कुरान का हवाला देकर केरल हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को मिलेगा भरण-पोषण

केरल हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले सुनाते हुए कहा है कि तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को भरण-पोषण की मांग करने की स्वतंत्रता मिलेगी, चाहे उनका पति ने मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत अपनी जिम्मेदारियां पूरी कर दीं हों। इस फैसले में जस्टिस कौसर एदाप्पगाथ ने एकल पीठ में सुनाया है और उन्होंने धार्मिक ग्रंथ कुरान की आयत 241 का हवाला देते हुए कहा है कि तलाकशुदा महिलाओं के भविष्य की आजीविका न्याय का मूल आधार है।
 
बहुत ही रोचक फैसला है यह! केरल हाईकोर्ट का यह फैसला हमें यह बताता है कि किसी भी धर्म में महिलाओं के अधिकारों को महत्व देना चाहिए। तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को भरण-पोषण की मांग करने की स्वतंत्रता देना एक बहुत ही अच्छा निर्णय है, खासकर जब उनका पति उन्हें वफादारी और समर्थन देने की आशा कर रहा हो। यह फैसला न्यायिक प्रणाली में सुधार लाने की दिशा में एक कदम है।
 
भारत में जो भी नई दिशा तय होती है, वह हमेशा एक ऐतिहासिक फैसला सुनाती है 🤔। इस बार केरल हाईकोर्ट ने तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं के लिए कुछ नए रास्ते खोल दिए हैं जो हमेशा से अपने पति के पैसों पर टिकी रहने के बारे में थक गई हैं। 🤑 अब उन्हें भरण-पोषण की मांग करने की आजादी मिलेगी और यह कोई बड़ी बात नहीं है क्योंकि यह न्याय का एक अंश है। 🙏 सुनकर मुझे तो बस यह विचार आ गया कि हमें अपने समाज में भ्रष्टाचार कम करना चाहिए और सच्चाई को आगे बढ़ाना चाहिए।
 
ब्रिटिश शासन के समय से ही हमारे समाज में महिलाओं का दर्जा कमजोर रहा है, लेकिन अब केरल हाईकोर्ट ने एक बड़ा कदम बढ़ाया है - तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को भरण-पोषण की स्वतंत्रता मिलेगी। यह फैसला उन महिलाओं के लिए एक राहत का संकेत है जिनके पास अपने पति द्वारा आरक्षित अधिकार हैं। लेकिन हमें उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि यह फैसला हमारे समाज में बदलाव लाएगा। अभी भी हमारे समाज में महिलाओं को सामाजिक रूप से महत्व नहीं दिया जाता है। 🤔
 
मुझे लगता है कि ये फैसला बहुत ही सकारात्मक है, विशेष रूप से महिलाओं के लिए 🤝। अगर हमारी देशभर में ये नियम लागू हो जाए, तो महिलाओं को अपने पति से अलग होने पर भी अपना जीवन स्थिर बनाने में मदद मिलेगी। जस्टिस एदाप्पगाथ ने बात की है कि तलाकशुदा महिलाओं के भविष्य की आजीविका न्याय का मूल आधार है, लेकिन अगर हम दूसरों की भलाई सोचें, तो यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ये फैसला सभी के लिए न्यायपूर्ण और समावेशी हो।
 
अरे, यह फैसला वास्तव में सोच-समझकर दिया गया है। तो अगर तलाकशुदा महिलाएं अपने पति ने ना मानी है, तो उन्हें भरण-पोषण की जिम्मेदारी करनी चाहिए। यह मुस्लिम महिलाओं के लिए बहुत जरूरी है। मैंने देखा है कि कई महिलाएं अपने पति से तलाक लगवाती हैं, फिर भी वे उनके घर को छोड़कर बाहर जाती हैं। यह तो बहुत बुरा है। अब यह फैसला ऐसी महिलाओं के लिए अच्छा होगा।
 
मुझे यह फैसला बहुत अच्छी बात लगता है, क्योंकि हमारी संस्कृति में महिलाओं को सम्मान देने के लिए हमेशा से काम करने वाले न्यायपालिका ने फैसला सुनाया है कि तलाकशुदा महिलाओं को भरण-पोषण की मांग करने की स्वतंत्रता दी जाएगी। यह तो हमारे राष्ट्रीय सम्मान की बात है, जब तक कि पति ने अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं कर लेंगे, तब तक मुस्लिम महिलाओं को भरण-पोषण का अधिकार मिलेगा।
 
