कूल, कॉलेज, नौकरी, सबकुछ दिखाएं। यही तो सच्चे समाज का आधार है। 🤝
 
तो ये देखो कि पुरुषों की तरह हमारी भी एक-तिहाई महिलाएं नहीं हैं। क्या इसका मतलब यही है कि हमें पता न चल गया है? हमारे घरों में भी बेटियां बहकावे में आ जाती हैं, बस उनको पहचानने की जरूरत है। और देश की ये स्थिति तो हमारे पास ही है - महिलाओं को सम्मान नहीं मिल रहा है, ना ही उनके अधिकारों को मान्यता मिल रही है।

लेकिन यही बात है - अगर हमारी लड़कियां सही दिशा में जाएं, तो फिर भी राष्ट्र की रक्षा कर पाएंगे। मैंने अपनी बहन को खुद से कहा था, जब वह छोटी थी, 'तेरी पढ़ाई पर ध्यान देना'। और अब वह स्वतः हंसकार-राज निकल गई।
 
महिलाओं को हमेशा सम्मान मिलना चाहिए 🙏, वे भी एक सशक्त जनसंख्या हैं। परिवारों में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दे पर ध्यान देना जरूरी है। हमें यह समझने की जरूरत है कि बेटियां खुश-खुश होकर बड़ी होनी चाहिए, न कि बहकावे में। सरकार को और समाज को महिलाओं की भूमिका पर रुकने से नहीं रह सकता। 🤔
 
बेटियों को समझने की जरूरत है। पापा की बात है, लेकिन घर में बेटी को एक ही गोल मारना चाहिए। नारी को पैसे की जरूरत नहीं होती, बस स्वस्थ और खुश रहनी चाहिए। जितनी अच्छी लड़की होगी, उतना ही अच्छा परिवार बनेगा। और बिल्कुल सही कहा है कि देश में नारियों को उनकी जगह नहीं मिलती। उन्हें सुरक्षित और सम्मानित महसूस करना चाहिए, तभी देश अच्छा रहेगा।
 
अरे दोस्त, यह बहुत जरूरी बात है कि हमें परिवार, समाज, और राष्ट्र में महिलाओं की भूमिका को समझने की जरूरत है। जैसे कि बेटियों को खाने के लिए प्यास न लगे, वैसे ही महिलाओं को समाज और राष्ट्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका से जुड़ने की जरूरत है।

मैं समझता हूँ कि देश में महिलाओं का एक-तिहाई हिस्सा अभी भी पूरी तरह से शामिल नहीं हो सका है, लेकिन इसके पीछे कई कारण हैं। हमें ऐसी महिलाओं के विकास के लिए विशेष प्रयास करने चाहिए और उन्हें अपने अधिकारों के बारे में जागरूक करना चाहिए।

जब नारी का सम्मान सुरक्षित होता है, तो वहीं समाज स्वतः स्वस्थ रहता है और राष्ट्र की रक्षा करने के लिए तैयार रहता है। 👍🏼
 
नारियों को पूरी जिम्मेदारी देने की जरूरत है, लेकिन उनके साथ भी सहानुभूति रखनी चाहिए। हमें पता होना चाहिए कि एक नारी कैसे मानसिक संघर्ष से गुजरती है और फिर स्वतंत्रता प्राप्त होती है।
 
महिलाओं को हमेशा बेटियों की तरह नहीं देखना चाहिए। उनकी भूमिका बहुत जटिल है और सामाजिक परिदृश्यों में बदलती रहती है। सरकार ने बाल विवाह रोकने की नीति लागू कराई, लेकिन अभी तक हमने पूरे परिवार को बेहतर बनाने का सोच नहीं किया है।
 
महिलाओं को परिवार में बहुत महत्व देना चाहिए, वो कैसे बड़ी होती हैं ये सब समझना जरूरी है 🤝। लेकिन भारत में कई जगहों पर बेटियों को पुरुषों के साथ समान अधिकार नहीं दिए जाते हैं और यह बहुत ही निराशाजनक है। हमें ऐसे प्रयास करने चाहिए कि लड़कियों को अच्छा शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य के अवसर मिल सकें ताकि वो स्वतः अपने जीवन बना सकें।
 
महिलाओं की भूमिका को समझने की बात बहुत जरूरी है 🤝, मेरी भारतीय संस्कृति की एक पुरानी कहावत है 'नारी श्रेष्ठ' (नारी सबसे अच्छी), लेकिन आजकल युवाओं में लड़कियों को परिवारिक दबाव और समाज की अपेक्षाओं के बीच खोने का खतरा है। मेरी राय में, हमें अपने बच्चों को स्वतंत्र, आत्मनिर्भर और सशक्त महिलाएं बनानी चाहिए। 👧🏼