अरे वाह! इस फैसले से पहले मैंने नहीं सोचा थी कि केरल हाईकोर्ट इतना मस्त होगा। बस यह देखकर अच्छा लगा कि तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को भरण-पोषण की मांग करने की स्वतंत्रता मिलेगी। तो अब उन्हें अपना भविष्य बनाने की आजीविका कर सकती हैं और खुद को अच्छी तरह से देख सकती हैं। लेकिन, फैसले के पीछे जस्टिस कौसर एदाप्पगाथ की समझ में कुछ गड़बड़ी है, यह तो सोच रहा था कि उन्होंने कहीं कुरान की आयत 241 को भूल दिया है। लेकिन, फिर क्या? अब तलाकशुदा महिलाओं को अपना मंच मिल गया है और हमें उनकी सफलता की उम्मीद करनी चाहिए।
 
पहले से ही ऐसे मामले तो बढ़ रहे थे... अब यह फैसला आया है कि तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को भरण-पोषण की मांग करने की स्वतंत्रता मिलेगी। लेकिन देखिए, यह फैसला ऐसे व्यक्तियों को देने जा रहा है जो एक बार तलाक कर देते हैं और फिर भी अपनी पत्नी को धोखा देना चाहते हैं। मुझे लगता है कि यह फैसला सिर्फ इतना सुधार नहीं लेगा, बल्कि इससे भी बड़े सामाजिक मुद्दों को उजागर करेगा। और क्या हमें लगता है कि इस तरह से समस्या का समाधान होगा?
 
मैंने इस फैसले को सुना तो मुझे थोड़ा अजीब लगा, पूरे देश में तलाकशुदा महिलाओं को भरण-पोषण करने की जिम्मेदारी किसे निभानी है? यह तो एक नई चीज़ है। लेकिन फिर सोचते हुए मैं कहूँगा कि यह फैसला जरूर महत्वपूर्ण है, तलाकशुदा महिलाओं को भी अपने जीवन का निर्धारण करने का अधिकार होना चाहिए। उनके भविष्य की आजीविका के बारे में हमें सोचने की जरूरत नहीं है, हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह अपने जीवन को जीने के लिए मजबूत हों।
 
पहला ज्ञान हमेशा सिर्फ जानने का, बाकी सब करने का है 🤓
केरल हाईकोर्ट का यह फैसला तो बहुत बड़ा कदम है, निश्चित रूप से तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं के लिए ज्यादा सुरक्षा और स्वतंत्रता प्रदान करेगा।
 
मुस्लिम महिलाओं को भरण-पोषण की ज़रूरत पड़ने पर तुरंत मदद करनी चाहिए, खासकर जब उनका पति कुछ नहीं कर पाता तो 🤔. यह फैसला सच में बहुत अच्छा है, लेकिन मुझे लगता है कि इसे केरल सरकार ने शायद इसलिए दिया है क्योंकि वहां भी सामाजिक आर्थिक सुरक्षा की बात चल रही थी, तो यह फैसला एक अच्छा बदलाव की तरह लगता है।
 
એમ છે, તાલાક સુધારવાનો પગથિયો ચાલ્યો જાય છે. આમ, તાલાક સુધારવાના કાયદામાં ભલે બહુત પરિવર્તન આવી ગયા છે, ફરિયાદ એ જ નથી. કેટલાંક સમયથી, આવું જ હતું, પણ અહીં ચિન્તા એટલી છે કે બધા મુસ્લિમ લોકો આશીર્વાદ મળતા હશે?
 
मैंने कभी नहीं सोचा था कि केरल हाईकोर्ट में ऐसा फैसला सुनाया जाएगा। यह तो बहुत अच्छी बात है कि तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को भरण-पोषण की मांग करने की स्वतंत्रता मिलेगी। मैं अपनी दादी की कहानियाँ सुनते हूँ, जिन्होंने भी ऐसी हालत में पड़ गई थीं। वे हमेशा बेटे-बेटियों से मदद मांगती, लेकिन कभी नहीं मिली। यह फैसला उन महिलाओं को न्याय देने के लिए है, जो अब अपने पति के बाद की जिंदगी से बुरा अनुभव कर रही हैं। 🙏
 
केरल हाईकोर्ट का फैसला बहुत ही महत्वपूर्ण है, लेकिन यह भी एक बड़ी जिम्मेदारी है 🤔। तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को भरण-पोषण की मांग करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए, लेकिन इसके साथ-साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि वे अपने पति के पास जाने के लिए तैयार और सक्षम हों। फैसले में यह भी शामिल होना चाहिए कि कैसे यह स्वतंत्रता प्राप्त करने वाली महिलाएं अपने भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए मदद और समर्थन ल सकें।
 
यह तो सिर्फ एक और मामला जिसमें कानून की अंधकार्रता का पूरा रूप दिखाई दे रहा है 🤔. तलाकशुदा महिलाओं को भरण-पोषण की मांग करने की स्वतंत्रता? ये तो एक नए शिकार की शुरुआत होगी। पहले क्या यह पति तो मर जाएगा? फिर किसने उनके लिए देखरेख करानी होगी? और फिर भी कौन जिम्मेदार होगा? यह तो एक बड़ा मुद्दा बन गया है 🤑.
 
केरल हाईकोर्ट का यह फैसला बहुत ही सोच-समझकर दिया गया है, लेकिन कुछ और भी सोचने की जरूरत है कि यह कैसे प्रभावित करेगा जिस सामाजिक परिवेश में आ रहा है। एक ओर तो यह महिलाओं को अपने भविष्य के लिए सुरक्षा और सहायता प्रदान करेगा, दूसरी ओर इसके साथ-साथ कई सवाल भी उत्पन्न होते जाएंगे, जैसे कि यह फैसला कहीं नहीं ले जाएगा तो हमें कैसे जानना है कि कितनी महिलाओं का इसे लाभ होगा और कितनी। मुझे लगता है कि यह एक दिशा में आगे बढ़ना है, लेकिन इसमें भी बहुत सावधानी बरतनी चाहिए, जैसे कि किसी भी फैसले को लेने से पहले सार्वजनिक मानसिकता की बात करनी चाहिए। 🤔
 
मुझे लगता है कि यह फैसला महिलाओं के लिए बहुत राहतगाह होगी, खासकर उन महिलाओं के लिए जो तलाक के बाद अपनी आजीविका बनाए रखने में परेशानी का सामना कर रही थीं। सरकार को तो अब यह देखना होगा कि वे इस फैसले को कैसे लागू करते हैं और इससे प्रभावित होने वाली महिलाओं को मिली मदद से उनकी जिंदगी में सकारात्मक परिवर्तन कैसे आया होगा। यह एक नए युग की शुरुआत है जहां महिलाएं अपने भविष्य के लिए स्वतंत्र होंगी। 🙏💪
 
मुझे लगता है कि यह फैसला तो बहुत ही पुरानी दिनों की तरह आ रहा है, जब महिलाओं को अपने पति से खुद को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने का मौका मिलता था। अभी भी हमारे देश में ऐसी कई लड़कियां हैं जो परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने पति के घर जाती रहती हैं। यह फैसला तो उनके लिए बहुत ही अच्छा साबित होगा। मुझे लगता है कि इस फैसले ने हमें देश की पुरानी परंपराओं और संस्कृतियों को याद दिलाया है।
 
मैंने पढ़ा है कि केरल हाईकोर्ट ने ऐसा फैसला सुनाया है जो बहुत ही महत्वपूर्ण है... तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को भरण-पोषण की मांग करने की स्वतंत्रता मिलेगी, यह तो बहुत अच्छा है... लेकिन मैं तो सोचता हूँ कि यह फैसला देश भर में लागू होना चाहिए, नहीं तो ये एकल पीठ का निर्णय ही राहत देगा, लेकिन सामान्य लोगों को भी इसे जानने और समझने का मौका मिलना चाहिए... और फैसले में आयत 241 को हवाला देते हुए, मुझे लगता है कि यह बहुत ही महत्वपूर्ण है, तलाकशुदा महिलाओं के भविष्य की आजीविका न्याय का मूल आधार है... : thumbs up
 
Back
Top