देश में एक-तिहाई महिलाओं को पूरी तरह से शामिल नहीं होने का मतलब है हमारी समाजिक और राष्ट्रीय पहचान की कमी है। हमें ऐसी महिलाओं के लिए विशेष संसाधन और समर्थन प्रदान करने की जरूरत है, ताकि वे अपने सपनों और लक्ष्यों को पूरा कर सकें। 💪

महिलाएं समाज और राष्ट्र की रक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। हमें उन्हें सम्मानित करना चाहिए और उनके योगदान को स्वीकार करना चाहिए। 👏
 
बेटियों को पढ़ने, लिखने और अपने dreams chase karne ke liye sabse pehle apne gharwalon ko sahi samajhana chahiye... 🤝
किसi bhi desh me koi bhi desh ki tarah hi niyam nahin honge, par humein ek cheez ka dhyan rakhna chahiye, jo hai, 'Nari Shakti' ... 💪
aaj kal log 'selfie' lene mein maza le rahe hain, par ladkiyon ko bhi self-confidence dekhne ke liye sabse pehle apni self-care practice karna chahiye... 📸
desh ke har jhonde me ek naya samay aata hai, aur usme kuch aur naye vichaar nikaale jate hain... to humein us time ko aur zaroor kaam karne ka mauka dena chahiye! 💫
 
बेटियों को बिना किसी दबाव के खुद अपनी जिंदगी बनाने का मौका देना चाहिए। देश में ऐसा बहुत कम होता है और हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि अगर एक लड़की सुरक्षित महसूस करती है, तो उसके पास जिंदगी को समझने और अपने फैसलों लेने का मौका होना चाहिए।
 
मुझे ऐसा लगता है कि बेटियों को हमें खिलौने में ना डालना चाहिए, बल्कि उन्हें जिम्मेदारियों से भरपूर काम देना चाहिए। अगर युवतियों को स्कूल में पढ़ाई और किसानी जैसे पेशे में नौकरी करने का मौका मिले, तो फिर भी वे बेटी बने रहने की कोशिश नहीं करेंगी। हमारे देश में महिलाओं को अभी भी सामाजिक और राष्ट्रीय खेल में शामिल होने का मौका न मिलना बहुत ही दुखद है।
 
बेटियों को पूरे समाज में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए, जैसे कि देश की सुरक्षा और भविष्य की राहें तय करना।
 
महिलाओं की भूमिका को समझने में हमें बहुत बातें करनी पड़ती हैं। परिवारों में बेटियों की शिक्षा और रोजगार के अवसर देना जरूरी है। लेकिन यह सिर्फ परिवार तक ही नहीं है, समाज और राष्ट्र को भी महिलाओं की महत्ता समझनी चाहिए। हमें ऐसी महिलाओं के पास जाना चाहिए जो अपने अधिकारों के लिए लड़ती हैं और सामाजिक परिवर्तन लाने में मदद करती हैं। अगर नारी का सम्मान सुरक्षित होता है, तो समाज और राष्ट्र भी स्वस्थ रहते हैं। 🌟👩
 
महिलाओं को हमें एक नई दिशा में विचार करना चाहिए। पूरा समाज उन्हीं को महत्व देना चाहिए जिन्होंने भी अपने परिवार और देश की रक्षा के लिए बड़े-बड़े सacrifice किए हैं... 🤝 उनकी बेटियां भी एक समान अधिकार प्राप्त करें। यह महिलाओं को पूरी तरह खुद पर विश्वास करने और अपने जीवन का निर्णय लेने में मदद करेगा।
 
महिलाओं की भूमिका समझने में हमें बहुत ज्यादा देर नहीं लगेगी, चाहे वह परिवार में हो या समाज में। जैसे हम कहते हैं "सवाई से सही" तो यहाँ भी इसका अर्थ है कि हमें अपने परिवारों और समाज की बात समझनी चाहिए। लेकिन देखें, देश में यानी हमारे भारत में महिलाओं की भूमिका समझने में बहुत ज्यादा देर लग गई है। क्या नहीं पता, अगर हम अपनी बेटियों को अच्छा शिक्षा देंगे, सुरक्षित रखेंगे तो उनकी खुशहाली होगी, समाज भी फायदा करेगा और राष्ट्र भी। हमारे देश में महिलाओं का एक-तिहाई हिस्सा बाकी हिस्से से पूरी तरह से अलग है। उनको अपने जीवन को सुरक्षित करने के लिए हमें बहुत सावधानी बरतनी होगी। 🤔
 
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